Q. भारत में महिलाओं के अधिकारों की वकालत करने में महिला संगठनों की भूमिका का परीक्षण कीजिये। (उत्तर 200 शब्दों में दीजिये)
04 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 1 | भारतीय समाज
दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर
हल करने का दृष्टिकोणः
- भारत में महिलाओं के अधिकारों के ऐतिहासिक संदर्भ को संक्षेप में रेखांकित कीजिये।
- प्रमुख संगठनों, विभिन्न क्षेत्रों में उनके वकालत के प्रयासों और विधायी प्रभाव का उल्लेख कीजिये।
- भारत में सामाजिक परिवर्तन और महिलाओं के सशक्तिकरण पर उनके प्रभाव का सारांश दीजिये।
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परिचय
भारत में महिला आंदोलन स्वतंत्रता-पूर्व युग से ही चले आ रहे हैं, जहाँ 1927 में स्थापित अखिल भारतीय महिला सम्मेलन (AIWC) जैसे संगठनों ने महिलाओं की शिक्षा और राजनीतिक अधिकारों की वकालत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्वतंत्रता के बाद, 1972 में स्थापित स्व-रोजगार महिला संघ (SEWA) जैसे महिला समूहों ने अनौपचारिक क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और श्रम अधिकारों पर ध्यान केंद्रित किया।
मुख्य भाग
कानूनी सुधारों की वकालत
- महिला संगठनों ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से कानूनी सुधारों को चलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जैसेः
- कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न पर विशाखा दिशानिर्देश (1997) महिला समूहों के प्रयासों से आकार दिये गए थे।
- घरेलू हिंसा अधिनियम (2005) राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) जैसे संगठनों द्वारा निरंतर अभियानों के माध्यम से आया था।
- उन्होंने दहेज, बाल विवाह और कन्या भ्रूण हत्या से संबंधित कानूनों में सुधार पर भी जोर दिया है।
सामाजिक और सांस्कृतिक वकालत
- संगठनों ने पितृसत्तात्मक मानदंडों को चुनौती देने और सामाजिक परिवर्तनों की वकालत करने में भी भूमिका निभाई है।
- उदाहरण के लिये, गुलाबी गैंग एक ग्रामीण महिला आंदोलन है जो घरेलू हिंसा और लिंग आधारित भेदभाव जैसे मुद्दों पर केंद्रित है।
- इसके अतिरिक्त, जागोरी जैसे नारीवादी संगठन महिलाओं के खिलाफ हिंसा, प्रजनन अधिकारों और शरीर की स्वायत्तता के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
राजनीतिक सशक्तिकरण
- महिला संगठन महिलाओं के अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व की वकालत करने में सबसे आगे रहे हैं।
- महिला आरक्षण विधेयक के लिये अभियान, जिसके अंतर्गत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिये 33% सीटें आरक्षित की गई हैं, विभिन्न महिला समूहों द्वारा समर्थित किया गया है।
आर्थिक सशक्तिकरण
- सेवा और कामकाजी महिला मंच (WWF) जैसे संगठनों ने अनौपचारिक क्षेत्रों में महिलाओं को संगठित करके, उन्हें वित्तीय साक्षरता प्रदान करके और सूक्ष्मऋण (माइक्रोक्रेडिट) तक पहुँच सुनिश्चित करके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में काम किया है।
- उनके महत्त्वपूर्ण योगदान के बावजूद, भारत में महिला संगठनों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
धन की कमी, सीमित संसाधन और सामाजिक प्रतिरोध उनकी प्रभावशीलता में बाधा डाल सकते हैं। हालाँकि, विकास और प्रभाव के अवसर भी हैं।
- सोशल मीडिया और डिजिटल प्रौद्योगिकी के उदय ने वकालत और लामबंदी के लिये नए मंच प्रदान किये हैं। इसके अतिरिक्त, स्वयं सहायता समूहों को सरकारी सहायता में वृद्धि और मुद्रा ऋण और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ साझेदारी के माध्यम से महिला आंदोलन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
जैसे-जैसे राष्ट्र निरंतर विकसित हो रहा है, महिला संगठन निस्संदेह सतत विकास लक्ष्य 5: लैंगिक समानता प्राप्त करने के अनुरूप अधिक समतापूर्ण और न्यायपूर्ण समाज को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।