UP PCS Mains-2025

प्रश्न. विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागम महाकुंभ का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व बहुत समृद्ध है। उत्तर प्रदेश पर्यटन पर इसके प्रभाव और इसके व्यापक निहितार्थों का परीक्षण कीजिये। (12 अंक)

20 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 5 | भूगोल

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

हल करने का दृष्टिकोण: 

  • महाकुंभ के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व पर प्रकाश डालें। 
  • उत्तर प्रदेश के पर्यटन, अर्थव्यवस्था और वैश्विक मान्यता पर इसके प्रभाव का आकलन कीजिये। 
  • इसके पर्यटन क्षमता और सांस्कृतिक पहुँच को बढ़ाने के तरीके सुझाते हुए निष्कर्ष दीजिये।  

परिचय

विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम महाकुंभ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है। प्रयागराज में हर 12 वर्ष बाद मनाया जाने वाला यह आयोजन लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान मज़बूत होती है। 

मुख्य भाग 

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व: 

  • हिंदू पौराणिक कथाओं में निहित, महाकुंभ को समुद्र मंथन एवं दिव्य अमृत से जुड़ा हुआ माना जाता है, जो चार स्थानों- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में फैला हुआ है। 
  • इसका पहला उल्लेख 7वीं शताब्दी में हर्ष के शासनकाल के दौरान चीनी यात्री ह्वेन त्सांग द्वारा वर्णित किया गया है। 
  • यह आयोजन आध्यात्मिक शुद्धि, एकता और सामूहिक भक्ति का प्रतीक है, जो इसे भारत की अमूर्त विरासत का एक प्रमुख घटक बनाता है। 

उत्तर प्रदेश के पर्यटन पर प्रभाव: 

आर्थिक वृद्धि और राजस्व सृजन: 

  • वर्ष 2019 के कुंभ मेले ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में ₹1.2 लाख करोड़ का योगदान दिया (CII रिपोर्ट)। 
  • आतिथ्य, स्थानीय व्यवसाय और हस्तशिल्प उद्योगों को पर्यटकों की बढ़ती संख्या से काफी लाभ होता है। 

अवसंरचना विकास: 

  • सड़कों, पुलों, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों के विस्तार से कनेक्टिविटी तथा दीर्घकालिक पर्यटन संभावनाओं में सुधार होता है। 
  • प्रयागराज स्मार्ट सिटी पहल से स्वच्छता, जल आपूर्ति और सार्वजनिक परिवहन में सुधार हुआ। 

वैश्विक मान्यता और सॉफ्ट पावर: 

  • यूनेस्को ने वर्ष 2017 में कुंभ मेले को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में सूचीबद्ध किया। 
  • विदेशी प्रतिनिधिमंडल एवं अंतर्राष्ट्रीय मीडिया कवरेज से भारत के आध्यात्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा मिलता है। 

चुनौतियाँ और आगे की राह: 

  • पर्यावरण संबंधी चिंताएँ: अपशिष्ट प्रबंधन और नदी प्रदूषण के लिये सख्त नियमों की आवश्यकता है। 
  • भीड़भाड़ और प्रबंधन: AI-आधारित निगरानी जैसी डिजिटल प्रौद्योगिकियों के साथ भीड़ नियंत्रण में सुधार। 
  • सतत् पर्यटन: पर्यावरण अनुकूल तीर्थयात्रा सुविधाओं और नदी संरक्षण कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना। 

केस स्टडी – महाकुंभ 2019 मॉडल: 

  • एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्रों ने भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखी जिससे भगदड़ में कमी आई। 
  • 'नमामि गंगे' पहल से स्वच्छ नदी तट और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित हुआ। 

निष्कर्ष

चूँकि, महाकुंभ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह पर्यटन, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक कूटनीति के लिये उत्प्रेरक है। सतत् पर्यटन प्रथाओं, डिजिटल शासन और बुनियादी अवसरंचना के विकास का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश महाकुंभ की क्षमता को अधिकतम कर सकता है तथा स्वयं को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है।