Q. प्रासंगिक उदाहरणों का उपयोग करते हुए सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के बीच अंतर स्पष्ट कीजिये। शासन में सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करने के उपाय सुझाएँ।
12 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 4 | सैद्धांतिक प्रश्न
हल करने का दृष्टिकोण:
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सत्यनिष्ठा का अर्थ है प्रबल नैतिक सिद्धांतों और ईमानदारी का होना। इसका मतलब है नैतिक मानकों का पालन करना और भ्रष्टाचार या अनैतिक व्यवहार से बचना, विशेषकर पेशेवर संदर्भों में।
उदाहरण के लिये, एक सरकारी अधिकारी जो रिश्वत लेने से इनकार करता है और खरीद प्रक्रियाओं में सख्त नैतिक दिशा-निर्देशों का पालन करता है, वह ईमानदारी का परिचय देता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सार्वजनिक धन निष्पक्ष और कुशलतापूर्वक खर्च किया जाता है।
ईमानदारी में ईमानदारी और नैतिक तथा नैतिक सिद्धांतों का पालन भी शामिल है। हालाँकि, ईमानदारी में जीवन के सभी पहलुओं में मूल्यों के प्रति निरंतरता और पालन की व्यापक भावना शामिल है, न कि केवल पेशेवर आचरण। यह किसी व्यक्ति या संगठन की सही काम करने की प्रतिबद्धता को इंगित करता है, भले ही वह कठिन या अलोकप्रिय हो।
उदाहरण के लिये, अपनी ईमानदारी के लिये जाना जाने वाला व्यक्ति न केवल अपने पेशेवर जीवन में बल्कि व्यक्तिगत रिश्तों और दैनिक बातचीत में भी ईमानदारी और नैतिक व्यवहार बनाए रखता है। उदाहरण के लिये, खाली सड़कों पर भी ट्रैफिक सिग्नल का पालन करना।
शासन में सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करने हेतु उपाय:
इन उपायों को लागू करके सरकारें शासन में ईमानदारी बढ़ा सकती हैं, जिससे नागरिकों और हितधारकों के बीच विश्वास बढ़ेगा और भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण के जोखिम को कम किया जा सकेगा।