UP PCS Mains-2025

प्रश्न. सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम ने उत्तर प्रदेश में शासन को किस प्रकार प्रभावित किया है?(200 words)

18 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 5 | उत्तर प्रदेश स्पेशल

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

हल करने का दृष्टिकोण:

  • RTI अधिनियम और इसके उद्देश्यों के बारे में संक्षेप में बताइये।
  • उत्तर प्रदेश में शासन पर इस अधिनियम के प्रभाव पर प्रकाश डालिये। साथ ही इससे संबंधित चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिये।
  • आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष दीजिये।

 परिचय    

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 का उद्देश्य नागरिकों के लिये सूचना के अधिकार की व्यावहारिक व्यवस्था स्थापित करना, सार्वजनिक प्राधिकरणों के नियंत्रण के तहत सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करना, प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेहिता को बढ़ावा देना एवं केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों का गठन करना है।

मुख्य भाग

उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग की भूमिका

RTI कार्यान्वयन की देखरेख के लिये स्थापित इस आयोग का उद्देश्य अपीलों एवं शिकायतों का समय पर एवं निष्पक्ष तरीके से समाधान सुनिश्चित करना है। हालाँकि, लंबित मामलों और संसाधनों की कमी सहित परिचालन चुनौतियों ने इसकी प्रभावशीलता में बाधा उत्पन्न की है।

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम ने पारदर्शिता, जवाबदेहिता और नागरिक भागीदारी को बढ़ाकर उत्तर प्रदेश में शासन में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। राज्य सरकार ने इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के क्रम में कई पहलों को शुरू किया है, जिससे प्रशासनिक दक्षता और सार्वजनिक सहभागिता में सुधार हुआ है।

  • नागरिक जागरूकता और भागीदारी: सरकार ने इस अधिनियम के तहत नागरिकों को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करने के लिये RTI जागरूकता अभियान एवं कार्यशालाएँ आयोजित की। इससे लोग, सरकारी अधिकारियों से जवाबदेहिता की मांग करने और शासन में सक्रिय रूप से भाग लेने के क्रम में सशक्त हुए हैं।
  • प्रशासन में क्षमता निर्माण और दक्षता: लोक अधिकारियों के लिये नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से RTI प्रावधानों के बारे में इनकी समझ को बढ़ावा मिला है। इससे आवेदनों पर अधिक कुशलता के साथ समय पर प्रतिक्रिया सुनिश्चित होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार हुआ है एवं नौकरशाही की अक्षमता में कमी आई है।
  • पारदर्शिता और अनुपालन में वृद्धि: राज्य ने RTI आवेदनों और अपीलों के प्रबंधन के लिये विभिन्न विभागों में लोक सूचना अधिकारी (PIO) और प्रथम अपीलीय प्राधिकरण (FAA) नियुक्त किये हैं। इस संरचित दृष्टिकोण से अधिनियम के अनुपालन में सुधार होने के साथ सरकारी सूचनाओं तक लोगों की पहुँच सुगम हुई है।
  • निरंतर सुधार के लिये निगरानी एवं मूल्यांकन: RTI कार्यान्वयन की प्रभावशीलता का आकलन करने के क्रम में सरकार ने निगरानी एवं मूल्यांकन तंत्र शुरू किया है। ये उपाय संबंधित कमियों की पहचान करने, बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने तथा सूचना सुलभता को मज़बूत करने के क्रम में सुधारों को आगे बढ़ाने में सहायक हैं।
  • शिकायत निवारण और सार्वजनिक सेवा वितरण: RTI आवेदनों से संबंधित शिकायत निवारण के लिये समर्पित तंत्र स्थापित किये जाने से नागरिकों को सूचना में देरी या सूचना न मिलने से संबंधित मामलों के निवारण हेतु मंच उपलब्ध हुआ है। इस पहल से लोक सेवा वितरण में जवाबदेहिता और दक्षता को बढ़ावा मिला है।
  • सूचना का सक्रिय प्रकटीकरण: सरकार ने सक्रिय प्रकटीकरण की दिशा में कार्य किया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि आवश्यक जानकारी आधिकारिक वेबसाइटों पर प्रकाशित की जाए। यह पहल औपचारिक RTI आवेदनों की आवश्यकता को कम करने के साथ शासन में पारदर्शिता की संस्कृति को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

कार्यान्वयन में चुनौतियाँ

इसके लाभों के बावजूद, उत्तर प्रदेश में RTI अधिनियम के कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न चुनौतियाँ हैं:

  • नौकरशाही की निष्क्रियता: अधिकारी अक्सर अस्पष्ट कारणों का हवाला देकर या अधिनियम के तहत छूट का दुरुपयोग करके सूचना देने में देरी करते हैं या सूचना देने से मन करते हैं।
  • जागरूकता का अभाव: अनेक नागरिक (विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में) सूचना प्राप्त करने के अपने अधिकार के बारे में अनभिज्ञ हैं, जिससे अधिनियम की प्रभावशीलता सीमित हो जाती है।
  • धमकियाँ और भय: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक विफलताओं को उजागर करने के कारण कई RTI कार्यकर्त्ताओं को उत्पीड़न तथा धमकियों का सामना करना पड़ा है।
  • लंबित मामलों की संख्या: राज्य सूचना आयोग के समक्ष काफी संख्या में मामले लंबित हैं, जिससे न्याय में देरी होने के साथ अधिनियम की प्रभावशीलता सीमित हो रही है।

निष्कर्ष

इस अधिनियम की पूर्ण क्षमता का उपयोग करने के क्रम में जन जागरूकता में वृद्धि एवं सूचना चाहने वालों की सुरक्षा के साथ राज्य सूचना आयोग को मज़बूत बनाने के माध्यम से इससे संबंधित कार्यान्वयन चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है।