UP PCS Mains-2025

प्रश्न. उत्तर प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण पर "नमामि गंगे कार्यक्रम" के प्रभाव एवं इसकी क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा कीजिये। (8 अंक)

20 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 6 | उत्तर प्रदेश स्पेशल

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

हल करने का दृष्टिकोण:

  • नमामि गंगे कार्यक्रम के उद्देश्य पर चर्चा कीजिये।
  • उत्तर प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण पर कार्यक्रम के प्रभाव का मूल्यांकन कीजिये।
  • इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालिये।
  • बेहतर परिणाम के लिये नीतियों के रणनीतिक कार्यान्वयन एवं सामुदायिक भागीदारी का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष लिखिये।

परिचय

नमामि गंगे कार्यक्रम प्रदूषण नियंत्रण, जैव-विविधता संरक्षण और सतत् जल प्रबंधन पर केंद्रित है। 22,500 करोड़ रुपए आवंटित करने के साथ इसका उद्देश्य जल की गुणवत्ता में सुधार करना और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में पारिस्थितिक तंत्र को बहाल करना है। 

मुख्य भाग 

उत्तर प्रदेश में प्रभाव: 

  • औद्योगिक प्रवाह नियंत्रण: कानपुर के चमड़ा उद्योग में CETP ने अपशिष्ट निर्वहन में 28.6% की कमी और BOD लोड में 47.2% की कमी के साथ 39% से 82% तक अनुपालन में वृद्धि करते हुए विषाक्त निर्वहन को कम किया है। 
  • जैव-विविधता संरक्षण और इकोटूरिज्म: नरोरा और हस्तिनापुर में डॉल्फिन देखे जाने में वृद्धि; वाराणसी और प्रयागराज में इको-टूरिज्म ने स्थानीय रोज़गार को बढ़ावा दिया। 
  • सामुदायिक जुड़ाव और जागरूकता: गंगा ग्राम पहल ने गाँवों से शून्य अपशिष्ट जल निर्वहन सुनिश्चित किया, जबकि 1 करोड़ से अधिक स्वयंसेवकों ने स्वच्छ गंगा अभियान में भाग लिया। 

चुनौतियाँ: 

  • अपशिष्ट जल कुप्रबंधन: टेनरियों (चर्मशोधनशाला) और शहरों से अनियमित निर्वहन नदी को प्रदूषित करना जारी रखता है। 
  • प्लास्टिक प्रदूषण: प्लास्टिक, धार्मिक प्रसाद और मानव अपशिष्ट का अनियंत्रित डंपिंग प्रदूषण को बढ़ाता है। 
  • अतिक्रमण और वनों की कटाई: शहरीकरण और अवैध बस्तियाँ पारिस्थितिकी तंत्र को खराब करती हैं। 
  • जवाबदेही का अभाव: उपचार संयंत्रों का खराब रखरखाव और कमज़ोर प्रवर्तन प्रगति में बाधा डालते हैं। 

निष्कर्ष

हालाँकि इस कार्यक्रम ने महत्त्वपूर्ण प्रगति की है, प्रदूषण नियंत्रण, जवाबदेही और सामुदायिक भागीदारी पर ध्यान स्थायी प्रबंधन के लिये महत्त्वपूर्ण है।