UP PCS Mains-2025

प्रश्न. ग्रामीण गरीबी उन्मूलन पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के प्रभाव का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये। (उत्तर 125 शब्दों में दीजिये)

11 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 3 | अर्थव्यवस्था

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

हल करने का दृष्टिकोणः

  •  ग्रामीण रोजगार और गरीबी उन्मूलन के लिये सामाजिक सुरक्षा जाल के रूप में मनरेगा को संक्षेप में समझाइए। 
  • आजीविका सुरक्षा प्रदान करने, ग्रामीण गरीबी को कम करने, ग्रामीण अवसंरचना में सुधार करने और महिलाओं तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों जैसे हाशिये के समूहों को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका पर चर्चा कीजिये। 
  • विलंबित भुगतान, भ्रष्टाचार, स्थायी परिसंपत्ति निर्माण का अभाव और क्षेत्रीय असमानता जैसे मुद्दों पर प्रकाश डालिये। 
  • एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत कीजिये तथा इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिये सुधार सुझाइए।

 परिचय

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) वर्ष 2005 में लागू किया गया था। यह अधिनियम ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को, जो रोजगार की मांग करते हैं तथा अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिये तैयार हैं, एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देता है। इस अधिनियम का उद्देश्य उस क्षेत्र की अवसंरचना के विकास के लिये कार्यों के माध्यम से मजदूरी रोजगार उत्पन्न करके ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है।

मुख्य भाग

सकारात्मक प्रभावः

  • रोजगार सृजनः महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत कुल 5.22 करोड़ परिवारों ने रोजगार प्राप्त किया कुल 223.54 करोड़ व्यक्ति-दिनों की रोजगार सृजन की गई है (15 जनवरी, 2025 तक)।
  • आय स्थिरताः आय का स्रोत सुनिश्चित करके, इस योजना ने ग्रामीण परिवारों के बीच आय स्थिरता में योगदान दिया है, जिससे भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा तक बेहतर पहुँच संभव हुई है।
  • प्रवासन में कमीः स्थानीय रोजगार की उपलब्धता ने शहरी क्षेत्रों की ओर होने वाले संकटपूर्ण प्रवासन को कम कर दिया है, जिससे परिवारों को एक साथ रहने और सामाजिक सामंजस्य बनाए रखने में सहायता मिली है।
  • परिसंपत्ति सृजनः इस कार्यक्रम ने ग्रामीण अवसंरचना के विकास में योगदान दिया है, जैसे कि जल संरक्षण परियोजनाएँ, कृषि उत्पादकता में वृद्धि और दीर्घकालिक गरीबी उन्मूलन में सहायता।
  • हाशिये पर रह रहे समुदायों का सशक्तीकरणः वित्त वर्ष 2024-25 में, मनरेगा के तहत 19.04% व्यक्ति-दिवस अनुसूचित जातियों द्वारा, 17.8% अनुसूचित जनजातियों द्वारा और 58.03% महिलाओं द्वारा सृजित किये गए।

चुनौतियाँः

  • कार्यान्वयन में अंतरालः वेतन भुगतान में देरी, लाभार्थियों में अपर्याप्त जागरूकता और नौकरशाही संबंधी बाधाओं जैसे मुद्दों ने योजना की प्रभावशीलता में बाधा उत्पन्न की है।
  • भ्रष्टाचार और लीकेजः धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, जिससे कार्यक्रम के उद्देश्य कमज़ोर हुए हैं।
  • क्षेत्रीय असमानताएँः इस योजना का कार्यान्वयन राज्यों में असमान रहा है, कुछ क्षेत्र आवंटित धनराशि का पूर्ण उपयोग करने में विफल रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप लाभ में असमानताएँ उत्पन्न हुई हैं।
  • परिसंपत्ति की गुणवत्ता पर सीमित प्रभावः मनरेगा के अंतर्गत निर्मित परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और स्थिरता के बारे में चिंताएँ व्यक्त की गई हैं, जिससे दीर्घकालिक ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है।
  • मजदूरी दर के मुद्देः वित्त वर्ष 2024-25 के लिये प्रति व्यक्ति प्रतिदिन औसत मजदूरी दर 249.87 रुपए है। कुछ मामलों में, मनरेगा मजदूरी मौजूदा कृषि मजदूरी से कम है, जिससे संभावित श्रमिकों के लिये योजना का आकर्षण कम हो जाता है।

निष्कर्ष

मनरेगा ने ग्रामीण गरीबी को कम करने और हाशिये पर रह रहे समुदायों को सशक्त बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालाँकि, इसके प्रभाव को अधिकतम करने के लिये, कार्यान्वयन चुनौतियों का समाधान करना, समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करना, पारदर्शिता बढ़ाना और बनाई गई परिसंपत्तियों की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक कदम हैं।