UP PCS Mains-2025

Q. वहाबी आंदोलन की विचारधारा और उत्तर प्रदेश में इसके प्रभाव को समझाइये। रायबरेली के सैयद अहमद ने इस आंदोलन के माध्यम से ब्रिटिश शासन को कैसे चुनौती दी?

16 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 5 | उत्तर प्रदेश स्पेशल

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

हल करने का दृष्टिकोण: 

  • वहाबी आंदोलन का संक्षिप्त परिचय लिखिये। 
  • आंदोलन की मूल विचारधारा और सैयद अहमद के नेतृत्व के माध्यम से इसके प्रभाव की व्याख्या कीजिये। 
  • आंदोलन के महत्त्व पर ध्यान देते हुए निष्कर्ष लिखिये। 

परिचय

वहाबी आंदोलन, एक इस्लामी पुनरुत्थानवादी आंदोलन था, जिसकी स्थापना 19वीं शताब्दी की शुरुआत में रायबरेली के सैयद अहमद ने की थी। यह भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ एक महत्त्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा। सऊदी अरब के अब्दुल वहाब और दिल्ली के शाह वलीउल्लाह की शिक्षाओं से प्रभावित इस आंदोलन का उद्देश्य इस्लाम और समाज को शुद्ध करना था, ताकि इसे पैगंबर मुहम्मद के समय की मूल प्रथाओं की ओर लौटाया जा सके।

मुख्य भाग

वहाबी आंदोलन के पीछे की विचारधारा 

  • शुद्ध इस्लाम की ओर वापसी: इस आंदोलन ने आधुनिकता और पश्चिमी प्रभाव को अस्वीकार करते हुए इस्लाम की प्रारंभिक प्रथाओं की ओर लौटने का आह्वान किया। 
  • ब्रिटिश शासन के विरुद्ध ज़िहाद: वहाबियों ने ब्रिटिशों के खिलाफ जिहाद की घोषणा की, उन्हें दारुल-हरब (युद्ध क्षेत्र) के कब्जेदार के रूप में देखा, और इस्लामी शासन स्थापित करने का प्रयास किया।
  • दार-उल-इस्लाम का निर्माण: इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को इस्लामी शासन के साथ प्रतिस्थापित करते हुए इस्लामी कानूनों द्वारा शासित राज्य की स्थापना करना था। 

उत्तर प्रदेश में वहाबी आंदोलन का प्रभाव 

  • सैयद अहमद का नेतृत्व: रायबरेली के सैयद अहमद ने आंदोलन का नेतृत्व किया और इसकी विचारधारा को संपूर्ण उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश में फैलाया। 
  • सैन्य अभियान: इस आंदोलन ने आरंभ में पंजाब के सिख साम्राज्य के विरुद्ध और बाद में वर्ष 1849 में पंजाब पर कब्ज़ा करने के बाद अंग्रेज़ों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया। 
  • गुप्त संगठन: अनुयायियों की भर्ती के लिये एक गुप्त नेटवर्क स्थापित किया गया और उत्तर प्रदेश आंदोलन की गतिविधियों का प्रमुख आधार बन गया। 

सैयद अहमद की ब्रिटिश शासन को चुनौती 

  • धार्मिक लामबंदी: सैयद अहमद ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ मुसलमानों को एकजुट करने और जिहाद को बढ़ावा देने के लिये धार्मिक अपील का इस्तेमाल किया। 
  • ब्रिटिश दमन का पर्दाफाश: इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के अधीन मुसलमानों के शोषण को उज़ागर किया और उनके हितों की रक्षा के लिये इस्लामी शासन की मांग की। 
  • सशस्त्र प्रतिरोध: वहाबियों ने उत्तर प्रदेश में ब्रिटिश नियंत्रण को चुनौती देते हुए ब्रिटिश सेना और सहयोगियों के खिलाफ छापे मारे। 

निष्कर्ष

सैयद अहमद के वहाबी आंदोलन ने धार्मिक पुनरुत्थान को राजनीतिक विरोध के साथ जोड़ा, जिससे उत्तर प्रदेश में ब्रिटिश शासन के लिये एक बड़ी चुनौती उत्पन्न हुई। हालाँकि इसे दबा दिया गया, लेकिन इसकी विरासत बाद के औपनिवेशिक विरोधी आंदोलनों को प्रेरित करती रही।