Q. भारत में सुशासन सुनिश्चित करने में सिविल सेवाओं की भूमिका का मूल्यांकन कीजिये। भारतीय लोकतंत्र में उनकी प्रभावशीलता में उन्नति के लिये किन सुधारों की आवश्यकता है? (उत्तर 200 शब्दों में दीजिये)
05 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 2 | राजव्यवस्था
हल करने का दृष्टिकोणः
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ब्रिटिश शासन के दौरान मूल रूप से कानून और व्यवस्था बनाए रखने का काम करने वाली भारत की सिविल सेवाएँ अब एक व्यापक भूमिका निभाती हैं। प्रशासन के ‘स्टील फ्रेम’ के रूप में कार्य करते हुए उन्हें सामाजिक परिवर्तन के एजेंट और राष्ट्रीय विकास के चालक के रूप में देखा जाता है।
भारत में सिविल सेवाओं द्वारा निभाई जाने वाली विभिन्न भूमिकाएँ इस प्रकार हैंः
विकासशील देशों में सिविल सेवा को बढ़ती जन अपेक्षाओं और सीमित सरकारी क्षमता के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन मांगों को पूरा करने के लिये, इसे कम तकनीकी, लोगों से अधिक जुड़ा हुआ और उनकी जरूरतों में निहित होना चाहिये। इससे जनता का विश्वास बढ़ेगा और सेवा अधिक प्रभावी बनेगी।
इसलिये, पिछले कुछ वर्षों में सिविल सेवाओं में और सुधार लाने के लिये कई प्रयास किये गए हैं, लेकिन सिविल सेवा की धारणा अभी भी किराया-मांगने की प्रवृत्ति, कामकाज में अस्पष्टता, जटिल प्रक्रियाएँ, लालफीताशाही और जवाबदेही की कमी से प्रभावित है।
योग्यता आधारित पदोन्नति, डोमेन-विशिष्ट प्रशिक्षण, राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करना, नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना, प्राधिकरण का विकेंद्रीकरण, जवाबदेही तंत्र को मज़बूत करना और नियमित नैतिक प्रशिक्षण जैसे सुधार सिविल सेवाओं की प्रभावशीलता को बढ़ा सकते हैं। इन परिवर्तनों से शासन में सुधार होगा, कार्यकुशलता बढ़ेगी तथा भारत की प्रशासनिक प्रणाली में जनता का विश्वास बढ़ेगा।