प्रश्न . वाराणसी में स्वच्छ नदियों पर स्मार्ट प्रयोगशाला की स्थापना के पीछे त्रिपक्षीय पहल का वर्णन कीजिये।
20 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 5 | उत्तर प्रदेश स्पेशल
हल करने का दृष्टिकोण:
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वाराणसी में स्वच्छ नदियों पर स्मार्ट प्रयोगशाला (SLCR) भारत सरकार, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (IIT-BHU) और डेनमार्क सरकार के बीच त्रिपक्षीय साझेदारी के माध्यम से स्थापित एक सहयोगी पहल है। इस साझेदारी का उद्देश्य संधारणीय विधियों का उपयोग करके वरुणा नदी को पुनर्जीवित करने के लिये दोनों देशों की विशेषज्ञता का लाभ उठाना है।
SLCR के मुख्य उद्देश्य:
SLCR पहल का उद्देश्य सतत्, पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का उपयोग करके वरुणा नदी को बहाल करना है। बहाली प्रक्रिया को इस प्रकार डिज़ाईन किया गया है:
हाइब्रिड लैब मॉडल- IIT-BHU में एक हाइब्रिड लैब वरुणा नदी पर स्थित "लिविंग लैब" के साथ मिलकर कार्य करेगी। इससे शोधकर्त्ताओं को वास्तविक परिवेश में समाधानों का परीक्षण करने और उन्हें मापने की अनुमति मिलेगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रस्तावित समाधान प्रभावी हैं और स्थानीय संदर्भ में लागू हैं।
सतत जल प्रबंधन - यह पहल जल प्रबंधन के लिये संधारणीय विधियों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिसमें निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) का विकास भी शामिल है, जो जल विज्ञान मॉडल, डेटा विश्लेषण और पूर्वानुमान उपकरणों का उपयोग करके जल गतिशीलता का विश्लेषण करेगी।
प्रदूषण नियंत्रण - यह परियोजना क्रोमैटोग्राफी और मास स्पेक्ट्रोमेट्री जैसी उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों के माध्यम से उभरते प्रदूषकों की पहचान करेगी, जिसका उद्देश्य नदी से प्रदूषकों की पहचान करना और उन्हें हटाना है।
जल-भूवैज्ञानिक हस्तक्षेप - वरुणा बेसिन का जल-भूवैज्ञानिक मॉडल प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण (MAR) के माध्यम से नदी के आधार प्रवाह को बढ़ाएगा, यह एक ऐसी विधि है जो नदी के जल स्तर में सुधार करती है और स्थायी भूजल पुनःपूर्ति सुनिश्चित करती है।
संधारणीय विधियों को अपनाकर, यह परियोजना वाराणसी में नदी पुनरुद्धार के लिये एक आशाजनक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। यह पहल महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दों को संबोधित करने में सहयोगात्मक प्रयासों के महत्त्व का उदाहरण है।