UP PCS Mains-2025

Q. वर्ष 1917 की रूसी क्रांति के महत्त्व की विवेचना कीजिये। (उत्तर 125 शब्दों में दीजिये)

03 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 1 | इतिहास

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

हल करने का दृष्टिकोणः

  • क्रांति के कारणों का संक्षेप में वर्णन कीजिये।
  • क्रांति के बहुआयामी प्रभावों की विवेचना कीजिये।
  • साम्यवादी विचारधारा का विश्वव्यापी प्रसार एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर उसके प्रभाव का उल्लेख कीजिये।
  • वैश्विक इतिहास पर इसके दीर्घकालिक महत्त्व को संक्षेप में प्रस्तुत कीजिये।

परिचय

वर्ष 1917 की रूसी क्रांति से रूस में सदियों के शाही शासन के अंत के साथ कम्युनिस्ट राज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसमें दो प्रमुख घटनाएँ शामिल थींः फरवरी क्राँति, जिसके कारण जार निकोलस को सत्ता से त्याग करना पड़ा एवं अक्तूबर क्रांति, जिससे बोल्शेविक सत्ता में आए।

मुख्य भाग

इस क्रांति के महत्त्व पर विभिन्न आयामों के तहत चर्चा की जा सकती हैः

राजनीतिक महत्त्व

रूसी क्रांति से सदियों पुराने निरंकुश जारवादी शासन का समापन हुआ और बोल्शेविकों के नेतृत्व में एक समाजवादी सरकार का गठन हुआ। यह पहली सफल मार्क्सवादी क्रांति थी, जिससे विश्व भर में भविष्य के समाजवादी आंदोलनों के लिये एक उदाहरण स्थापित हुआ। एकदलीय शासन की स्थापना और वर्ष 1922 में सोवियत संघ के निर्माण से शीत युद्ध के दौर में वैश्विक राजनीति को प्रभावित करते हुए 20वीं सदी के राजनीतिक परिदृश्य के परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हुआ।

सामाजिक महत्त्व

सामाजिक आयाम पर इस क्रांति के व्यापक परिणाम (खासकर मजदूर वर्ग और किसानों के लिये) रहे। इसका उद्देश्य एक वर्गहीन समाज की स्थापना करने के साथ सामंती विशेषाधिकारों को समाप्त करना था, जिससे भूमि तथा संसाधनों का पुनर्वितरण हो सके। उद्योगों एवं सामूहिक खेती के श्रमिक नियंत्रण पर बोल्शेविकों के ध्यान से विश्व भर में श्रमिक आंदोलन प्रभावित हुए तथा यूरोप एवं एशिया में वामपंथी विचारधाराओं का उदय प्रेरित हुआ।

आर्थिक महत्त्व

क्रांति से पहले, रूस की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान थी और औद्योगीकरण सीमित था। क्रांति के बाद, बोल्शेविकों ने युद्ध साम्यवाद एवं नई आर्थिक नीति जैसी नीतियों को लागू किया, जिससे अर्थव्यवस्था को केंद्रीकृत करने एवं उद्योगों के राष्ट्रीयकरण की मांग को बढ़ावा मिला। हालाँकि गृहयुद्ध के दौरान अर्थव्यवस्था को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इन नीतियों से स्टालिन की पंचवर्षीय योजनाओं के लिये आधार तैयार हुआ, जिससे सोवियत संघ एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र में बदल गया।

वैश्विक प्रभाव

रूसी क्रांति से विश्व भर में कम्युनिस्ट आंदोलन प्रेरित होने के साथ चीन, क्यूबा और वियतनाम जैसे देशों में क्रांतियों पर प्रभाव पड़ा। वर्ष 1919 में कॉमिन्टर्न की स्थापना से समाजवादी विचारों का प्रसार सुविधाजनक हुआ तथा शीत युद्ध के दौरान साम्यवाद और पूंजीवाद के बीच वैश्विक संघर्ष में सोवियत संघ केंद्र बिंदु बन गया।

प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध पर प्रभाव

इस क्रांति से प्रथम विश्व युद्ध पर व्यापक प्रभाव पड़ा क्योंकि रूस वर्ष 1918 में ब्रेस्ट-लिटोव्स्क की संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद संघर्ष से हट गया। इस क्रांति से वैचारिक संघर्षों का आधार तैयार हुआ, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध एवं युद्ध के बाद के विश्व की भू-राजनीति (विशेष रूप से कम्युनिस्ट विचारधाराओं की प्रतिक्रिया के रूप में फासीवाद के उदय के साथ) को आकार मिला।

निष्कर्ष

वर्ष 1917 की रूसी क्रांति न केवल रूस के लिये बल्कि पूरे विश्व के लिये दूरगामी परिणामों के साथ एक परिवर्तनकारी घटना थी।