Q. भारत में गरीबी और भुखमरी के बीच संबंधों पर चर्चा कीजिये। हाल की सरकारी नीतियों के उदाहरणों के साथ इसे स्पष्ट कीजिये। (उत्तर 200 शब्दों में दीजिये)
04 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 2 | सामाजिक न्याय
दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर
हल करने का दृष्टिकोणः
- भारत में गरीबी और भुखमरी के बीच चक्रीय संबंध पर प्रकाश डालिये।
- गरीबी और भुखमरी की दोहरी चुनौतियों पर आँकड़ों के साथ चर्चा कीजिये तथा NFSA, PMGKAY, ICDS और मनरेगा जैसी सरकारी नीतियों का उल्लेख कीजिये जो इन मुद्दों का समाधान करती हैं।
- व्यापक नीतियों की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिये।
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परिचय
भारत में गरीबी और भूख के बीच का रिश्ता जटिल और चक्रीय है। गरीबी अक्सर भूख की ओर ले जाती है क्योंकि कम आय वाले व्यक्ति और परिवार पर्याप्त और पौष्टिक भोजन का खर्च उठाने के लिये संघर्ष करते हैं। इसके विपरीत, भूख शारीरिक स्वास्थ्य को कम करके, उत्पादकता को कम करके और शिक्षा के अवसरों को सीमित करके गरीबी को बढ़ाती है, जिससे गरीबी का चक्र चलता रहता है।
मुख्य भाग
भारत में गरीबी और भुखमरीः
- भारत, सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद, गरीबी और भूख दोनों से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2023 के अनुसार, भारत 121 देशों में से 107वें स्थान पर है, जो भूख के गंभीर स्तर को दर्शाता है। कई गरीब परिवार दीर्घकालिक विकास की तुलना में तत्काल जीवनयापन को प्राथमिकता देते हैं, जिससे कुपोषण और खाद्य असुरक्षा होती है।
गरीबी और भुखमरी से निपटने के लिये सरकारी नीतियाँः
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013: इस ऐतिहासिक कानून का उद्देश्य भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी को सब्सिडी वाला खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। NFSA के तहत, गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को अत्यधिक रियायती दरों पर प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न मिलता है। यह नीति सीधे तौर पर भूख को संबोधित करती है और कमज़ोर आबादी के लिये खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करके गरीबी को कम करने में मदद करती है।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY): कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई इस पहल के तहत गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक संकट का सामना कर रहे लोगों की सहायता करना था, जिससे भूखमरी कम हो और गरीब परिवारों को सुरक्षा कवच प्रदान किया जा सके।
- एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (ICDS): यह कार्यक्रम छह वर्ष से कम आयु के बच्चों और उनकी माताओं की पोषण तथा स्वास्थ्य स्थिति में सुधार लाने पर केंद्रित है। यह खाद्य वितरण को स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और सशक्तिकरण पहलों के साथ जोड़ता है, जिससे गरीबी तथा भुखमरी दोनों की समस्या का समाधान होता है।
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा): एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों की गारंटीकृत मज़दूरी रोज़गार प्रदान करके, मनरेगा ग्रामीण परिवारों को अपनी आय बढ़ाने में मदद करता है, जिससे भोजन के लिये उनकी क्रय शक्ति में सुधार होता है।
निष्कर्ष
गरीबी और भुखमरी के आपस में जुड़े मुद्दों के समाधान के लिये व्यापक नीतियों की आवश्यकता है जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें, आजीविका को बढ़ाएँ और सतत् विकास को बढ़ावा दें। भारत में हाल ही में की गई सरकारी पहल इस चक्र को तोड़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, फिर भी कार्यान्वयन और कवरेज में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।