UP PCS Mains-2025

Q. स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल तक पहुँच सुनिश्चित करने में नैनो प्रौद्योगिकी की भूमिका का परीक्षण कीजिये। (उत्तर 125 शब्दों में दीजिये)

12 Mar 2026 | सामान्य अध्ययन पेपर 3 | विज्ञान-प्रौद्योगिकी

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

हल करने का दृष्टिकोणः

  • नैनो प्रौद्योगिकी को परिभाषित कीजिये।
  • जल शुद्धिकरण में नैनो प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों पर प्रकाश डालिये तथा भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में इसकी भूमिका, इससे संबंधित चुनौतियों तथा आगे के राह पर चर्चा कीजिये।
  • यथोचित निष्कर्ष लिखिये।

परिचय

परमाणु तथा आण्विक स्तर पर पदार्थ को संशोधित करके, आमतौर पर 1 से 100 नैनोमीटर के बीच, नैनो प्रौद्योगिकी विशेष गुणों वाले उपकरण एवं संरचनाएँ बनाती है।

  • भारत अपनी विशाल आबादी के लिये स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल तक पहुँच सुनिश्चित करने में एक गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। यूनिसेफ की रिपोर्ट है कि 21% से अधिक भारतीयों के घरों तक स्वच्छ पेयजल की पहुँच नहीं है, जो गंभीर स्वास्थ्य खतरे उत्पन्न करता है और सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है।

मुख्य भाग

जल शोधन में नैनो प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगः

  • नैनो-मेम्ब्रेंसः 1 से 100 नैनोमीटर के बीच के छिद्रों वाली ये मेम्ब्रेंस बैक्टीरिया, वायरस एवं हानिकारक रसायनों जैसे दूषित पदार्थों को कुशलतापूर्वक फिल्टर करती हैं। वे विकेंद्रित जल शोधन को सक्षम बनाते हैं, जिससे आवासीय समुदायों को लाभ होता है।
  • नैनोकणः इंजीनियर्ड नैनोकण भारी धातुओं और कार्बनिक यौगिकों जैसे प्रदूषकों को हटाकर अत्यधिक प्रभावी अवशोषक के रूप में कार्य करते हैं। वे कीटाणुशोधन उत्प्रेरक के रूप में भी कार्य कर सकते हैं, रोगजनकों को समाप्त करने के लिये यूवी प्रकाश या ऊष्मा का उपयोग कर सकते हैं।
  • इलेक्ट्रोस्पन नैनोफाइबरः इन अति-पतले फाइबर का उपयोग माइक्रोप्लास्टिक्स के साथ-साथ प्रदूषकों को फिल्टर करने के लिये किया जाता है। उनका बड़ा सतह क्षेत्र जल शोधन में दक्षता बढ़ाता है।
  • कार्बन डॉट्स (CDs): कार्बन डॉट्स का उपयोग उन्नत जल उपचार प्रक्रियाओं में किया जाता है, जो पतली-फिल्म नैनोकम्पोजिट मेम्ब्रेंस में नैनो-फिलर्स के रूप में कार्य करते हैं। वे दूषित पदार्थों के साथ रासायनिक बंधन बनाते हैं, जिससे मेम्ब्रेंस के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार होता है।

जल उपचार में नैनो प्रौद्योगिकी के लाभ

  • उच्च दक्षताः नैनोमटेरियल पारंपरिक निस्पंदन विधियों की तुलना में कम ऊर्जा लागत पर प्रदूषकों को सटीक रूप से हटाने में सक्षम बनाते हैं।
  • लागत प्रभावशीलताः फिल्टर का जीवनकाल लंबा होने और रसायनों का कम उपयोग होने के कारण दीर्घकालिक रखरखाव व्यय कम होता है, हालाँकि प्रारंभिक लागत अत्यधिक हो सकती है।
  • पारिस्थितिकी के अनुकूलः कई नैनो सामग्री हानिकारक उप-उत्पादों का उत्पादन किये बिना प्रदूषक विघटन की सुविधा प्रदान करती हैं।

चुनौतियाँ तथा भविष्य की संभावनाएँ

इसकी क्षमता के बावजूद, उच्च उत्पादन लागत, कुछ नैनोमटेरियल की संभावित विषाक्तता एवं विनियामक चिंताओं जैसी चुनौतियों का समाधान किया जाना चाहिये। भविष्य के शोध को सभी के लिये सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिये सतत्, किफायती एवं स्केलेबल नैनो प्रौद्योगिकी-आधारित जल शोधन प्रणाली विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये।

निष्कर्ष

इस प्रकार, नैनो प्रौद्योगिकी वैश्विक जल सुरक्षा को संबोधित करने में परिवर्तनकारी क्षमता रखती है, जो इसे सतत् विकास लक्ष्य-6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) को प्राप्त करने में एक महत्त्वपूर्ण उपकरण साबित हो सकती है।