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डेली न्यूज़

  • 18 Jan, 2019
  • 29 min read
शासन व्यवस्था

लोकपाल पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश

चर्चा में क्यों ?


हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लोकपाल पद के लिये केंद्र की सर्च कमेटी को निर्देश दिया गयाहै कि वह फरवरी के अंत तक नियुक्ति हेतु नामों को अंतिम रूप देने का कार्य संपन्न करे।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने लोकपाल पद की नियुक्ति के लिये केंद्र की सर्च कमेटी को फरवरी के अंत तक नामों को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है, जिससे चेयरपर्सन और भ्रष्टाचार-विरोधी संस्था के सदस्यों के नामों को सार्वजानिक किया जा सके।
  • शीर्ष अदालत ने बार-बार लोकपाल नियुक्त करने में विफल रहने के लिये केंद्र सरकार को फटकार लगाई, जिसके प्रतिउत्तर में केंद्र सरकार ने लोकसभा में विपक्ष के नेता की अनुपस्थिति को चयन समिति के गठन में देरी की वजह बताया।
  • हालाँकि, भारत के अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कुछ समय पहले ही अदालत को बताया था कि लोकपाल की स्थापना की प्रक्रिया चल रही है। सितंबर में ही केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में एक आठ सदस्यीय समिति का गठन किया, जिसमें अरुंधति भट्टाचार्य (भारतीय स्टेट बैंक की पूर्व चेयरपर्सन), ए. सूर्य प्रकाश (प्रसार भारती के चेयरपर्सन) ए.एस. किरण कुमार (पूर्व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की चेयरपर्सन) सखा राम सिंह यादव (इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश) रंजीत कुमार (पूर्व महाधिवक्ता) शामिल है।

लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013

  • 1 जनवरी, 2014 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक, 2013 पर हस्ताक्षर करते ही यह विधेयक ‘अधिनियम’ बन गया।
  • इसमें केंद्र स्तर पर लोकपाल और राज्य स्तर पर लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
  • इस अधिनियम में सार्वजनिक व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच के लिये एक सांविधिक निकाय का गठन किया गया था।

अधिनियम के प्रमुख प्रावधान

  • लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से 50% सदस्य न्यायिक पृष्ठभूमि से होने चाहिये।
  • लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों का चयन एक ‘चयन समिति’ के माध्यम से किया जाएगा जिसमें भारत के प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा के विपक्ष के नेता, भारत के प्रमुख न्यायधीश या मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश शामिल होंगे। एक अन्य सदस्य कोई प्रख्यात विधिवेत्ता होगा जिसे इन चार सदस्यों की सिफारिश पर राष्ट्रपति नामित करेंगे।
  • लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में लोकसेवकों की सभी श्रेणियाँ होंगी।
  • कुछ सुरक्षा उपायों के साथ प्रधानमंत्री को भी इस अधिनियम के दायरे में लाया गया है।
  • अधिनियम के अंतर्गत ईमानदार लोकसेवकों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
  • अधिनियम में भ्रष्ट तरीकों से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करने का भी प्रावधान है चाहे अभियोजन का मामला लंबित ही क्यों न हो।
  • अधिनियम में प्रारंभिक जाँच और ट्रायल के लिये स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की गई है। ट्रायल के लिये विशेष अदालतों के गठन का भी प्रावधान है।

अन्य महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • इस अधिनियम के वर्ष 2014 में लागू हो जाने के बावजूद आज तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पाई है। लोकपाल के अभाव में यह अधिनियम क्रियान्वित नहीं हो पा रहा है। एक गैर-सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ ने सर्वोच्च न्यायालय में पिटीशन लगाई कि सरकार जान-बूझकर लोकपाल की नियुक्ति नहीं कर रही है। नवंबर 2016 में सर्वोच्च न्यायालय ने भी सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि लोकपाल कानून को एक ‘मृत पत्र (dead letter)’ नहीं बनने दिया जा सकता।
  • लोकपाल की नियुक्ति न हो पाने के संदर्भ में सरकार का अपना एक तर्क है। सरकार के अनुसार, लोकपाल के चुनाव के लिये जो चयन-समिति होती है, उसमें एक सदस्य ‘लोकसभा में विपक्ष का नेता’ होता है। परंतु, 16वीं लोकसभा में किसी भी विपक्षी पार्टी के पास कुल लोकसभा सदस्यों की 10 प्रतिशत या अधिक सदस्य संख्या नहीं हैं, जो किसी पार्टी के नेता को ‘विपक्ष का नेता’ का दर्जा दिलाने की पूर्व शर्त होती है।
  • अतः बिना ‘विपक्ष के नेता’ के सरकार लोकपाल का चुनाव कैसे कर सकती है। यही कारण है कि सरकार ने अधिनियम में ‘विपक्ष के नेता’ की परिभाषा में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया जो अभी संसद में पारित नहीं हो पाया है, जिसके अनुसार विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के नेता को ‘विपक्ष के नेता’ माना जाएगा।

स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस, लाइव मिंट


विविध

भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय

चर्चा में क्यों?


भारतीय सिनेमा के एक सदी से अधिक पुराने इतिहास की जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुंबई में भारतीय सिनेमा के राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum of Indian Cinema-NMIC) का निर्माण किया गया है।

प्रमुख बिंदु

NMIC

  • इस संग्रहालय का निर्माण 140.61 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है।
  • यह संग्रहालय श्याम बेनेगल की अध्यक्षता में संग्रहालय सलाहकार समिति (Museum Advisory Committee) के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है तथा प्रसून जोशी की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस संग्रहालय को उन्नत बनाने में सहयोग किया है।
  • यह संग्रहालय दो इमारतों- ‘नवीन संग्रहालय भवन’ (New Museum Building) और 19वीं शताब्दी के ऐतिहासिक महल ‘गुलशन महल’ (Gulshan Mahal) में स्थित है। ये दोनों इमारतें मुंबई में फिल्म प्रभाग (Films Division) परिसर में हैं।

नवीन संग्रहालय भवन में चार प्रदर्शनी हॉल मौजूद हैं-

  1. गांधी और सिनेमा (Gandhi & Cinema) :  यहाँ महात्मा गांधी के जीवन पर बनी फिल्में मौजूद हैं। इसके साथ सिनेमा पर उनके जीवन के गहरे प्रभाव को भी दिखाया गया है।
  2. बाल फिल्म स्टूडियो (Children’s Film Studio):  यहाँ आगुंतकों, विशेष रूप से बच्चों को फिल्म निर्माण के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कला को जानने का मौका मिलेगा।
  3. प्रौद्योगिकी, रचनात्मकता और भारतीय सिनेमा (Technology, creativity & Indian cinema): यहाँ भारतीय फिल्मकारों द्वारा प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की जानकारी मिलेगी। रजत पटल पर फिल्मकारों के सिनेमाई प्रभाव को भी पेश किया गया है।
  4. भारतीय सिनेमा (Cinema across India) :  यहाँ देशभर की सिनेमा संस्कृति को दर्शाया गया है।

गुलशन महल (Gulshan Mahal)

Gulshan Mahal

  • गुलशन महल को मूल रूप से गुलशन आबाद (समृद्धि का बगीचा) के रूप में जाना जाता है। इसका निर्माण 1800 शताब्दी के मध्य में किया गया था। इस पर ‘खोजा मुस्लिम समुदाय’ (Khoja Muslim community) के एक गुजराती व्यापारी’ ‘पीरभॉय खलकदिना’ (Peerbhoy Khalakdina) का स्वामित्त्व था।
  • गुलशन महल ASI ग्रेड – II धरोहर संरचना (ASI Grade-II Heritage Structure) है। NMIC परियोजना के हिस्से के रूप में इसकी मरम्मत की गई है।
  • यहाँ पर भारतीय सिनेमा के 100 वर्ष से अधिक समय की यात्रा दर्शाई गई है।
  • इसे 9 वर्गों में विभाजित किया गया है, जिनमें शामिल हैं-
  1. सिनेमा की उत्पत्ति (The Origin of Cinema)
  2. भारत में सिनेमा का आगमन (Cinema comes to India)
  3. भारतीय मूक फिल्म (Indian Silent Film)
  4. ध्वनि की शुरूआत (Advent of Sound)
  5. स्टूडियो युग (Studio Era)
  6. द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव (The impact of World War II)
  7. रचनात्मक जीवंतता (Creative Resonance)
  8. नई विचारधारा और उससे आगे/न्यू वेव एंड बियॉन्ड (New Wave and Beyond)
  9. क्षेत्रीय सिनेमा (Regional Cinema)

स्रोत : पी.आई.बी एवं द हिंदू


भारतीय अर्थव्यवस्था

स्‍टार्टअप्‍स को ‘एंजेल टैक्स’ पर राहत

चर्चा में क्यों ?


हाल ही में केंद्र सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयीय निकाय से प्रमाणन की आवश्यकता को समाप्त करके ‘एंजेल टैक्स’ (Angel Tax) नोटिस से छूट पाने के लिये स्टार्टअप्स की प्रक्रिया को सरल बनाया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • यह कदम नए शेयरों की बिक्री के माध्यम से पूंजी जुटाने के समय प्राप्त शेयर प्रीमियम पर स्टार्टअप की चिंताओं को कम करने का प्रयास करता है।
  • आने वाले समय में औद्योगिक नीति और संवर्द्धन विभाग (DIPP) के माध्यम से छूट के लिये ऐसे आवेदन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा 45 दिनों के भीतर संसाधित (Processed) किये जाएंगे।
  • मूल्यांकन के लिये किसी समिति या प्रमाणपत्र की ज़रुरत नही होगी, इसमें अतीत और भविष्य के सभी निवेश शामिल है। अप्रैल 2016 से पहले शामिल स्टार्टअप भी इसके तहत कवर किये गए हैं।
  • स्टार्टअप्स के लिये यह समस्या 2012 में आयकर अधिनियम में पेश किये गए एक विरोधी दुरुपयोग प्रावधान के बाद आई इस प्रावधान में नेताओं द्वारा स्थापित गैर-सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा शेयर प्रीमियम की आड़ में रिश्वत लेने जैसे कृत्यों पर रोक लगाने की कोशिश की गई।
  • आयकर अधिनियम की धारा 56 (2) के उपभाग (viib) के तहत शेयर, प्रीमियम के कराधान के लिये प्रदान किया जाता है जो शेयरों के उचित मूल्यांकन के ऊपर ‘अन्य आय’ के रूप में होता है, चूँकि स्टार्टअप नए विचारों,तकनीकी के भिन्न-भिन्न प्रयोगों की व्यावसायिक क्षमता के आधार पर मूल्यवान होते हैं (जो समय के साथ बदल सकते हैं)। ऐसे में उन्हें प्राप्त शेयर प्रीमियम को सही ठहराना एक कठिन कार्य है।
  • हालाँकि, स्टार्टअप से जुड़े लोगों के अनुसार सरकार द्वारा किया गया समाधान अव्यावहारिक है। क्योंकि स्टार्टअप्स को एक बड़े समाधान की ज़रूरत थी जिसमें (DIPP) से मान्यताप्राप्त स्टार्टअप्स को और ज़्यादा से ज़्यादा छूट प्राप्त होने चाहिये थे।

क्या है ‘एंजेल टैक्स’?

  • स्टार्टअप से जुड़े लोगों को सामान्यतः अपने कारोबार के विस्तार के लिये पैसे की आवश्यकता होती है जिसके लिये वे पैसे देने वाली कंपनी या संस्था को शेयर जारी करते हैं। अक्सर ये शेयर उचित कीमत से कही ज्यादा कीमत पर जारी किये जाते हैं। शेयर की अतिरिक्त कीमत को उनकी आय (Income) माना जाता है तथा इस आय पर टैक्स लगाया जाता है, जिसे ‘एंजेल टैक्स’ (Angel Tax) कहा जाता है।
  • स्टार्टअप को इस तरह मिले पैसे को ‘एंजेल फंड’ (Angel Fund) कहते हैं।
  • एंजेल टैक्स की वसूली आयकर विभाग करता है।
  • एंजल टैक्स की शुरुआत 2012 में हुई थी। तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बजट में इसका एलान किया था, इसका उद्देश्य मनी लाउड्रिंग पर रोक लगाना था।

औद्योगिक नीति और संवर्द्धन विभाग (DIPP) Department of Industrial Policy & Promotion

  • औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग की स्थापना 1995 में हुई थी तथा औद्योगिक विकास विभाग के विलय के साथ वर्ष 2000 में इसका पुनर्गठन किया गया था।
  • इससे पहले अक्तूबर 1999 में लघु उद्योग तथा कृषि एवं ग्रामीण उद्योग (Small Scale Industries & Agro and Rural Industries -SSI&A&RI) और भारी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यम (Heavy Industries and Public Enterprises- HI&PE) के लिये अलग-अलग मंत्रालयों की स्थापना की गई थी।

स्रोत – लाइव मिंट


सुरक्षा

अब अंतरिक्ष से होगी देश की सीमाओं की निगरानी

संदर्भ

  • सीमा प्रबंधन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पर कार्यबल की रिपोर्ट गृह मंत्रालय ने मंजूर की।
  • गृह मंत्रालय ने सीमा प्रबंधन के सुधार में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के लिये क्षेत्रों की निशानदेही करने के लिये एक कार्यबल गठित किया था।
  • कार्यबल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (सीमा प्रबंधन) ने किया और इसके सदस्यों में सीमा प्रहरी बलों, अंतरिक्ष विभाग तथा सीमा प्रबंधन प्रभाग के प्रतिनिधि शामिल थे।
  • गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बलों, इसरो, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और रक्षा मंत्रालय सहित सभी हितधारकों से परामर्श करने के बाद रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया।

कहाँ इस्तेमाल होगी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी?


अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के लिये निम्नलिखित क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है:

  • द्वीप विकास
  • सीमा सुरक्षा
  • संचार और नौवहन
  • GIS और संचालन आयोजना प्रणाली
  • सीमा संरचना विकास
  • सैटेलाइट से होगा बॉर्डर मैनेजमेंट

बॉर्डर मैनेजमेंट में सैटेलाइट अहम भूमिका निभा सकते हैं और एशिया में भारत के पास कुछ सर्वोत्तम सैटेलाइट्स हैं। रक्षा सेनाएँ काफी समय से अंतरिक्ष तकनीक इस्तेमाल करती रही हैं, लेकिन सीमा सूरक्षा बलों को IB, RAW और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन जैसी केंद्रीय एजेंसियों से मिलने वाली गुप्त सूचनाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। लद्दाख, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर घाटी जैसे इलाकों में कमज़ोर संचार प्रणाली की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। ऐसे में रियल टाइम इनफॉर्मेशन वाली सैटलाइट तकनीक से ऐसी समस्याओं से आसानी से निपटा जा सकता है।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ

  • सीमा प्रहरी बलों की क्षमता बढ़ाने के लिये रिपोर्ट में कई सुझाव दिये गए हैं।
  • परियोजना को समय पर पूरा करने के लिये लघु, मध्यम और दीर्घकालीन योजना का प्रस्ताव किया गया है।
  • इसे पाँच वर्षों में पूरा करने के लिये इसरो और रक्षा मंत्रालय की मदद ली जाएगी।
  • लघुकालीन आवश्यकताओं के तहत सीमा प्रहरी बलों के लिये हाई रिजॉल्यूशन इमेजरी और संचार के लिये बैंडविड्थ की व्यवस्था की जाएगी।
  • मध्यम अवधि की आवश्यकता के मद्देनज़र इसरो एक उपग्रह लॉन्च कर रहा है, जिसका इस्तेमाल केवल गृह मंत्रालय करेगा।
  • दीर्घकालीन अवधि के तहत गृह मंत्रालय नेटवर्क अवसंरचना विकसित करेगा ताकि अन्य एजेंसियाँ उपग्रह संसाधनों को साझा कर सकें।
  • दूरदराज़ के इलाकों में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को उपग्रह संचार की सुविधा दी जाएगी।

सैटेलाइट से मिलेगी हर पल की जानकारी 


सैटेलाइट यानी अंतरिक्ष से निगरानी का उद्देश्य सीमा की पहरेदारी करने वाले सैन्य बलों को पाकिस्तानी और चीनी सैनिकों की पल-पल की गतिविधियों के बारे जानकारी देना है। इससे पूरे इलाके को समझने और दूर-दराज़ के इलाकों में प्रभावी संचार स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। अलग सैटेलाइट बैंडविड्थ से संकट के समय पड़ोसी देशों की ओर से सीमा पर तैनात किये जाने वाले सैनिकों एवं युद्ध सामग्री से जुड़ी क्षमताओं का आकलन भी किया जा सकेगा।

चीन द्वारा समय-समय पर किया जाने वाला सीमा अतिक्रमण और पाकिस्तान की सेना द्वारा युद्धविराम का लगातार किया जाने वाला उल्लंघन और सीमापार से होने आतंकी घुसपैठ के मद्देनज़र गृह मंत्रालय का यह कदम निश्चित ही देश की सीमाओं को और सुरक्षित बनाने में मदद करेगा। सीमा सुरक्षा बल, इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस और सशस्त्र सीमा बल जैसे सीमा पर तैनात सैन्य बलों की निगरानी क्षमता में वृद्धि होने के साथ उनकी मारक क्षमता में भी बढोतरी होगी। निगरानी व्यवस्था के इस विकल्प से सीमा पर अग्रिम मोर्चे पर तैनात सुरक्षा बलों की संचार, निगरानी, खुफिया और जासूसी क्षमताओं को अभेद्य बनाने में भी मदद मिलेगी।


स्रोत: PIB


विविध

Rapid Fire करेंट अफेयर्स (18 जनवरी)

  • सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के लिये केंद्र सरकार ने नियम तय कर दिये हैं। वार्षिक आय सीमा 8 लाख रुपए ही रहेगी, लेकिन राज्य अपनी सुविधानुसार इसमें बदलाव कर सकते हैं। केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में यह सीमा 8 लाख रुपए ही रहेगी। यह आरक्षण निजी क्षेत्र के वित्तीय मदद लेने वाले और न लेने वाले शैक्षणिक संस्थानों में भी लागू होगा।
  • देश के पहले लोकपाल की नियक्ति के लिये सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल संस्था और इसके सदस्यों की नियुक्ति के लिये सर्च कमेटी को फरवरी के अंत तक नामों का पैनल तैयार करने का निर्देश दिया। लोकपाल के चयन के लिये 8 सदस्यों वाली सर्च कमेटी का गठन पिछले वर्ष सितंबर में हुआ था। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसी इसकी अध्यक्ष हैं। सर्च कमेटी नामों को शॉर्टलिस्ट कर लोकपाल चयन समिति को सौंपेगी। चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभाध्यक्ष, नेता विपक्ष और प्रख्यात कानूनविद शामिल होते हैं।
  • देश में इस वर्ष होने वाली आर्थिक गणना का काम कॉमन सर्विस सेंटर के ग्रामीण उद्यमी करेंगे। सरकार ने करीब 15 लाख ग्रामीण उद्यमियों के ज़रिये इस गणना की अवसंरचना तैयार करने के लिये इन उद्यमियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि इसी वर्ष देशभर के 20 करोड़ परिवारों से आर्थिक आँकड़े जुटाने के लिये सातवीं आर्थिक गणना का काम पूरा किया जाना है। आर्थिक गणना का देश की तरक्की में अहम योगदान होता है, क्योंकि इससे ही लोगों की आर्थिक गतिविधियों का पता लगता है और आर्थिक गणना के आधार पर ही केंद्र व राज्य सरकारें विकास योजनाएँ तैयार करती हैं।
  • केंद्र सरकार ने देश में काम कर रहे हज़ारों गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को विदेशी चंदे के लिये अनिवार्य पंजीकरण की शर्त में ढील देने का फैसला किया है। अब इन्हें विदेशों से चंदा लेने से पहले दर्पण पोर्टल पर यूनीक ID जेनरेट नहीं करनी पड़ेगी। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अक्तूबर 2017 में कामकाज में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और जवाबदेहिता तय करने हेतु सभी NGOs के लिये ‘दर्पण’ पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य कर दिया था।
  • वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, विकास के मामले में भारत के शहर दुनिया में सबसे आगे रहेंगे। वर्ष 2019 से 2035 के बीच अनुमानित GDP के आधार पर दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ते शहरों में शीर्ष 10 भारत से होंगे। इनमें सूरत, अगर, बंगलूरू, हैदराबाद, नागपुर, तिरुपुर, राजकोट, तिरुचिरापल्ली, चेन्नई और विजयवाड़ा शामिल हैं। ‘ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स’ ने इस रिपोर्ट के लिये विश्व के 780 शहरों की अर्थव्यवस्थाओं का सर्वे किया था।
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने जनपद चंदौली के तहत आने वाली मुगलसराय तहसील का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय तहसील करने के फैसले को मंज़ूरी दी। सवर्णों के लिये 10 फीसदी आरक्षण को 14 जनवरी से उत्तर प्रदेश में लागू किये जाने को भी मंज़ूरी मिली।
  • पश्चिम बंगाल के सत्यरूप सिद्धांत सात उच्च पर्वत शिखरों और सात ज्वालामुखी पर्वतों को फतेह करने वाले सबसे कम उम्र (35 साल 9 महीने) के पर्वतारोही बन गए हैं। सत्यरूप अब तक जिन पर्वत शिखरों को फतेह कर चुके हैं, उनमें अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो, रूस में यूरोप की सबसे ऊँची चोटी माउंट एल्बरस, अर्जेंटीना में स्थित दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी अकाकागुआ, नेपाल में एशिया और विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट, ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट कोजिअस्को और अंटाकर्टिका की सबसे ऊँची चोटी माउंट विन्सन मैसिफ शामिल हैं। उनसे पहले सातों महाद्वीपों की सात चोटियों और सात ज्वालामुखी पर्वतों को सबसे कम उम्र (36 साल 157 दिन) में फतेह करने का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के पर्वतारोही डेनियल बुल के नाम था।
  • पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान सरकार को पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों को और अधिकार देने के लिये 15 दिन में नया कानून बनाने का निर्देश दिया। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यों वाली संवैधानिक पीठ ने स्पष्ट किया कि गिलगित-बाल्टिस्तान का इलाका उसके अधिकार क्षेत्र में आता है।
  • हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री 71 वर्षीया ग्लेन क्लोज़ को ‘ऑस्कर वाइल्ड अवार्ड’ से सम्मानित किया जाएगा। अभिनेत्री मेलीसा मैक्कार्थी 14वें वार्षिक ऑस्कर वाइल्ड अवार्ड समारोह में ग्लेन क्लोज़ को सम्मानित करेंगी। मेलीसा को 2012 में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यूएस-आयरलैंड एलायंस ने यह घोषणा की। गौरतलब है कि ग्लेन क्लोज़ को हाल ही में आई फिल्म ‘द वाइफ’ में उनके बेहतरीन अभिनय के लिये मोशन पिक्चर-ड्रामा श्रेणी में ‘गोल्डन ग्लोब’ की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • भारत ने ऑस्ट्रेलिया में खेली गई द्विपक्षीय एकदिवसीय मैचों की सीरीज़ पहली बार 2-1 से जीती। मेलबर्न में खेले गए तीसरे और अंतिम मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को सात विकेट से पराजित कर दिया। ऑस्ट्रेलियाई टीम 48.4 ओवर में 230 रन पर ऑलआउट हो गई, जिसके जवाब में भारत ने 49.1 ओवर 3 विकेट पर 234 रन बनाकर मैच जीत लिया। भारत के विकेट कीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी ने तीनों ही मैचों में हाफ सेंचुरी लगाई।
  • भारत की महिला पहलवान विनेश फोगाट को 2018 के लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स के लिये नामांकित किया गया है। वे इस अवॉर्ड्स के लिये नामांकित होने वाली पहली भारतीय हैं। उनको गोल्फर टाइगर वुड्स के साथ World Comeback of the Year कैटेगरी में नामांकित किया गया है। विजेताओं के नाम का एलान 18 फरवरी को मोनाको में होने वाले लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स समारोह में किया जाएगा। यह पुरस्कार 2000 में शुरू किया गया था और इसमें विजेताओं का चयन लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अकादमी के 66 सदस्य करते हैं। यह अवॉर्ड खेलों में पिछले कैलेंडर ईयर में प्रदर्शन के आधार पर पुरुष और महिला एथलीट को दिया जाता है।

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