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डेली न्यूज़

  • 08 Jan, 2019
  • 30 min read
भारतीय अर्थव्यवस्था

14 तेल, गैस ब्लॉक की नीलामी

चर्चा में क्यों?


हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा तेल एवं गैस आयात में कटौती करने तथा इसके घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिये 14 ब्लॉकों की दूसरी नीलामी प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • नई नीति ने सरकार की पुरानी व्यवस्था के स्थान पर नीलामी को हटाकर क्षेत्रों को बदलने और उनकी बोली लगाने की जगह ले ली।
  • यह नीति विपणन और मूल्य निर्धारण की स्वतंत्रता की गारंटी देती है और पिछले दौर के उत्पादन साझाकरण मॉडल के स्थान पर राजस्व-साझेदारी मॉडल को अपनाती है, जहाँ सरकार द्वारा तेल और गैस का अधिकतम हिस्सा देने वाली कंपनियों को ब्लॉक प्रदान किया जाता है।
  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री द्वारा 14 ब्लॉकों के साथ 29,333 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की Open Acreage Licensing Policy (OALP) बोली राउंड- II में अतिशीघ्र ही शुरू की जाएगी।
  • पहला OALP राउंड 2017 में शुरू किया गया था और मई 2018 तक बोलियाँ लगाई गई थीं। 15 मई, 2018 को दूसरे राउंड की बोली के लिये लोगों ने इच्छा ज़ाहिर करना बंद कर दिया। जून तक ब्लॉक पुनः नीलामी के लिये रखे जाने थे, लेकिन यह राउंड अज्ञात कारणों के चलते देरी से शुरू हुआ।
  • OALP-II में दिये गए ब्लॉकों में एक कृष्णा गोदावरी बेसिन के गहरे पानी में और पाँच उथले पानी में हैं, अंडमान और कच्छ बेसिन दोनों में दो-दो और महानदी बेसिन में एक ब्लाक है। स्थल क्षेत्र में आठ ब्लॉक ऑफर किये गए हैं, जिनमें - महानदी बेसिन में चार, कैम्बे में दो और राजस्थान तथा कावेरी दोनों में एक-एक हैं।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेल आयात को 2022 तक 10% से 67% तक कम करने और 2030 तक आधा करने का लक्ष्य रखा है।
  • भारत की 2015 से आयात पर निर्भरता बढ़ी है वर्तमान में भारत अपनी कुल तेल ज़रूरतों के 81% का आयात करता है।

अन्य महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • ब्लॉक ऐसी कंपनी को दिया जाता है जो सरकार को तेल और गैस का उच्चतम हिस्सा प्रदान करती हो और साथ ही 2 डी तथा 3 डी भूकंपीय सर्वेक्षण व ड्रिलिंग अन्वेषण कुओं के माध्यम से अधिकतम अन्वेषण कार्य करने के लिये प्रतिबद्ध हो।
  • अनुसंधान के चलते अधिक तेल और गैस का उत्पादन होगा, जिससे दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक को अपनी आयात निर्भरता में कटौती करने में मदद मिलेगी।
  • इस नीति के तहत कंपनियों को उन क्षेत्रों में भी तेल और गैस की तलाशी की अनुमति दी जाएगी जिनके पास वर्तमान में उत्पादन या अन्वेषण हेतु लाइसेंस नहीं है।
  • भारत ने जुलाई 2017 में देश के लगभग 2.8 मिलियन वर्ग किमी. के गैर-पंजीकृत क्षेत्र में कंपनियों को अपनी पसंद के ब्लॉक चुनने की अनुमति दी थी।
  • इस बीच, तीसरे विंडो में EOI (Expression of Intrest) के लिये अनुमति 15 नवंबर, 2018 को बंद हो गई, जिसमें 11 ब्लॉक, 21,507 वर्ग किमी क्षेत्र और पाँच कोल-बेड मीथेन थे।
  • अधिकारियों के अनुसार, इन 14 ब्लॉकों में 12,609 मिलियन टन तेल और तेल के बराबर गैस होने का अनुमान है।

स्रोत – द हिंदू


शासन व्यवस्था

आर्थिक रूप से पिछड़ों को मिलेगा आरक्षण

चर्चा में क्यों?


केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10% आरक्षण प्रदान करने वाले संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill) को मंज़ूरी दे दी है।

प्रमुख बिंदु

  • इस मंज़ूरी के बाद आर्थिक रूप से कमज़ोर सवर्णों के लिये सरकारी नौकरियों में अलग से 10 फ़ीसदी कोटा होगा। हालाँकि इसके लिये संविधान में संशोधन करना होगा।
  • ऐसा माना जा रहा है कि ग़रीब सवर्णों के लिये यह आरक्षण, अनुसूचित जातियों (Scheduled Castes), अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) और अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Classes-OBC) के लिए आरक्षण की मौजूदा तय सीमा जो कि 50 प्रतिशत है, से अलग होगी।
  • इसके लिये संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 को संशोधित करना होगा। यानी संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों की मंज़ूरी आवश्यक होगी।
  • कुछ निर्धारित मानदंडों के साथ 8 लाख से कम सालाना आय वाले परिवारों को इसके दायरे में रखने का निर्णय लिया गया है।
  • इस फैसले से लाभान्वित होने वालों में मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लोग भी शामिल होंगे।

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पहले भी हुई कोशिश

  • पहले भी कई बार आरक्षण की मौजूदा सीमा से अधिक आरक्षण देने की कोशिश की की गई है लेकिन हर बार सर्वोच्च न्यायालय ने उसे ख़ारिज किया है।
  • पिछली बार 2014 में भी चुनावों से ठीक पहले जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल कर आरक्षण का लाभ देने की घोषणा की गई थी लेकिन 2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया था।
  • सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, "पिछड़ेपन के लिये सिर्फ़ जाति को आधार नहीं बनाया जा सकता। पिछड़ेपन का आधार सिर्फ़ सामाजिक होना चाहिये न कि शैक्षणिक या आर्थिक रूप से कमज़ोरी।"

विस्तृत जानकारी के लिये 08.01.2019 का एडिटोरियल एनालिसिस पढ़ें।


भारतीय राजनीति

EVM-VVPAT मतदान की बराबरी हेतु याचिका

चर्चा में क्यों?


हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया है जिसमें कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (Electronic Voting Machines-EVM) और वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) इकाइयों से गिने गए वोट, प्रत्येक विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कम-से-कम 30% मतदान केंद्रों पर सत्यापित किये जाएँ।

प्रमुख बिंदु

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली एक पीठ ने आयोग को यह आदेश दिया है।
  • यह याचिका पूर्व आईएएस अधिकारी एम.जी. देवसहायम, पूर्व राजनयिक के.पी. फेबियन और सेवानिवृत्त बैंकर थॉमस फ्रेंको राजेंद्र देव द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई थी।

क्या कहती है याचिका?

  • याचिका में कहा गया है कि आयोग ने हाल के विधानसभा चुनावों में क्रॉस-वेरिफिकेशन अर्थात् वोटिंग मशीनों और वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) इकाइयों के माध्यम से मतदान का सत्यापन बहुत ही मामूली तरीके से किया था।
  • क्रॉस-वेरिफिकेशन के लिये चुने गए मतदान केंद्रों की संख्या बहुत ही कम (प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में 1% से कम मतदान केंद्र) है।
  • याचिका में कहा गया है कि यह कृत्य स्पष्ट रूप से मनमाना, तर्कहीन, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

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  • चुनाव के मूल सिद्धांतों के व्यावहारिक रूप से भी स्वतंत्र और निष्पक्ष होने की ज़रूरत है।
  • याचिका में कहा गया है कि ईवीएम की प्रक्रिया में किसी भी तरह की खराबी या पक्षपात का पता लगाने और उससे निपटने के लिये प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के कम-से-कम 30% मतदान केंद्रों को क्रॉस-वेरिफिकेशन के लिये चुना जाना चाहिये।

2013 का आदेश

  • याचिकाकर्त्ताओं के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में सुब्रमण्यम स्वामी बनाम चुनाव आयोग मामले में अपने फैसले में कहा था कि यह ज़रूरी है कि ईवीएम के माध्यम से होने वाले चुनावों में वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल प्रणाली को लागू करना चाहिये ताकि मतदाता को संतुष्टि मिल सके।
  • अदालत के फैसले और चुनाव प्रक्रिया में मतदाता का विश्वास बनाए रखने तथा चुनाव में पारदर्शिता के लिये ईवीएम व वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) की क्रॉस-वेरिफिकेशन प्रणाली की शुरुआत की गई थी।

स्रोत-द हिंदू


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

IIT मद्रास द्वारा CO2 और CH4 के हाइड्रेट्स की खोज

चर्चा में क्यों?


हाल ही में IIT (Indian Institute of Technology) मद्रास के शोधकर्त्ताओं द्वारा प्रयोगशाला में एक निश्चित तापमान और दाब पर मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड के हाइड्रेट बनाए गए।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • IIT मद्रास के शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में अंतर-तारकीय वातावरण (Interstellar Atmosphere) तैयार कर मीथेन (CH4) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस के हाइड्रेट्स प्राप्त किये।
  • जल और मीथेन को मूल रूप से -263 डिग्री सेल्सियस (10k) से -243 डिग्री सेल्सियस (30K) तक लाया गया। मौजूद मीथेन का लगभग 10% 25 घंटों के बाद हाइड्रेट रूप में पाया गया और 75 घंटों में अधिकांश मीथेन हाइड्रेट में परिवर्तित हो गया।
  • गैस, गैस हाइड्रेट में तब परिवर्तित होती है जब मीथेन जैसी गैस जल के क्रिस्टलीय अणुओं के बीच आ जाती है। स्थल पर गैस हाइड्रेट प्राकृतिक रूप से समुद्र के अंदर और ग्लेशियरों में उच्च दबाव एवं कम तापमान की स्थिति में बनते हैं।
  • मीथेन हाइड्रेट प्राकृतिक गैस का एक संभावित स्रोत है।
  • IIT के एक प्रोफेसर ने बताया कि CO2 हाइड्रेट CH4 हाइड्रेट की तुलना में थर्मोडायनामिक रूप से अधिक स्थिर है। क्योंकि समुद्र में CO2 की मात्रा बढ़ रही है। अगर समुद्र तल के नीचे मीथेन हाइड्रेट लाखों वर्षों तक स्थिर रहता है तो समुद्र तल के नीचे ठोस हाइड्रेट के रूप में गैसीय CO2 को परिवर्तित करना संभव होगा।

(Interstellar Atmosphere) - पृथ्वी का ऊपरी वायुमंडलीय भाग जो पृथ्वी और तारों के बनने की प्रक्रिया के शोध के अनुकूल है।

COहाइड्रेट – एक बर्फ जैसा क्रिस्टलीय पदार्थ है जो ठोस जल (H2O) और CO2 से बनता है।

CH4 हाइड्रेट – बर्फ के अंदर पाया जाने वाली मिथेन गैस होती है।


स्रोत – द हिंदू


शासन व्यवस्था

आधार और अन्‍य विधियाँ संशोधन विधेयक, 2018

चर्चा में क्यों?


हाल ही में लोकसभा ने आधार और अन्‍य विधियाँ संशोधन विधेयक, 2018 को मंज़ूरी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य तीन मौजूदा कानूनों, आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं के लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016, भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 और धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 में संशोधन करना है।

प्रमुख बिंदु

  • यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय के फैसले (सितंबर 2018) को लागू करने हेतु मौज़ूदा कानूनों को संशोधित करने के लिये लाया गया है।
  • यह विधेयक आधार को बरकरार तो रखता है लेकिन भारत के समेकित कोष द्वारा वित्त पोषित कुछ सब्सिडी योजनाओं के लिये इसके उपयोग को सीमित करता है।
  • यह विधेयक निजी कंपनियों के लिये प्रमाणीकरण हेतु आधार की अनिवार्यता को भी खत्म करता है।

विधेयक के प्रावधान

  • बच्चों का नामांकन: यह विधेयक माता-पिता या अभिभावक की सहमति से आधार योजना में बच्चों के नामांकन की अनुमति देता है।
  • वयस्क होने पर बच्चे आधार को नकार सकते हैं।
  • ऑफलाइन सत्यापन: यह विधेयक ऑफलाइन सत्यापन की अनुमति देता है, यानी बायोमेट्रिक डेटा या अन्य किसी इलेक्ट्रॉनिक साधनों का उपयोग किये बिना पहचान सत्यापित करने हेतु आधार संख्या का उपयोग।
  • प्रमाणीकरण विफलता के कारण सेवाओं से इनकार नहीं: यह विधेयक स्पष्ट करता है कि वृद्धावस्था, बीमारी या तकनीकी कारणों से आधार संख्या के प्रमाणीकरण में विफलता की परिस्थिति में किसी भी सेवा, लाभ या सब्सिडी से इनकार नहीं किया जाना चाहिये। यह बताता है कि ऐसे मामलों में पहचान को सत्यापित करने हेतु वैकल्पिक साधनों का उपयोग किया जाना चाहिये।
  • धारा 57 का खात्मा: विधेयक में आधार अधिनियम की धारा 57 को छोड़ देने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसने निजी संस्थाओं को सेवाएँ प्रदान करने से पहले पहचान प्रमाणित करने हेतु आधार संख्या का उपयोग करने की अनुमति दी थी।
  • टेलीग्राफ कानून में संशोधन: विधेयक में दूरसंचार कंपनियों द्वारा पहचान सत्यापन के लिये आधार संख्या का स्वैच्छिक उपयोग करने हेतु भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1855 में संशोधन करने का प्रस्ताव है। हालाँकि, विधेयक यह नहीं कहता है कि सत्यापन हेतु आधार का उपयोग अनिवार्य है।
  • बैंक खाते और आधार: बैंक खाता खोलने से पहले बैंकों द्वारा पहचान सत्यापन के लिये आधार के स्वैच्छिक उपयोग की अनुमति देने हेतु धन शोधन निवारण अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। आधार को पहचान सत्यापित करने हेतु एक साधन के रूप में निर्दिष्ट किया गया है और इसके उपयोग की कोई बाध्यता नहीं है।

स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस


विविध

डेटा पॉइंट: स्कूली बच्चों की ड्रॉपआउट दर

क्या हैं हालात?


हाल ही में ‘शिक्षा हेतु एकीकृत ज़िला सूचना प्रणाली, U-DISE (Unified District Information System for Education)’ ने भारत में स्कूली बच्चों की ड्रॉपआउट यानी समय से पहले स्कूल छोड़ने की दर जारी की है। U-DISE द्वारा जारी किये गए आँकड़े भारतीय शिक्षा प्रणाली पर कुछ सवाल खड़े करते हुए प्रतीत होते हैं।

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क्या कहते हैं आँकड़े?

  • भारत में स्कूल ड्रॉपआउट की औसत दर

♦ 100 छात्रों के प्रारंभिक नामांकन में से भारत में औसतन केवल 70 छात्र सीनियर सेकेंडरी अर्थात 12वीं की शिक्षा प्राप्त कर पाते हैं।
♦ प्राथमिक शिक्षा स्तर पर छात्रों की संख्या औसतन 94 है, जबकि सेकेंडरी अर्थात् 10वीं तक आते-आते छात्रों की यह संख्या 75 रह जाती है।

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  • SC/ST छात्रों के बीच ड्रॉपआउट दर

♦ 100 ST छात्रों में से केवल 61 छात्र सीनियर सेकेंडरी स्कूल (12वीं) तक पहुँच पाते हैं जो SC/ST/ OBC/GEN समुदायों में सबसे कम हैं।
♦ वहीं 100 SC छात्रों में से केवल 65 छात्र सीनियर सेकेंडरी स्कूल (12वीं) तक पहुँच पाते हैं। विस्तृत अवलोकन हेतु नीचे दिया गया टेबल देखें...

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  • ड्रॉपआउट में लैंगिक समानता

♦ ड्रॉपआउट में कोई लैंगिक असमानता नहीं है। पढ़ाई पूरी किये बिना स्कूल छोड़ने वाले लड़कों और लड़कियों की संख्या समान है। विस्तृत अवलोकन हेतु नीचे दिया गया टेबल देखें...

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राज्य-वार आँकड़ा

  • सबसे अधिक आदिवासी आबादी वाले झारखंड राज्य में स्कूली बच्चों की ड्रॉपआउट दर सबसे उच्चतम  है। जहाँ 100 में से केवल 30 छात्र अपनी पढाई पूरी कर पाते हैं।
  • आदिवासियों में ड्रॉपआउट दर सभी समुदायों में सबसे अधिक है।
  • झारखंड के विपरीत सबसे कम ड्रॉपआउट दर वाले राज्य इस प्रकार हैं-

♦ तमिलनाडु (सबसे कम ड्रॉपआउट दर), केरल, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र।

नोट:

  • आंध्र प्रदेश और कर्नाटक हेतु डेटा उपलब्ध नहीं है।
  • प्राथमिक विद्यालय (Elementary School) ग्रेड 1 से 8 को संदर्भित करता है, सेकेंडरी (Secondary School) ग्रेड 9 और 10 को संदर्भित करता है और सीनियर सेकेंडरी स्कूल (Senior) ग्रेड 11 और 12 को संदर्भित करता है।

स्रोत- द हिंदू


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

IT (Information Technology) एक्ट की धारा 66 A

चर्चा में क्यों?


हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court - SC) ने केंद्र सरकार की एक याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यों पर आरोप लगाया कि (SC द्वारा) 2015 में IT अधिनियम की धारा 66A को समाप्त करने के बावजूद विभिन्न राज्यों में अभी भी सोशल मीडिया पर भाषण देने की स्वंतत्रता के विरुद्ध FIR (First Information Report) दर्ज की जा रही है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • याचिका में कहा गया कि इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (Internet Freedom Foundation) द्वारा प्रदर्शित पेपर के अनुसार धारा 66 A के तहत लंबित मुकदमों को समाप्त नहीं किया गया था और आगे भी 2015 के SC के फैसले के बाद भी पुलिस द्वारा लगतार FIR दर्ज की गई।
  • इसमें यह भी बताया गया कि वास्तविक स्थिति कागज़ी स्थिति से बिलकुल अलग है, संभवतः इसका कारण यह है कि बहुत से अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बारे में पता ही नहीं होगा।
  • ट्रायल कोर्ट और अभियोजक द्वारा सक्रिय रूप से फैसले को लागू नहीं किया गया, जिसके कारण आरोपी व्यक्तियों पर धारा 66 A के आधार पर अदालती कार्यवाई चलती रही।

धारा 66 A की पृष्ठभूमि

  • धारा 66 A सूचना संबंधी अपराधों से संबंधित है जिसमें कंप्यूटर संसाधन या संचार उपकरण के माध्यम से कोई भी अपमानजनक या अवैध एवं खतरनाक सूचना भेजना एक दंडनीय अपराध है।
  • श्रेया सिंघल बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया के निर्णय में जस्टिस रोहिंटन एफ. नरीमन और जे. चेलमेश्वर ने धारा 66 A में एक कमज़ोर तथ्य पाया कि इसे अपरिभाषित कार्यों के आधार पर अपराध बनाया गया था, जैसे कि असुविधा, खतरा, बाधा और अपमान, जो संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत दिये गए अपवादों के बीच नहीं आते हैं, जो भाषण की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
  • अदालत ने यह भी पाया कि चुनौती यह पहचानने की थी कि रेखा कैसे निर्धारित करें। क्योंकि बाधा और अपमान जैसे शब्द व्यक्तिपरक बने हुए हैं।
  • इसके अलावा अदालत ने यह भी उल्लेख किया था कि धारा 66 A में समान उद्देश्य वाले कानून में अन्य वर्गों की तरह प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय नहीं थे, जैसे:

♦ कार्रवाई से पहले केंद्र की सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता है।
♦ स्थानीय अधिकारी राजनीतिक से प्रेरित होकर स्वायत्त रूप से आगे बढ़ सकते हैं।

  • निर्णय में पाया गया कि धारा 66 A संविधान के अनुच्छेद 19 (भाषण की स्वंतत्रता) और 21 (जीवन के अधिकार) दोनों के विपरीत था। इसलिये इस पूरे प्रावधान को अदालत ने समाप्तं कर दिया।
  • उसके बाद सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति (टी. के. विश्वनाथन समिति) की नियुक्ति की, जिसने अभद्र भाषा की चुनौती के लिये एक कानून प्रस्तावित किया।

स्रोत – द हिंदू


विविध

Rapid Fire करेंट अफेयर्स (8 जनवरी)

  • लोकसभा ने पारित किया स्वीय विधि (संशोधन) विधेयक यानी The Personal Laws (Amendment) Bill 2018; उपचार योग्य बीमारी की श्रेणी में आने के कारण कुष्ठ को तलाक का आधार बनाने के प्रावधान को समाप्त करने का है प्रस्ताव; इस मुद्दे पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के संकल्प को किया स्वीकार; राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी की थी यह सिफारिश; सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी थे इसके समर्थन में; इस संशोधन के द्वारा विवाह विच्छेद अधिनियम 1869, मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम 1939, विशेष विवाह अधिनियम 1954 तथा हिन्दू दत्तक और भरण पोषण अधिनियम 1956 में संशोधन होगा
  • सुप्रीम कोर्ट ने CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के केंद्रीय सतर्कता आयोग एवं कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के आदेश को किया निरस्त; दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम की धारा-4(1) के तहत उच्चाधिकार समिति को आलोक वर्मा के मामले में पुनर्विचार करने का दिया आदेश; समिति का फैसला आने तक आलोक वर्मा नहीं ले सकेंगे कोई नीतिगत फैसला; विनीत नारायण मामले का दिया हवाला; दिशा-निर्देश जारी करने का उद्देश्य CBI डायरेक्टर के पद को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखना
  • सरकार ने अगले 4 सालों में 40 उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों के विकास के लिये 10,900 करोड़ रुपए की फंडिंग को दी मंज़ूरी; 30 PSLV और 10 GSLV Mk-3 रॉकेट्स को लॉन्च करने के लिये किया जाएगा इस्तेमाल; तीन महीने के भीतर मिशन चंद्रयान लॉन्च करने की तैयारी कर रहा इसरो; अब तक अछूती रही चंद्रमा की सतह पर उतरेगा चंद्रयान; 2022 तक मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान ‘गगनयान’ की भी चल रही है तैयारियाँ
  • केंद्र सरकार ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय लेते हुए FM चैनलों को आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले समाचारों के प्रसारण को दी मंज़ूरी; FM चैनल केवल उन्हीं खबरों को शेयर करेंगे जो आकाशवाणी यानी All India Radio से प्रसारित होंगी;. किसी और स्रोत की खबरों का प्रसारण नहीं किया जा सकेगा; FM चैनलों को आकाशवाणी की खबरों के लिये नहीं देना होगा कोई शुल्क, लेकिन इसके लिये उन्हें कराना होगा रजिस्ट्रेशन
  • GST परिषद के मंत्री समूह ने केरल को दी एक फीसदी आपदा उपकर (Cess) लगाने की मंज़ूरी; केरल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास के लिये राज्य सरकार GST व्यवस्था के तहत लगाएगी यह सेस; दो साल तक लगा रह सकता है यह सेस; किन वस्तुओं और सेवाओं पर सेस लगेगा, इसका फैसला राज्य सरकार करेगी; GST कानून के तहत किसी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना के समय अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिये कुछ समय के लिये विशेष टैक्स लगाने का है प्रावधान
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airport Authority of India) ने देश के 16 हवाई अड्डों पर सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर लगाई पाबंदी; हवाई यात्रा के दौरान स्ट्रॉ, प्लास्टिक कटलरी और प्लास्टिक प्लेट्स जैसे सामान अब नहीं ले जाए जा सकेंगे; इनमें इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद, भुवनेश्वर, तिरुपति, त्रिची, विजयवाड़ा, देहरादून, चंडीगढ़, वडोदरा, मदुरै, रायपुर, विजाग, पुणे, कोलकाता और वाराणसी हवाई अड्डे शामिल
  • शेख हसीना ने चौथी बार ली बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की शपथ; राष्ट्रपति अब्दुल हमीद ने उन्हें तथा अन्य मंत्रियों को दिलाई शपथ; 1996 में पहली बार बनी थीं प्रधानमंत्री; 2009 से लगातार हैं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री; 300 सदस्यों वाली जातीय संसद में 96 फीसदी सीटों पर विजयी रही उनकी अवामी लीग पार्टी
  • विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष जिम योंग किम ने अपने पद से इस्तीफा देने का किया ऐलान; 2012 से इस पद पर बने हुए हैं किम; 2021 में अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले ही छोड़ देंगे पद; जलवायु परिवर्तन, बीमारियाँ, भुखमरी, शरणार्थी संकट जैसी जटिल समस्याओं के चलते अब और अधिक महत्त्वपूर्ण हो गया है विश्व बैंक समूह का काम
  • अमेरिका में बर्फ से ढके सिएरा नेवादा (Sierra Nevada) के क्षेत्र में विश्व की पहली उड़ने वाली लैब का सफल परीक्षण; बोइंग 747SP जेटलाइनर विमान में लगाया गया आठ फीट व्यास वाला 17 टन वज़नी टेलीस्कोप; 12 घंटे तक हवा में रह सकता है यह टेलीस्कोपिक विमान; नासा और जर्मन एयरोस्पेस की इस लैब को दिया गया है Stratospheric Observatory for Infrared Astronomy नाम; सुपरनोवा और धूमकेतु के रहस्यों को समझने में होगी आसानी
  • अमेरिका में फिल्म और टीवी के क्षेत्र में दिये जाने वाले गोल्डन ग्लोब अवार्ड का 76 वां संस्करण आयोजित; समारोह का संचालन करने वाली सैन्ड्रा ओह हॉलीवुड के किसी भी शो को होस्ट करने वाली पहली एशियाई बनीं; ‘हॉलीवुड फॉरेन प्रेस एसोसिएशन’ मनोरंजन जगत में विशेष उपलब्धियों के लिये देशी-विदेशी कलाकारों, फिल्मों को गोल्डन ग्लोब पुरस्कार से नवाज़ता है; फिल्मों और टीवी के क्षेत्र में अलग-अलग विधाओं में हर वर्ष दिये जाते हैं ये अवार्ड

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