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डेली न्यूज़

  • 05 Feb, 2019
  • 23 min read
शासन व्यवस्था

केरल ने किया दवा कीमत निगरानी इकाई का गठन

चर्चा में क्यों?


हाल ही में केरल राज्य ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (Drugs Price Control Order-DPCO) के तहत आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कीमतों के उल्लंघन की जाँच करने के लिये एक मूल्य निगरानी और अनुसंधान इकाई (Price Monitoring and Research Units) स्थापित करने वाला पहला राज्य बन गया।


महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • केरल सरकार का यह प्रयास नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (National Pharmaceutical Pricing Authority-NPPA) द्वारा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिये इस तरह की व्यवस्था प्रस्तावित करने के लगभग पाँच साल बाद आया है।
  • केरल के स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर (State Drugs Controller) ने बताया कि इस इकाई (Unit) के कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिये केंद्रीय सहायता प्राप्त करने हेतु एक सोसायटी को पंजीकृत किया गया था।
  • इनके अनुसार बुनियादी ढाँचा स्थापित होते ही नया कार्यालय प्रभाव में आ जाएगा।
  • राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कर्मचारियों की भर्ती और बुनियादी ढाँचे के लिये तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। केरल दूसरी श्रेणी में आता है, जिसकी जनसंख्या 3% से कम है, लेकिन देश की कुल जनसंख्या का 1% से अधिक है।
  • राज्य में एक परियोजना समन्वयक, दो फील्ड जाँचकर्ता और दो डेटा एंट्री ऑपरेटर होंगे।
  • इस इकाई द्वारा राज्य ड्रग्स कंट्रोल विंग की मदद किये जाने की उम्मीद जताई गई है, जो कर्मचारियों की भारी कमी के चलते गंभीर रूप से प्रभावित है। इस इकाई के सहयोग से दवा की कीमतों को अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा।
  • सूत्रों के अनुसार, केरल में एक साल में लगभग 10,000 करोड़ रुपए की दवाइयाँ बेची जाती हैं, जबकि सार्वजनिक संस्थानों के दवा खरीद के आधिकारिक आँकड़ों का खुलासा नहीं किया गया है।

वर्तमान स्थिति

  • वर्तमान में कोई मूल्य नियंत्रण समीक्षा तंत्र नहीं है। राज्य का स्वास्थ्य सचिव इस इकाई का अध्यक्ष होगा तथा ड्रग्स नियंत्रक इसका सदस्य सचिव।
  • इसके अन्य सदस्यों में एक राज्य सरकार का प्रतिनिधि, निजी दवा कंपनियों के प्रतिनिधि, और उपभोक्ता अधिकार संरक्षण मंच भी शामिल हैं। ड्रग्स कंट्रोलर की अध्यक्षता में सोसायटी की एक कार्यकारी समिति भी होगी।
  • यह नई इकाई ‘स्टेट ड्रग कंट्रोलर्स’ और NPPA को अनुसूचित के साथ ही गैर-अनुसूचित दवाओं की सुनिश्चित कीमतों की निगरानी करने, DPCO के प्रावधानों के उल्लंघन का पता लगाने, कीमत के अनुपालन पर नज़र रखने, दवाओं के परीक्षण के नमूने एकत्र करने और बाज़ार-आधारित डेटा एकत्र करने में तकनीकी मदद उपलब्ध करेगी।
  • फार्मा कंपनियों पर DPCO द्वारा तय की गई श्रेणी की दवाओं की कीमतों पर ओवरचार्ज करने का आरोप लगाया गया है जबकि यह कार्य इसके दायरे से बाहर हैं।
  • PMRU स्थापित करने का सुझाव NPPA और राज्य ड्रग्स कंट्रोलर और राज्य ड्रग इंस्पेक्टरों के बीच दवा की कीमतों की निगरानी के लिये एक फील्ड-स्तरीय लिंक की कमी की पृष्ठभूमि के खिलाफ किया गया था।

स्रोत – द हिंदू


शासन व्यवस्था

हाथी गलियारों के संरक्षण हेतु समझौता

चर्चा में क्यों?


हाल ही में एशियाई हाथी समझौते के तहत पाँच गैर-सरकारी संगठनों द्वारा एक अम्ब्रेला पहल (Umbrella Initiative) की शुरुआत की गई है जिसमें भारत के 12 राज्यों में हाथियों के लिये मौजूदा 101 गलियारों में से 96 गलियारों को एक साथ सुरक्षित किये जाने का प्रावधान किया गया है। एक सर्वेक्षण के दौरान देश में सात हाथी गलियारों की स्थिति बहुत खराब पाई गई है।


नई पहल

  • संयुक्त उद्यम द्वारा आने वाले दस वर्षों में पुराने और नए 96 हाथी गलियारों के संरक्षण के लिये लगभग 1,187.16 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • इस समझौते के तहत गलियारों के लिये आवश्यक भूमि (Land) प्राप्त करने में आने वाली बाधाओं हेतु धन जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
  • वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) एलीफेंट कॉरिडोर सिक्योरिटी प्रोजेक्ट-साउथ इंडिया (Elephant Corridor Securement Project-South India) के मैनेजर के अनुसार, वर्तमान में तलाई-चमारजनगर हाथी कॉरिडोर (Talamai-Chamarajnagar Elephant Corridor) नाम के तमिलनाडु-कर्नाटक अंतर-राज्यीय गलियारे को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है।
  • 2012-15 के दौरान किये गए अध्ययन में WTI द्वारा निर्धारित 101 हाथी कॉरिडोर में से पाँच को WTI द्वारा संरक्षणकर्त्ता साझेदारों तथा राज्यों की सहायता से पहले ही सुरक्षित कर लिया गया है, शेष 96 हाथी कॉरिडोर को अगले 10 वर्षों में सुरक्षित किया जाना है।

संयुक्त प्रयास के रूप में

  • इस समझौते में WTI के साथ NGO एलीफेंट फैमिली (NGOs Elephant Family), इंटरनेशनल फंड फॉर एनिमल वेलफेयर (International Fund for Animal Welfare), IUCN नीदरलैंड और वर्ल्ड लैंड ट्रस्ट (World Land Trust) शामिल हैं।
  • हाल ही में किये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, झारखंड, यूपी, असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सात हाथी गलियारों की स्थिति भूमि संबंधी समस्याओं के कारण पहले ही ख़राब हो चुकी है।

वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया (WTI)

  • WTI का गठन नवंबर 1998 में भारत में वन्यजीवों की तेज़ी से बिगड़ती स्थिति में सुधार हेतु किया गया था।
  • यह एक भारतीय प्रकृति संरक्षण संगठन है जो वन्यजीवों और उनके निवास स्थान को संरक्षित करता है, साथ ही व्यक्तिगत स्तर पर जंगली जानवरों के कल्याण के लिये काम करता है।
  • इसको गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की आबादी बढ़ाने, प्रजाति का स्थानांतरण, मनुष्य एवं जीवों के बीच टकराव कम करने, हाथियों, बाघों, तेंदुओं, एक सींग वाले गैंडे और भालू सहित अन्य जानवरों के पुनर्वास एवं संरक्षण का श्रेय दिया जाता है।
  • भारत में WTI आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12A के तहत एक पंजीकृत दान-दात्री संस्था है।

स्रोत – द हिंदू


भारतीय अर्थव्यवस्था

किसान योजना की पहली किस्त के लिये आधार अनिवार्य नहीं

चर्चा में क्यों?


लघु एवं सीमांत किसानों के लिये लागू प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान योजना) की 2,000 रुपए की पहली किस्त हासिल करने के लिये आधार अनिवार्य नहीं होगा लेकिन दूसरी और आगे की किस्तें पाने के लिये किसानों को अपनी पहचान सत्यापित करने के लिये आधार नंबर प्रस्तुत करना होगा।


प्रमुख बिंदु

  • उल्लेखनीय है कि कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में दो हेक्टेयर तक की ज़मीन के स्वामी, करीब 12 करोड़ लघु एवं सीमांत किसानों के लिये 6,000 रुपए प्रतिवर्ष की प्रत्यक्ष आय सहायता योजना की घोषणा की है।
  • केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से राज्य सरकारों को भेजे गए पत्र के मुताबिक, दिसंबर 2018 से मार्च 2019 की पहली किस्त के लिये किसान आधार के स्थान पर पहचान के वैकल्पिक दस्तावेज़ प्रस्तुत कर सकते हैं।
    इन वैकल्पिक दस्तावेज़ों में ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान-पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी कोई अन्य पहचान-पत्र शामिल हैं।
  • राज्य सरकारों को लाभार्थी लघु एवं सीमांत किसानों का डेटाबेस बनाने के लिये कहा गया है। इसमें लाभार्थी का नाम, लिंग, उसका वर्ग, आधार संख्या, बैंक खाता संख्या और मोबाइल नंबर को शामिल किया जाएगा। 
    योजना के लिये ऐसे किसान परिवार योग्य माने जाएंगे जिसमें पति-पत्नी के अलावा 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चे हों और उनका कुल भूमि स्वामित्व दो हेक्टेयर से ज़्यादा न हो।
  • भू-स्वामित्व की गणना एक फरवरी 2019 से पहले तक मानी जाएगी। इस तिथि के बाद भू-स्वामित्व रिकॉ‌र्ड्स में हुए बदलाव मान्य नहीं होंगे।

UBI में योजना मददगार होगी 

  • सरकार के मुताबिक, प्रधानमंत्री किसान योजना एक अच्छी योजना है और यह कुछ वर्षों में यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) शुरू करने में मददगार हो सकती है।
  • सामान्य स्थिति में इस योजना को लैंड रिकॉर्ड का बेहतर डेटा रखने वाले राज्यों में लागू करने में भी कम-से-कम छह महीने लग सकते हैं।
  • केंद्र इस योजना पर काफी ज़ोर दे रहा है और इस वज़ह से संभव है कि प्रत्येक राज्य के कुछ ज़िलों में 31 मार्च से पहले किसानों को इसकी पहली किस्त ट्रांसफर कर दी जाए।

86 फीसदी किसानों के पास 2 एकड़ से कम ज़मीन


किसानों के पास उपलब्ध ज़मीन का आँकड़ा 2015-16 के एग्रीकल्चर सेंसस में है। उसके बाद से यह सर्वे नहीं किया गया। इससे पता चलता है कि 86.2 प्रतिशत किसानों के पास 2 एकड़ से कम ज़मीन है। ऐसे किसानों की सबसे अधिक संख्या (2.21 करोड़) उत्तर प्रदेश में है। इसके बाद बिहार का नंबर आता है।


प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना

  • 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में छोटे और सीमांत किसानों को निश्चित आय सहायता उपलब्ध कराने के लिये सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना लॉन्च की है।
  • इस योजना के तहत 2 हेक्टेयर तक भूमि की छोटी जोत वाले किसान परिवारों को 6,000 रुपए प्रतिवर्ष की दर से प्रत्यक्ष आय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
  • यह आय सहायता 2,000 रुपए प्रत्येक की तीन समान किस्तों में लाभान्वित किसानों के बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित कर दी जाएगी।
  • इस कार्यक्रम का वित्तपोषण भारत सरकार द्वारा किया जाएगा। इस कार्यक्रम से लगभग 12 करोड़ छोटे और सीमांत किसान परिवारों के लाभान्वित होने की उम्मीद है।
  • यह कार्यक्रम 1 दिसंबर, 2018 से लागू किया गया है तथा 31 मार्च, 2019 तक की अवधि के लिये पहली किस्त का इसी वर्ष के दौरान भुगतान कर दिया जाएगा। 

स्रोत : द हिंदू 


जीव विज्ञान और पर्यावरण

ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन स्तर में तीव्र वृद्धि

चर्चा में क्यों?


हाल ही में किये गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि चीन की तुलना में भारतीय शहरों में ग्रीनहाउस गैस (GHG) का उत्सर्जन का स्तर तेज़ी से बढ़ रहा है। 

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • हाल ही में भारत में ज़िलों के जनसंख्या घनत्व तथा वाहनों के संदर्भ में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन अध्ययन का विश्लेषण किया गया जिसमें यह बात सामने आई कि चीन की तुलना में भारत में शहरीकरण की अपेक्षा वाहनों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेज़ी से वृद्धि हो रही है।
  • इस अध्ययन के अनुसार, गुरुग्राम में सबसे अधिक 140 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)और श्रावस्ती में सबसे कम 1.8 किलोग्राम CO2 होता है। इस अध्ययन से यह भी पता चलता है कि कार्य पर आने-जाने के दौरान प्रत्येक भारतीय 20 किलोग्राम CO2 उत्सर्जित करता है।
  • अधिकांश विकसित देशों में शहरीकरण को GHG उत्सर्जन में कमी का कारण पाया गया क्योंकि वहाँ अधिक शहरीकरण का मतलब कार्यस्थल और घर के बीच कम दूरी तथा आने-जाने के लिये सार्वजनिक परिवहन पहली प्राथमिकता होती है। हालाँकि यह प्रभावी रूप से विकासशील देशों पर लागू नहीं होता है।
  • अध्ययन के अनुसार, चीन में शहरीकरण से 1% की वृद्धि अर्थात CO2 उत्सर्जन में 0.12% की वृद्धि, जबकि भारत में 0.24% की वृद्धि हुई है। 
  • 2017 में भारत का CO2 उत्सर्जन अनुमानित 4.6% बढ़ा और यह प्रति व्यक्ति उत्सर्जन लगभग 1.8 टन था।
  • भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा CO2उत्सर्जक होने के बावजूद यह उत्सर्जन विश्व औसत (प्रति व्यक्ति उत्सर्जन 4.2 टन) से बहुत कम है। लेकिन ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के आँकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में औसत विकास दर 6% के साथ यह उत्सर्जन लगातार बढ़ रहा है।

उत्सर्जन का विश्लेषण

  • अध्ययन में कहा गया है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी उत्सर्जन को रोकने को हमेशा एक समाधान नहीं है।
  • डीजल की कीमत में 1% की वृद्धि से कुछ ज़िलों में उत्सर्जन में 11% की कमी आई, जबकि कम आय वाले ज़िलों में यह लगभग 3% तक गिर गया।
  • अध्ययन में यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि भारत का परिवहन पैटर्न यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में जलवायु के साथ ज़्यादा अनुकूल स्थिति में है। यहाँ के कुछ ज़िलों के ज़्यादातर लोग कम पैदल दूरी के लिये तीन पहिया वाहनों पर निर्भर हैं, जबकि अन्य शहरी, समृद्ध लोग जिनकी संख्या अधिक है, कारों का इस्तेमाल करते हैं।
  • दिल्ली में प्रति व्यक्ति उच्चतम उत्सर्जन पाया गया जिसके कारण प्रदूषण स्तर अपने उच्च स्तर पर पहुँच गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलूरु और हैदराबाद की तुलना में 2.5 गुना अधिक उत्सर्जन पाया गया।
  • रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की उच्च सामाजिक-आर्थिक स्थिति और निजी यात्रा साधनों पर भारी निर्भरता के कारण अन्य बड़े शहरों की तुलना में यहाँ उच्च उत्सर्जन स्तर पाया गया।

स्रोत – द हिंदू


विविध

Rapid Fire करेंट अफेयर्स (5 February)

  • आपदा जोखिम प्रबंधन पर इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) की बैठक नई दिल्ली में हुई। इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसमें 22 सदस्य तथा 9 संवाद साझीदार शामिल हैं। इसमें से कई ऐसे देश शामिल हैं, जहां प्रायः आपदा की स्थिति उत्पन्न होती रहती है। आपदा जोखिम प्रबंधन इस संगठन के प्राथमिक क्षेत्रों में शामिल है और इसकी कार्य योजना (2017-2021) का उद्देश्य IORA देशों में आपदा प्रबंधन में सुधार लाना है।
  • नई दिल्ली में 4 फरवरी को भारत-मोनाको बिज़नेस फोरम का आयोजन किया गया। इसमें केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग तथा सिविल एविएशन मंत्री सुरेश प्रभु ने भी हिस्सा लिया। गौरतलब है कि दुनिया की सर्वोच्च प्रति व्यक्ति आय वाले देशों में से एक मोनाको की मुक्त बाज़ार अर्थव्यवस्था उसके उद्योग और सेवा क्षेत्रों से संचालित है, जो भारत के लिये बेहद अनुकूल है। भारत और मोनाको के बीच 2017-18 में द्विपक्षीय व्यापार 3.01 मिलियन डॉलर रहा और भारत में FDI (अप्रैल 2000 से जून 2018 तक) के मामले में मोनाको का 106वाँ स्थान है।
  • पहले से स्थापित संयुक्त कोयला कार्य समूह के साथ-साथ अनुसंधान संस्थानों और दोनों देशों के बीच कुछ अन्य क्षेत्रों को शामिल कर अध्ययन के ज़रिये कोयला खनन और स्वच्छ कोयला टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में संबंधों को बढ़ाने के लिये भारत और पोलैंड के बीच एक समझौता हुआ। इसमें कोयला क्षेत्र में व्यापार और निवेश को बढ़ाने तथा कोयले से जुड़े ऊर्जा संबंधी मुद्दों को शामिल किया गया है। इसमें खासतौर से स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों की समझ बढ़ाने और नीतियों, कार्यक्रमों तथा प्रौद्योगिकी के बारे में सूचना के आदान-प्रदान को बढ़ावा देकर कोयला अन्वेषण और दोहन, अनुसंधान और विकास, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण पर ज़ोर दिया जाएगा।
  • यूरोपीय संघ के 19 सदस्य देशों ने अमेरिका समर्थित वेनेज़ुएला की नेशनल असेंबली के स्पीकर जुआन गुइडो को वेनेज़ुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दी है। इसके अलावा 14 सदस्यों वाले लीमा समूह के 11 देशों- अर्जेंटीना, ब्राज़ील, कनाडा, चिली, कोलंबिया, कोस्टा रिका, ग्वाटेमाला, होंडुरास, पनामा, पैराग्वे और पेरू ने भी सत्ता परिवर्तन का समर्थन किया है। यह कदम वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को नए सिरे से राष्ट्रपति चुनाव कराने के 8 दिन के अल्टीमेटम को अमल में लाने में विफल रहने पर उठाया गया है।
  • ब्रिटेन ने भारतीय कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दे दी है। लगभग दो महीने पहले लंदन की एक निचली अदालत ने विजय माल्या के प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दी थी। इसके बाद ब्रिटेन के गृह मंत्री को इस पर फैसला लेना था और वहाँ के गृह मंत्री साजिद जाविद ने प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दे दी है। विजय माल्या ने इसके खिलाफ कोर्ट ऑफ अपील (हाई कोर्ट के समकक्ष) में जाने की बात कही है। अगर वहाँ अपील खारिज हुई तो सुप्रीम कोर्ट में जाने का विकल्प भी है। गौरतलब है कि विजय माल्या पर भारत में धोखाधड़ी की साज़िश करने, गलतबयानी करने और मनीलॉन्ड्रिंग के मामलों में मुकदमे चल रहे हैं।
  • ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 12वें क्षेत्रीय मानक सम्मेलन का आयोजन किया गया। BIS कानून 2016 भारत में मानकों के विकास और अंतरण की रूपरेखा निर्धारित  करता है। BIS की महानिदेशक सुरीना राजन ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसका आयोजन भारतीय उद्योग महासंघ ने ओडिशा सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), नेशनल एक्रीडीटेशन बोर्ड ऑफ सर्टिफिकेशन बॉडीज़, निर्यात निरीक्षण परिषद, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अनुसंधान केंद्र के सहयोग से किया था।
  • हाल ही में बंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान में जे.एन. टाटा ऑडिटोरियम में 15वें ‘जापान हब्बा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय परिधानों में सजी जापानी महिलाओं ने हिस्सा लिया और भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुत किया। ‘जापान हब्बा’ कार्यक्रम भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारत में जापानी संस्कृति के उत्सव का कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य देश के लोगों को जापान में रोज़गार और शिक्षा के अवसरों से परिचित कराते हुए जापानी संस्कृति के बारे में जानकारी देना था।

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