राष्ट्रीय संस्थान/संगठन

राष्ट्रीय हरित अधिकरण | 21 Jun 2019 | महत्त्वपूर्ण संस्थान

 Last Updated: July 2022 

NGT की संरचना

शक्तियाँ और अधिकार क्षेत्र

1. जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974

2. जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) उपकर अधिनियम, 1977

3. वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980

4. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981

5. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986

6. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986

7. जैव-विविधता अधिनियम, 2002

NGT का महत्त्व

चुनौतियाँ

दो महत्त्वपूर्ण अधिनियमों [वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) तथा अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी अधिनियम, 2006 (Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers Act, 2006)] को NGT के अधिकार-क्षेत्र से बाहर रखा गया है, लेकिन इससे कई बार NGT के काम-काज प्रभावित होता है, क्योंकि पर्यावरण से जुड़े कई मुद्दे इन अधिनियमों के अधीन आते हैं।

NGT के महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक निर्णय

इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि बहुत कम समय में NGT ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है और पर्यावरण प्रहरी के रूप में अपनी एक अलग छवि निर्मित की है। इसके बावजूद देश में हो रही विकास गतिविधियों के साथ तालमेल स्थापित करके पर्यावरण संरक्षण हेतु NGT के दायरे को और अधिक विस्तृत करने की आवश्यकता है ताकि देश के विकास के साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा किया जा सके।