राष्ट्रीय संस्थान/संगठन

केंद्रीय सतर्कता आयोग | 22 Jun 2020 | भारतीय राजनीति

 Last Updated: July 2022 

केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission-CVC) एक शीर्षस्‍थ सतर्कता संस्‍थान है जो किसी भी कार्यकारी प्राधिकारी के नियंत्रण से मुक्‍त है तथा केंद्रीय सरकार के अंतर्गत सभी सतर्कता गतिविधियों की निगरानी करता है साथ ही केंद्रीय सरकारी संगठनों में विभिन्‍न प्राधिकारियों को उनके सतर्कता कार्यों की योजना बनाने, निष्‍पादन करने, समीक्षा करने एवं सुधार करने के संबंध में सलाह देता है। 

सतर्कता (Vigilance) का अर्थ है विशेष रूप से कर्मियों और सामान्य रूप से संस्थानों की दक्षता एवं प्रभावशीलता की प्राप्ति के लिये स्वच्छ तथा त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करना, क्योंकि सतर्कता का अभाव अपव्यय, हानि और आर्थिक पतन का कारण बनता है।

CVC को सरकार द्वारा फरवरी, 1964 में के. संथानम की अध्यक्षता वाली भ्रष्टाचार निरोधक समिति (Committee on Prevention of Corruption) की सिफारिशों पर स्थापित किया गया था। संसद द्वारा अधिनियमित केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 द्वारा इसे सांविधिक दर्जा प्रदान किया गया।

CVC किसी भी मंत्रालय/विभाग के अधीन नहीं है। यह एक स्वतंत्र निकाय है जो केवल संसद के प्रति उत्तरदायी है।

कार्य

पृष्ठभूमि

प्रशासन 

संरचना

सचिवालय

मुख्य तकनीकी परीक्षक संगठन

(Chief Technical Examiners' Organisation- CTEO)

विभागीय जाँच आयुक्त

(Commissioners for Departmental Inquiries- CDIs)

इंटीग्रिटी इंडेक्स डेवलपमेंट

(Integrity Index Development- IID)

बाह्य एजेंसियों के माध्यम से CVC का अन्वेषण

मुख्य सतर्कता अधिकारी (Chief Vigilance Officers- CVOs)

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो

(Central Bureau of Investigation- CBI)

CVC का अधिकार क्षेत्र

केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 

केंद्र सरकार, किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा या उसके अंतर्गत गठित निगम, सरकारी कंपनियाँ, केंद्र सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में संचालित सोसाइटियाँ और स्थानीय प्राधिकरण में कार्यरत लोक सेवकों की कुछ श्रेणियों द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के अंतर्गत किये गए अपराधों के मामले में आयोग को जाँच का अधिकार प्राप्त है। लोक सेवकों की ये श्रेणियाँ हैं: 

लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013

सूचना प्रदाता संरक्षण अधिनियम, 2014 

(The Whistleblowers Protection Act, 2014)

CVC के संबंध में नवीनतम सुधार: 

CVC की सीमाएँ

निष्कर्ष

निकट अतीत भारत एक प्रगतिशील और जीवंत अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में तेज़ी से विकास के साथ देश की अवसंरचना, निर्माण क्षेत्र, खुदरा क्षेत्र एवं अन्य क्षेत्रों में भारी निवेश किया गया है। अर्थव्यवस्था में तीव्र वृद्धि के साथ भ्रष्टाचार के खतरे में भी वृद्धि हुई है जिसके विरुद्ध संघर्ष के लिये CVC के समक्ष चुनौतियाँ और बढ़ गई हैं। इस परिदृश्य में CVC की प्रणालीगत कमियों को दूर करना समय की बड़ी आवश्यकता है।