• प्रश्न :

    प्रश्न: ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का विचार प्रशासनिक दक्षता का वादा करता है, लेकिन यह संघवाद और लोकतांत्रिक जवाबदेही को लेकर चिंताएँ भी उत्पन्न करता है। चर्चा कीजिये। (250 शब्द)

    31 Mar, 2026 सामान्य अध्ययन पेपर 2 राजव्यवस्था

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:  

    • उत्तर का परिचय ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा का संक्षिप्त वर्णन करते हुए दीजिये।
    • ONOE (एक राष्ट्र, एक चुनाव) के पक्ष में मुख्य तर्क प्रस्तुत कीजिये तथा प्रशासनिक दक्षता के वादे को स्पष्ट कीजिये।
    • संघवाद और लोकतांत्रिक जवाबदेही से संबंधित चिंताओं को उजागर कीजिये।
    • दक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने के उपाय सुझाएँ।
    • तद्नुसार उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय: 

    भारत का चुनावी लोकतंत्र लगभग निरंतर चुनावों के चक्र से चिह्नित है, जिसके कारण बार-बार प्रशासनिक संसाधनों की तैनाती होती है और शासन-प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न होते हैं।

    • एक राष्ट्र, एक चुनाव (ONOE) की अवधारणा प्रशासनिक दक्षता का वादा करती है, लेकिन यह संघवाद और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़ी गंभीर चिंताओं को भी उत्पन्न करती है, जो संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं।

    मुख्य भाग:

    ONOE और प्रशासनिक दक्षता: संभावनाएँ 

    • प्रशासनिक तर्क संगठन: बार-बार होने वाले चुनावों के कारण शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी अपनी मूल ज़िम्मेदारियों से हटकर चुनावी कार्यों में लग जाते हैं।
      • ONOE चुनावी प्रक्रियाओं को एकीकृत कर प्रशासनिक निरंतरता को बहाल करता है।
    • MCC के कारण नीति-गत ठहराव को कम करना: मॉडल आचार संहिता (MCC) के बार-बार लागू होने से कल्याणकारी योजनाएँ, सार्वजनिक खरीद और अवसंरचना परियोजनाएँ रुक जाती हैं।
      • एक ही चुनाव चक्र लंबी, निर्बाध शासन अवधि सुनिश्चित करता है।
    • वित्तीय अनुशासन: अलग-अलग चुनावों से लॉजिस्टिक्स, EVM, सुरक्षा और प्रशासन पर खर्च कई गुना बढ़ जाता है।
      • समन्वित चुनाव लागत के तर्कसंगठन और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग में सहायक होते हैं।
      • अनुमानों के अनुसार, एक साथ चुनाव कराने से मतदान कर्मियों की तैनाती लगभग 28% तक कम हो सकती है, जिससे 1 करोड़ से अधिक मानव-दिवसों की बचत संभव है।
    • सुरक्षा बलों का अनुकूलन: लगातार चुनावों के कारण केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के कर्मियों की बार-बार तैनाती करनी पड़ती है।
      • ONOE समन्वित और कुशल सुरक्षा प्रबंधन को सक्षम बनाता है, जिससे आंतरिक सुरक्षा की तत्परता बनी रहती है।
    • मतदाता सहभागिता में वृद्धि: यह मतदाता थकान और बार-बार की लामबंदी को कम करता है।
      • इससे अधिक और स्थिर मतदान प्रतिशत को प्रोत्साहन मिलता है।
    • नीतिगत स्थिरता और आर्थिक लाभ: बार-बार चुनाव होने से अल्पकालिक लोकलुभावन नीतियों को बढ़ावा मिलता है।
      • ONOE दीर्घकालिक नीतिनिर्माण को प्रोत्साहित करता है, जिससे निवेशकों का विश्वास और व्यापक आर्थिक स्थिरता मज़बूत होती है।

    संघवाद से संबंधित चिंताएँ

    • संघीय संतुलन का क्षरण: एक साथ चुनाव कराने से राजनीतिक विमर्श का एकरूपीकरण हो सकता है, जिसमें राष्ट्रीय मुद्दों को राज्य-विशिष्ट मुद्दों पर प्राथमिकता मिलती है।
      • यह असममित संघवाद की भावना को कमज़ोर करता है।
    • क्षेत्रीय दलों का हाशियाकरण: अधिक वित्तीय और मीडिया संसाधनों वाले राष्ट्रीय दलों को असमान रूप से लाभ मिलता है।
      • इससे क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व कमज़ोर होता है और सहकारी संघवाद प्रभावित होता है।
    • केंद्रीकरण की प्रवृत्ति: साक्ष्य बताते हैं कि एक साथ चुनावों में मतदाता दोनों स्तरों पर एक ही दल को चुन सकते हैं।
      • यह राजनीतिक केंद्रीकरण की ओर ले जाता है, जो भारत की अर्द्ध-संघीय संरचना के विपरीत है।
    • राज्य स्वायत्तता पर प्रतिबंध: निश्चित चुनावी चक्र राज्यों की राजनीतिक संकटों (जैसे—समय से पहले विधानसभा भंग होना) के प्रति अनुकूल प्रतिक्रिया देने की क्षमता को सीमित कर देता है।

    लोकतांत्रिक जवाबदेही से संबंधित चिंताएँ

    • निरंतर जवाबदेही का कमज़ोर होना: चरणबद्ध चुनाव एक नियमित फीडबैक तंत्र के रूप में कार्य करते हैं।
      • ONOE इसे घटाकर पाँच वर्षों में एक बार होने वाली जवाबदेही की घटना बना देता है।
    • सरकारों की उत्तरदायित्वशीलता में कमी: सरकारें जनता की बदलती शिकायतों और अपेक्षाओं के प्रति कम संवेदनशील हो सकती हैं।
      • इससे चुनावी चक्रों के बीच लोकतांत्रिक घाटा उत्पन्न होने का खतरा रहता है।
    • मध्यावधि विघटन की जटिलताएँ: ‘अवशिष्ट कार्यकाल’ का प्रस्ताव कई चिंताएँ उत्पन्न करता है—
      • अल्पकालिक सरकार की वैधता पर प्रश्न उठ सकते हैं।
      • यह दीर्घकालिक नीतिनिर्माण को हतोत्साहित कर सकता है।
    • चुनावी विकल्प का विकृतिकरण: राष्ट्रीय मुद्दे राज्य चुनावों में भी मतदाताओं की सोच पर हावी हो सकते हैं।
      • इससे मुद्दा-आधारित अलग-अलग मतदान सीमित हो जाता है और लोकतंत्र की गहराई कमज़ोर पड़ती है।
    • चुनावी वित्त में असमानता: एकीकृत चुनाव अधिक संसाधन-संपन्न राष्ट्रीय दलों को लाभ पहुँचाते हैं।
      • यह राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा में असमानता उत्पन्न करता है और निष्पक्षता को प्रभावित करता है।

    दक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन

    • चरणबद्ध क्रियान्वयन: संक्रमण अवधि के माध्यम से क्रमिक समन्वय किया जाए (जैसा कि कोविंद समिति ने सुझाव दिया है)।
    • रचनात्मक अविश्वास प्रस्ताव: वर्तमान सरकार को हटाने से पूर्व एक वैकल्पिक सरकार का गठन सुनिश्चित किया जाए, ताकि शासन में स्थिरता बनी रहे।
    • अवशिष्ट कार्यकाल पर विधिक स्पष्टता: मध्यावधि सरकारों की वैधता बनाए रखने के लिये उनके अधिकार और दायरे को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए।
    • संघीय परामर्श को सुदृढ़ करना: सहमति-आधारित क्रियान्वयन के लिये एक अंतर-राज्यीय चुनाव परिषद का संस्थानीकरण किया जाए।
    • चुनावी स्वायत्तता की सुरक्षा: मतदाताओं की स्वतंत्र पसंद को बनाए रखने हेतु अलग-अलग मतपत्र के प्रति जागरूकता और पृथक मतदान तंत्र को बढ़ावा दिया जाए।
    • संस्थागत तैयारी: बड़े पैमाने पर समन्वित चुनावों के लिये साझा मतदाता सूची, अवसंरचना और लॉजिस्टिक क्षमता का विकास किया जाए।

    निष्कर्ष:

    ONOE एक पारंपरिक शासन संबंधी द्वंद्व को दर्शाता है—दक्षता बनाम लोकतांत्रिक गहराई। यद्यपि यह प्रशासनिक और वित्तीय दक्षता में महत्त्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है, परंतु यह संघीय संतुलन तथा निरंतर लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमज़ोर करने का जोखिम भी उत्पन्न करता है। अतः ONOE की दिशा में कोई भी कदम क्रमिक, परामर्शात्मक और संवैधानिक रूप से संरक्षित होना चाहिये, ताकि दक्षता की प्राप्ति भारत की बहुलतावादी एवं संघीय लोकतांत्रिक भावना की कीमत पर न हो।