1.कोई सभ्यता केवल शक्ति के बल पर नहीं, बल्कि आत्म-सुधार की क्षमता से जीवित रहती है।
2. न्याय के बिना व्यवस्था केवल संगठित अन्याय है।
प्रश्न का उत्तर जल्द ही प्रकाशित होगा।