सुश्री रिया मल्होत्रा एक उप मंडल अधिकारी (SDM) के रूप में एक पिछड़े, सूखा-प्रवण विकासखंड में कार्यरत हैं, जहाँ जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), पेंशन तथा MGNREGA जैसी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर है।
एक नियमित निरीक्षण के दौरान, सुश्री मल्होत्रा को स्थानीय PDS प्रणाली में गंभीर अनियमितताओं का पता चलता है। कई उचित मूल्य दुकान संचालक निम्न-स्तरीय राजस्व और आपूर्ति अधिकारियों की कथित मिलीभगत से सब्सिडी वाले खाद्यान्न को खुले बाज़ार में बेच रहे हैं। डिजिटल अभिलेखों में अनुपालन दर्शाया गया है, लेकिन स्थल सत्यापन और लाभार्थियों के बयान वास्तविक पात्र परिवारों के व्यापक बहिष्करण की ओर संकेत करते हैं।
यदि तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाती है, जैसे कि डीलरों और अधिकारियों का निलंबन, तो अल्पावधि में हज़ारों कमज़ोर परिवारों की खाद्यान्न आपूर्ति बाधित होने का जोखिम है। इसके अतिरिक्त, कुछ आरोपी अधिकारी राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं और सुश्री मल्होत्रा को अनौपचारिक संदेश मिलते हैं कि “विवाद से बचने के लिये मामले को संवेदनशील ढंग से संभालें।”
इसी बीच, नागरिक समाज संगठन एवं स्थानीय मीडिया इस मुद्दे को उजागर करने लगे हैं और प्रशासन की पारदर्शिता तथा न्याय के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रश्न उठा रहे हैं। खेती के मंदी के मौसम में कल्याणकारी सेवाओं के वितरण में रुकावट आने से भुखमरी और सामाजिक संकट बढ़ने की गंभीर आशंका है।
सुश्री मल्होत्रा को ऐसा निर्णय लेना है जो न्याय सुनिश्चित करे, कमज़ो वर्गों की रक्षा करे और प्रशासनिक ईमानदारी को बनाए रखे।
प्रश्न
1. इस मामले में कौन-कौन से नैतिक मुद्दे शामिल हैं?
2. सुश्री मल्होत्रा के सामने कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं? प्रत्येक के गुण-दोष का परीक्षण कीजिये।
3. सुश्री मल्होत्रा को कौन-सा कदम उठाना चाहिये? अपने उत्तर को नैतिक मूल्यों, लोकहित और प्रशासनिक ज़िम्मेदारी के संदर्भ में उचित ठहराइए।
प्रश्न का उत्तर जल्द ही प्रकाशित होगा।