प्रश्न :
आप एक तेज़ी से शहरीकरण की ओर बढ़ते ज़िले के ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) हैं। राज्य सरकार ने 'सार्वजनिक-निजी भागीदारी' (PPP) मॉडल के तहत किफायती आवास और वाणिज्यिक परिसरों के निर्माण से जुड़ी एक बड़ी शहरी बुनियादी ढाँचा परियोजना को मंजूरी दी है।
शॉर्टलिस्ट की गई निजी कंपनियों में से एक आपके जीवनसाथी के करीबी रिश्तेदार की है। उस कंपनी का तकनीकी रिकॉर्ड काफी मज़बूत है और उसने सबसे कम वित्तीय बोली लगाई है। हालाँकि नियम स्पष्ट रूप से रिश्तेदारों की भागीदारी पर रोक नहीं लगाते हैं, लेकिन मीडिया रिपोर्टों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।
वहीं दूसरी ओर, वरिष्ठ राजनीतिक अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिया है कि आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन के लिये इस परियोजना को जल्द मंजूरी देना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इस प्रक्रिया में देरी करना या स्वयं को इससे अलग करना परियोजना को धीमा कर सकता है और आप पर अकुशलता के आरोप लग सकते हैं।
आपके अधीनस्थ अधिकारी इस पर विभाजित हैं; कुछ का तर्क है कि योग्यता को प्राथमिकता दी जानी चाहिये, जबकि अन्य चेतावनी देते हैं कि पक्षपात की सार्वजनिक धारणा प्रशासन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचा सकती है।
प्रश्न:
1. उपरोक्त मामले में शामिल नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिये।
2. ज़िला मजिस्ट्रेट के रूप में आपके पास कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं?
3. आप कौन-सा कार्यवाही मार्ग चुनेंगे और अपने निर्णय को नैतिक आधार पर न्यायसंगत ठहराएँ।
4. सार्वजनिक प्रशासन में ऐसे दुविधाओं को रोकने के लिये संस्थागत तंत्रों को कैसे सुदृढ़ किया जा सकता है?
23 Jan, 2026
सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़
उत्तर :
संबंधित हितधारक
- ज़िला मजिस्ट्रेट (आप): विकास को सुगम बनाने के साथ-साथ वैधता, नैतिक आचरण और जन-विश्वास सुनिश्चित करने के लिये उत्तरदायी।
- राज्य सरकार/राजनीतिक कार्यपालिका: परियोजनाओं के समय पर कार्यान्वयन, आर्थिक विकास और राजनीतिक जवाबदेही में रुचि रखते हैं।
- निजी कंपनियाँ (सहित रिश्तेदार की कंपनी): योग्यता के आधार पर अनुबंध प्राप्त करने के लिये एक निष्पक्ष और पारदर्शी अवसर हेतु प्रतिस्पर्द्धा करना।
- स्थानीय नागरिक/लाभार्थी: किफायती आवास, रोज़गार और शहरी बुनियादी ढाँचे से लाभान्वित होने के इच्छुक तथा साथ ही शासन में ईमानदारी की अपेक्षा करते हैं।
- अधीनस्थ अधिकारी एवं प्रशासन: निर्णयों को लागू करते हैं और नैतिक शासन में स्थापित उदाहरणों से प्रभावित होते हैं।
- मीडिया एवं नागरिक समाज: पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये निगरानी करते हैं।
- न्यायपालिका/सतर्कता संस्थाएँ: कानूनी या नैतिक उल्लंघनों की स्थिति में संभावित निर्णायक।
1. उपरोक्त मामले में शामिल नैतिक मुद्दों की पहचान
मामले में शामिल नैतिक मुद्दे
दिये गए केस में कई ऐसे नैतिक मुद्दे उजागर होते हैं जो सार्वजनिक प्रशासन में, विशेषकर वरिष्ठ निर्णय-निर्धारण स्तर पर सामान्य रूप से उत्पन्न होते हैं:
- हितों का टकराव: सबसे प्रमुख नैतिक मुद्दा हितों का टकराव है। ज़िला मजिस्ट्रेट के रूप में आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप निष्पक्ष निर्णय लें।
- हालाँकि, आपकी पत्नी के निकट रिश्तेदार द्वारा स्वामित्व वाली कंपनी की भागीदारी ऐसी स्थिति उत्पन्न करती है जहाँ व्यक्तिगत संबंध आधिकारिक निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं या प्रभावित करते हुए प्रतीत हो सकते हैं, भले ही कोई वास्तविक पक्षपात न हो।
- ईमानदारी बनाम प्रशासनिक त्वरितता: आर्थिक विकास और रोज़गार के लिये परियोजना को जल्दी मंज़ूर करने का दबाव है।
- यह नैतिक ईमानदारी और त्वरित निर्णय लेने के बीच तनाव उत्पन्न करता है, जहाँ नैतिक सुरक्षा उपायों को आवश्यकताओं के बजाय अवरोध के रूप में देखा जा सकता है।
- राजनीतिक और बाह्य दबाव: राजनीतिक कार्यपालिका से अनौपचारिक संकेत प्रशासनिक अधिकारी को कठिन स्थिति में डालते हैं।
- दबाव के आगे झुकना प्रशासनिक तटस्थता को प्रभावित करता है, जबकि इसका विरोध करना अक्षमता के आरोपों को आमंत्रित कर सकता है।
- जवाबदेही और पारदर्शिता: वरिष्ठ सार्वजनिक अधिकारी के रूप में DM न केवल अपने वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति बल्कि जनता के प्रति भी जवाबदेह है।
- मामले को सॅंभालने में पारदर्शिता की कमी संस्थागत जवाबदेही को कमज़ोर कर सकती है।
2. ज़िला मजिस्ट्रेट के रूप में आपके पास कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं?
ज़िला मजिस्ट्रेट के रूप में उपलब्ध विकल्प
- विकल्प 1: तकनीकी और वित्तीय योग्यता के आधार पर निर्णय लेना: मैं टेंडर प्रक्रिया को जारी रखने और उस कंपनी को मंज़ूरी देने पर विचार कर सकता हूँ, क्योंकि यह सभी तकनीकी व वित्तीय मानदंडों को पूरा करती है तथा सबसे कम बोली प्रस्तुत की है।
- यह विकल्प प्रशासनिक दक्षता, परियोजना की समय पर समाप्ति और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देता है।
- हालाँकि, इसमें करीबी पारिवारिक संबंध शामिल होने के कारण, ऐसा निर्णय प्रक्रिया के हिसाब से सही होने पर भी पक्षपातपूर्ण प्रतीत हो सकता है।
- इस धारणा से लोक विश्वास कमज़ोर हो सकता है, मीडिया की निगरानी बढ़ सकती है और प्रशासन की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
- विकल्प 2: निर्णय प्रक्रिया से स्वयं को अलग करना: मैं औपचारिक रूप से निर्णय प्रक्रिया से स्वयं को अलग कर सकता हूँ और मामले को किसी तटस्थ वरिष्ठ अधिकारी या उपयुक्त प्राधिकारी को सौंप सकता हूँ।
- यह विकल्प वास्तविक और अनुमानित हितों के टकराव दोनों को प्रभावी ढंग से संबोधित करता है तथा निष्पक्षता, ईमानदारी एवं नैतिक शासन के प्रति मेरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- हालाँकि इससे मामूली प्रक्रियागत देरी हो सकती है या इसे ज़िम्मेदारी से बचने के रूप में देखा जा सकता है, यह पारदर्शिता को मज़बूत करता है और संस्थान को नैतिक विवाद से सुरक्षित रखता है।
- विकल्प 3: मामले को स्वतंत्र समिति के पास भेजना: मैं अंतिम निर्णय को एक स्वतंत्र, बहु-सदस्यीय समिति के समक्ष रख सकता हूँ और साथ-साथ उपयुक्त दस्तावेज़ीकरण तथा तर्कों का विधिवत अभिलेख भी सुनिश्चित कर सकता हूँ।
- यह सामूहिक निर्णय-निर्माण को बढ़ावा देता है, व्यक्तिगत विवेकाधिकार को सीमित करता है और पारदर्शिता एवं निष्पक्षता को मज़बूत करता है।
- हालाँकि इस दृष्टिकोण से कुछ देरी हो सकती है, यह मज़बूत नैतिक रक्षा प्रदान करता है और प्रशासन को पक्षपात या मनमानी के आरोपों से बचाता है।
- विकल्प 4: कानूनी और सतर्कता प्राधिकरण से लिखित स्वीकृति प्राप्त करना: मैं आगे बढ़ने से पहले कानूनी और सतर्कता प्राधिकरणों से औपचारिक लिखित सलाह प्राप्त कर सकता हूँ। यह कठोर प्रक्रियागत अनुपालन सुनिश्चित करता है और संस्थागत जवाबदेही को मज़बूत करता है।
- हालाँकि, ऐसी मंज़ूरी कानूनी उल्लंघनों से सुरक्षा प्रदान कर सकती है, यह सार्वजनिक धारणा और नैतिक ज़िम्मेदारी से उत्पन्न नैतिक चिंताओं को पूरी तरह संबोधित नहीं कर सकती।
- विकल्प 5: टेंडर रद्द करना और नई बोली आमंत्रित करना: मैं चल रहे टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर सकता हूँ और किसी भी पक्षपात की शंका को समाप्त करने के लिये नई बोली आमंत्रित कर सकता हूँ। यह विकल्प उच्चतम स्तर की निष्पक्षता, पारदर्शिता और नैतिक सतर्कता को दर्शाता है।
- साथ ही इससे परियोजना में देरी, लागत वृद्धि और निवेशक विश्वास में कमी हो सकती है, विशेषकर तब जब कोई स्पष्ट कानूनी अनियमितता स्थापित न हुई हो।
3. आप कौन-सा कार्यवाही मार्ग चुनेंगे और अपने निर्णय को नैतिक आधार पर न्यायसंगत ठहराएंगे।
चयनित कार्यवाही और नैतिक औचित्य
- चयनित कार्यवाही: निर्णय प्रक्रिया से स्वयं को अलग करना और मामले को किसी स्वतंत्र प्राधिकारी/समिति के पास भेजना।
औचित्य:
- निष्पक्षता बनाए रखना: निष्पक्षता सार्वजनिक सेवा का मौलिक मूल्य है। मेरी पत्नी के निकट रिश्तेदार की स्वामित्व वाली कंपनी की भागीदारी ऐसी स्थिति उत्पन्न करती है जहाँ मेरी वस्तुनिष्ठता पर प्रश्न उठ सकते हैं।
- भले ही निर्णय तकनीकी रूप से सही हों, निर्णय प्रक्रिया से अलग होना यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्तिगत संबंध आधिकारिक निर्णय को प्रभावित न करे।
- ईमानदारी और शुचिता सुनिश्चित करना: स्वयं को अलग करके मैं सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और शुचिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करता हूँ।
- यह इस विचार को मज़बूत करता है कि सार्वजनिक पद विश्वास का स्थान है और इसे उच्चतम नैतिक मानकों के साथ निभाया जाना चाहिये।
- पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करना: निर्णय को स्वतंत्र समिति के पास भेजना पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय-निर्माण को बढ़ावा देता है।
- उचित दस्तावेज़ीकरण और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन अंतिम परिणाम को नैतिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से सुरक्षित बनाते हैं।
- विकास और नैतिकता का संतुलन: यद्यपि कार्य से अलग होने के कारण परियोजना के निष्पादन में कुछ देरी हो सकती है, लेकिन प्रशासनिक सुविधा के लिये 'नैतिक शासन' के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।
- दीर्घकालीन लोक विश्वास अल्पकालिक दक्षता लाभों से अधिक महत्त्वपूर्ण है।
- नैतिक उदाहरण स्थापित करना: ऐसी कार्यवाही अधीनस्थों के लिये सकारात्मक नैतिक उदाहरण स्थापित करती है और प्रशासन में नैतिक संस्कृति को मज़बूत करती है, जिससे न्यायसंगतता, वस्तुनिष्ठता तथा ज़िम्मेदारी जैसे मूल्य पुष्ट होते हैं।
4. सार्वजनिक प्रशासन में ऐसी दुविधाओं को रोकने के लिये संस्थागत तंत्रों को कैसे सुदृढ़ किया जा सकता है?
नैतिक दुविधाओं को रोकने के लिये संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करना
- स्पष्ट और प्रवर्तनीय हितों के टकराव के नियम: व्यापक हित टकराव दिशा-निर्देशों में पारिवारिक, वित्तीय और व्यक्तिगत संबंधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिये।
- अनिवार्य प्रकटीकरण और मानकीकृत 'कार्य-पृथक्करण' प्रक्रियाएँ अस्पष्टता को कम करती हैं तथा विवेकाधीन शक्तियों के दुरुपयोग को रोकती हैं। यह लोक सेवकों के लिये नैतिक स्पष्टता सुनिश्चित करता है।
- संस्थागत कार्य-पृथक्करण और प्रतिनिधिमंडल ढाँचा: संवेदनशील मामलों में स्वतः कार्य-पृथक्करण के औपचारिक तंत्र को सेवा नियमों में शामिल किया जाना चाहिये।
- निर्णय लेने का अधिकार स्वतंत्र अधिकारियों या समितियों को सहज रूप से हस्तांतरित होना चाहिये। यह निष्पक्षता की रक्षा करते हुए देरी को न्यूनतम करता है।
- स्वतंत्र निगरानी और सतर्कता निकाय: सतर्कता आयोग और आंतरिक नैतिक समितियों को सुदृढ़ करने से जवाबदेही बढ़ती है।
- नियमित ऑडिट और सक्रिय निगरानी नैतिक उल्लंघनों को रोकती है। स्वतंत्र निगरानी जनता को निष्पक्ष शासन का आश्वासन देती है।
- दस्तावेज़ीकरण और सार्वजनिक प्रकटीकरण के माध्यम से पारदर्शिता: महत्त्वपूर्ण निर्णयों के कारणों को रिकॉर्ड करना और संभावित हित टकराव का सक्रिय प्रकटीकरण पारदर्शिता बढ़ाता है।
- खुली (पारदर्शी) प्रक्रियाएँ संदेह और मीडिया विवादों को कम करती हैं। पारदर्शिता एक निवारक नैतिक उपकरण के रूप में कार्य करती है।
- नैतिक प्रशिक्षण और मूल्य-आधारित क्षमता निर्माण: नियमित नैतिक प्रशिक्षण सिविल सेवकों को वास्तविक जीवन की दुविधाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है।
- मामला-आधारित अध्ययन नियमों के पालन से आगे जाकर नैतिक निर्णय क्षमता को विकसित करता है। मूल्य-प्रधान प्रशासनिक संस्कृति मूल स्तर पर नैतिक संघर्ष को कम करती है।
निष्कर्ष
निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और व्यक्तिगत प्रभाव से मुक्त होनी चाहिये ताकि लोक विश्वास एवं प्रशासनिक विश्वसनीयता बनी रहे। कार्य-पृथक्करण, प्रतिनिधिमंडल या स्वतंत्र निगरानी जैसे उपाय अपनाने से परियोजना को समय पर पूरा करते हुए नैतिक शासन सुनिश्चित किया जा सकता है।