प्रश्न. प्रशासन में लोक विश्वास केवल प्रक्रियात्मक दक्षता के बजाय मूल्य-आधारित आचरण का परिणाम है। विवेचना कीजिये। (150 शब्द)
उत्तर :
हल करने का दृष्टिकोण:
- उत्तर की शुरुआत मूल्य-आधारित आचरण को रेखांकित करते हुए कीजिये।
- मुख्य भाग में लोक विश्वास के निर्माण में मूल्य-आधारित आचरण की भूमिका स्पष्ट कीजिये।
- इसके बाद तर्क दीजिये कि केवल प्रक्रियात्मक दक्षता क्यों अपर्याप्त है।
- अंत में दक्षता और मूल्यों के बीच परस्पर पूरकता पर चर्चा कीजिये।
- तद्नुसार उचित निष्कर्ष दीजिये।
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परिचय
सार्वजनिक विश्वास केवल प्रशासन की गति, डिजिटलीकरण या प्रक्रियात्मक दक्षता के माध्यम से नहीं बनता, बल्कि शासन की नैतिक गुणवत्ता के माध्यम से स्थापित होता है।
- जहाँ कुशल प्रक्रियाएँ सेवा प्रदान करने में सुधार लाती हैं, वहीं मूल्य-आधारित आचरण, ईमानदारी, सहानुभूति, निष्पक्षता और उत्तरदायित्व प्रशासन को नैतिक वैधता प्रदान करते हैं।
- विश्वास तब उत्पन्न होता है जब नागरिक महसूस करते हैं कि सत्ता का प्रयोग न्यायसंगत और मानवीय रूप से किया जा रहा है, न कि यांत्रिक रूप से।
मुख्य भाग:
लोक विश्वास निर्माण में मूल्य-आधारित आचरण की भूमिका
- निर्णय-निर्माण में ईमानदारी और नैतिकता: ईमानदारी, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता सार्वजनिक संस्थानों में विश्वास उत्पन्न करती है। नागरिक उन प्रशासनों पर भरोसा करते हैं जो व्यक्तिगत लाभ के ऊपर जनहित को प्राथमिकता देते हैं।
- उदाहरण के लिये, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) की शुरुआत ने सार्वजनिक खरीद में ईमानदारी और नैतिकता को संस्थागत रूप दिया है, जिससे एंड-टू-एंड ऑनलाइन खरीद, मूल्य खोज तथा वास्तविक समय ऑडिट ट्रेल्स सक्षम हुए हैं।
- सेवा वितरण में सहानुभूति और करुणा: सहानुभूतिपूर्ण प्रशासक वास्तविक परिस्थितियों को समझते हैं और मानवीय अनुकूलन के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। यह केवल लेन-देन तक सीमित बातचीत से आगे जाकर भावनात्मक विश्वास को प्रबल करता है।
- उदाहरण के लिये, किसी कल्याण योजना के कार्यान्वयन के दौरान, एक प्रशासक व्यक्तिगत रूप से आपदा प्रभावित या प्रवासी परिवारों की कठिनाइयों का आकलन करने के बाद दस्तावेज़ीकरण की समय सीमा में अनुकूलन प्रदान करता है, जिससे लाभ वास्तव में ज़रूरतमंदों तक पहुँचते हैं।
- यह मानवीय अनुकूलन भावनात्मक विश्वास का निर्माण करता है और सेवा वितरण को केवल लेन-देन से उत्तरदायी शासन में परिवर्तित कर देता है।
- निष्पक्षता और तटस्थता: संगत और बिना पक्षपात के निर्णय-निर्माण विधि के शासन में विश्वास को मज़बूत करता है। नागरिक उन प्रणालियों पर भरोसा करते हैं जहाँ परिणाम योग्यता और न्याय पर आधारित हों, न कि प्रभाव पर।
- उदाहरण के लिये, संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित भर्ती प्रक्रिया निर्णय-निर्माण में निष्पक्षता और तटस्थता का उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिसमें गुमनाम मूल्यांकन, बहु-स्तरीय जाँच तथा संवैधानिक मानदंडों का कड़ाई से पालन शामिल है।
- उत्तरदायित्व और प्रत्युत्तर क्षमता: अपनी गलतियों को स्वीकार करना, त्रुटियों को सुधारना और नागरिकों के प्रति जवाबदेह होना लोकतांत्रिक विश्वास को मज़बूत करता है। मूल्य-आधारित उत्तरदायित्व केवल प्रक्रियात्मक रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है।
- उदाहरण के लिये, केंद्रीयकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) का शिकायत निवारण तंत्र शासन में उत्तरदायित्व तथा प्रत्युत्तर क्षमता को दर्शाता है, क्योंकि यह समयबद्ध समाधान, उन्नयन ट्रैकिंग एवं नागरिकों से प्रत्यक्ष फीडबैक सक्षम करता है।
केवल प्रक्रियात्मक दक्षता अपर्याप्त क्यों है
- नैतिकता के बिना दक्षता नागरिकों को अलग कर सकती है: प्रक्रियात्मक दक्षता समयसीमा, लक्ष्यों और आउटपुट पर केंद्रित होती है, लेकिन यह मानवीय परिणामों की अनदेखी कर सकती है। नियमों के कठोर पालन में संवेदनशीलता का अभाव कमज़ोर और असुरक्षित वर्गों को बाहर कर सकता है।
- उदाहरण के लिये, वास्तविक आवश्यकता होने के बावजूद मामूली दस्तावेज़ी अंतर के कारण कल्याण लाभों से वंचित करना कुशल लेकिन असंवेदनशील प्रशासन का प्रतीक है।
- तकनीकी शासन में नैतिक वैधता की कमी: डिजिटलीकरण और स्वचालन गति बढ़ाते हैं, लेकिन नैतिक विवेक का स्थान नहीं ले सकते। निर्णय के बिना सिस्टम अप्रभावी और अन्यायपूर्ण प्रतीत हो सकते हैं।
- उदाहरण के लिये, स्वचालित शिकायत पोर्टल जो मानव समीक्षा के बिना शिकायतों को बंद कर देते हैं, तकनीकी दक्षता के बावजूद नागरिकों को निराश कर देते हैं।
- अनुपालन न्याय की गारंटी नहीं देता: प्रक्रियाओं का पालन करना स्वचालित रूप से न्याय या समानता सुनिश्चित नहीं करता। नैतिक शासन के लिये यह मूल्यांकन करना आवश्यक है कि क्या प्रक्रियाएँ स्वयं निष्पक्ष और समावेशी हैं।
- उदाहरण के लिये, असमान सामाजिक संदर्भों पर समान नियम लागू करना असमानता को कम करने के बजाय बढ़ा सकता है।
दक्षता और मूल्यों के बीच तालमेल
- नैतिक दिशा के साथ दक्षता: प्रक्रियात्मक दक्षता प्रशासनिक क्षमता और गति बढ़ाती है, लेकिन नैतिक मूल्य इसके प्रयोग को दिशा तथा उद्देश्य प्रदान करते हैं।
- जब दक्षता ईमानदारी और निष्पक्षता से मार्गदर्शित होती है तो परिणाम केवल लक्ष्यों की प्राप्ति तक सीमित नहीं रहते बल्कि सार्वजनिक हित के अनुरूप होते हैं।
- मानव-केंद्रित सेवा वितरण: सहानुभूति और गरिमा जैसे मूल्य यह सुनिश्चित करते हैं कि दक्ष प्रणाली हमेशा जन-केंद्रित बनी रहे।
- तकनीक और सुव्यवस्थित प्रक्रियाएँ जब करुणा के साथ मिलती हैं तो शासन यांत्रिक नहीं बल्कि उत्तरदायी बनता है।
- निष्पक्ष और संगत निर्णय-निर्माण: नैतिक मूल्य यह सुनिश्चित करते हैं कि कुशल प्रक्रियाएँ मनमानी या बहिष्कारी न बनें।
- निष्पक्षता और तटस्थता सामाजिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए नियमों को समान रूप से लागू करने में सहायता करती हैं, जिससे सार्वजनिक विश्वास मज़बूत होता है।
- ज़िम्मेदार उत्तरदायित्व के माध्यम से विश्वास: दक्षता प्रत्युत्तर क्षमता को बढ़ाती है, लेकिन ईमानदारी और पारदर्शिता में निहित उत्तरदायित्व विश्वास बनाता है।
- जब प्रशासन परिणामों की ज़िम्मेदारी स्वीकार करता है और त्रुटियों को सुधारता है तो दक्षता विश्वसनीयता एवं वैधता में बदल जाती है।
निष्कर्ष:
प्रशासन में सार्वजनिक विश्वास मूलतः मूल्य-आधारित आचरण पर आधारित होता है, जबकि प्रक्रियात्मक दक्षता आवश्यक लेकिन अपर्याप्त शर्त है। ईमानदारी, सहानुभूति, निष्पक्षता और उत्तरदायित्व शासन को मानवीय बनाते हैं तथा राज्य सत्ता को नैतिक वैधता प्रदान करते हैं। सतत विश्वास तब निर्मित होता है जब प्रशासन केवल कुशल नहीं बल्कि सही ढंग से कार्य करता है, जैसा कि अरस्तू ने कहा था—’कानून वही है जो तर्कपूर्ण हो और भावनाओं से मुक्त हो।’