• प्रश्न :

    प्रश्न: डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरी है। भारत द्वारा सामना की जाने वाली प्रमुख साइबर सुरक्षा चुनौतियों की चर्चा कीजिये तथा उनसे निपटने के लिये उठाए गए संस्थागत, तकनीकी और कानूनी उपायों का आकलन कीजिये। (250 शब्द)

    14 Jan, 2026 सामान्य अध्ययन पेपर 3 आंतरिक सुरक्षा

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण: 

    • उत्तर की शुरुआत इस तर्क को रेखांकित करके कीजिये कि साइबर सुरक्षा एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरकर सामने आई है।
    • मुख्य भाग में भारत द्वारा सामना की जाने वाली प्रमुख साइबर सुरक्षा चुनौतियों की चर्चा कीजिये।
    • इसके बाद इन चुनौतियों से निपटने के लिये अपनाए गए संस्थागत, तकनीकी और कानूनी उपायों का आकलन कीजिये।
    • अंत में इन संस्थागत, तकनीकी और कानूनी उपायों को मज़बूत बनाने के लिये सुझाव दीजिये।
    • तद्नुसार उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय: 

    साइबर सुरक्षा डिजिटल युग में राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरी है, क्योंकि शासन, अर्थव्यवस्था और रक्षा अब तेज़ी से डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर होती जा रही हैं।

    • जैसे कि पावर ग्रिड पर साइबर हमले (उदाहरण के लिये, मुंबई), वित्तीय प्रणालियाँ और सरकारी डेटाबेस (जैसे AIIMS रैनसमवेयर हमला) यह दिखाते हैं कि साइबर खतरें पारंपरिक खतरों जितनी ही गंभीरता से राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।

    मुख्य भाग:

    भारत के समक्ष विद्यमान प्रमुख साइबर सुरक्षा चुनौतियाँ

    • बढ़ती वित्तीय धोखाधड़ी: भारत में फिशिंग, रैनसमवेयर और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में तीव्र वृद्धि देखी गई है, जो व्यक्तियों एवं संस्थाओं को लक्षित करती हैं। ये अपराध कम साइबर जागरूकता और तेज़ी से हो रहे डिजिटलीकरण का लाभ उठाते हैं।
      • उदाहरण के लिये, वित्तीय वर्ष 2023–24 में भारत में 13.4 लाख से अधिक UPI धोखाधड़ी के मामले दर्ज किये गए, जिनमें ₹1,087 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ, जो UPI प्रणाली के मुख्यधारा में आने के बाद सबसे उच्च स्तर है।
      • यह खतरा ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम के बढ़ते मामलों के साथ और गंभीर हो गया है, जिसमें धोखेबाज़ कानून-व्यवस्था या नियामक अधिकारियों का झूठा परिचय देकर पीड़ितों को मानसिक दबाव में डालकर धन हस्तांतरित करवाते हैं।
    • महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना पर निरंतर खतरा: पावर ग्रिड, टेलिकॉम नेटवर्क, परिवहन प्रणाली और स्वास्थ्य अवसंरचना तेज़ी से डिजिटलीकृत हो रही हैं, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा नहीं है। एक सफल साइबर हमला प्रणालीगत विघटन उत्पन्न कर सकता है।
      • उदाहरण के लिये, RedEcho, एक हैकर समूह ने वर्ष 2021 में भारत की 10 पावर सेक्टर कंपनियों और 2 बंदरगाहों पर हमला किया।
    • राज्य-प्रायोजित साइबर जासूसी और युद्ध: भारत को शत्रुतापूर्ण राज्य और गैर-राज्य गतिविधियों से खतरा है, जो साइबर जासूसी, डेटा चोरी और रणनीतिक प्रणालियों को नुकसान पहुँचाने में संलग्न हैं।
      • वर्ष 2025 में कथित रूप से पाकिस्तान आधारित एक साइबर हमलावर समूह ने भारतीय सरकारी वेबसाइटों से संवेदनशील डेटा एक्सेस करने की ज़िम्मेदारी ली, जिससे गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएँ उत्पन्न हुईं।
    • साइबर कौशल की कमी और संस्थागत क्षमता में अंतर: प्रशिक्षित साइबर सुरक्षा पेशेवरों की कमी और राज्यों में असमान क्षमता रोकथाम तथा प्रतिक्रिया तंत्रों को कमज़ोर बनाती है।
      • हालाँकि 33 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में साइबर फॉरेंसिक लैबों की स्थापना की गई है तथा 24,600 से अधिक पुलिस अधिकारियों, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है, फिर भी उपकरणों एवं विशेषज्ञता का असमान वितरण स्थानीय स्तर पर बना हुआ है। इससे विशेष रूप से छोटे ज़िलों में फॉरेंसिक जाँच में देरी या सतही जाँच होने की समस्या उत्पन्न होती है।

    साइबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने हेतु उपाय

    उपाय

                      प्रगति

    बिंदु जो अब भी बने हुए हैं

    संस्थागत उपाय (CERT-In, भारत का राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र, पुलिस में साइबर सेल)


    समर्पित साइबर गवर्नेंस ढाँचा, तीव्र घटना प्रतिक्रिया और सलाह, बेहतर स्थिति-जागरूकता, विशेषज्ञ साइबर सेल्स से जाँच क्षमता में वृद्धि

    एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी; राज्यों में असमान क्षमता; प्रशिक्षित साइबर कर्मियों की कमी; सीमित वास्तविक समय डेटा साझा करना

    तकनीकी उपाय (सुरक्षित DPI, AI आधारित खतरा पहचान, स्वदेशीकरण, साइबर फॉरेंसिक)

    साइबर अनुकूलन में सुधार, AI/ML का उपयोग करके शुरुआती खतरा पहचान, विदेशी हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर पर निर्भरता में कमी, मज़बूत फॉरेंसिक और नेटवर्क सुरक्षा क्षमता

    उच्च कार्यान्वयन लागत; तकनीक का जल्दी पुराना होना; MSME और राज्यों में सीमित अपनाना; उन्नत साइबर तकनीकों में कौशल अंतर

    कानूनी और नीति उपाय (IT अधिनियम, DPDP अधिनियम, क्षेत्रीय दिशा-निर्देश)

    स्पष्ट डेटा सुरक्षा मानदंड; अनिवार्य उल्लंघन रिपोर्टिंग; बिचौलियों की बढ़ी हुई जवाबदेही तथा वैश्विक साइबर मानदंडों के साथ संरेखण जारी

    प्रवर्तन चुनौतियाँ; विनियामक ओवरलैप; स्टार्टअप पर अनुपालन बोझ; AI-संचालित धोखाधड़ी जैसे उभरते खतरे के पीछे कानून का पिछड़ना

    साइबर सुरक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करने हेतु सुझाव

    • संस्थागत उपायों को सुदृढ़ करना: केंद्र, राज्य और क्षेत्रीय साइबर एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ किया जाए तथा स्थानीय स्तर पर साइबर अपराध इकाइयों का विस्तार किया जाए।
      • नियमित साइबर सुरक्षा ऑडिट और संयुक्त साइबर अभ्यासों से तैयारी तथा प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार किया जा सकता है।
    • तकनीकी उपायों को आगे बढ़ाना: स्वदेशी साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकियों, एन्क्रिप्शन मानकों और सुरक्षित हार्डवेयर निर्माण में निवेश किया जाए।
      • AI-आधारित खतरा खुफिया प्रणाली और रियल-टाइम निगरानी तंत्र का अधिक उपयोग आवश्यक है।
    • कानूनी एवं नीतिगत उपायों में सुधार: डीपफेक और AI-सक्षम हमलों जैसे उभरते खतरों से निपटने हेतु साइबर कानूनों को अद्यतन किया जाए।
      • डेटा संरक्षण के प्रवर्तन को सुदृढ़ किया जाए, साइबर अपराधों में क्षेत्राधिकार को स्पष्ट किया जाए तथा साइबर मानदंडों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाए।

    निष्कर्ष

    डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के भरोसे का अभिन्न हिस्सा है। यद्यपि भारत ने संस्थागत, तकनीकी और कानूनी स्तर पर महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं, फिर भी बदलते खतरों के मद्देनज़र एक सुदृढ़ तथा सुरक्षित साइबर इकोसिस्टम सुनिश्चित करने के लिये निरंतर क्षमता-विकास, कानूनी सुधार और तकनीकी नवाचार की आवश्यकता है।