प्रश्न. सुदृढ़ कॉरपोरेट प्रशासन किस प्रकार नैतिक व्यावसायिक आचरण तथा संगठनों की दीर्घकालिक संवहनीयता में योगदान देता है? उपयुक्त उदाहरणों सहित उत्तर स्पष्ट कीजिये। (150 शब्द)
उत्तर :
हल करने का दृष्टिकोण:
- अपने उत्तर की शुरुआत सुदृढ़ कॉर्पोरेट प्रशासन के तत्त्वों को उज़ागर करते हुए कीजिये।
- यह किस प्रकार नैतिक व्यावसायिक आचरणों और दीर्घकालिक संवहनीयता में योगदान देता है, यह स्पष्ट कीजिये।
- उचित निष्कर्ष लिखिये।
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परिचय:
सुशासन से तात्पर्य नियमों, आचरणों और प्रक्रियाओं के एक ऐसे ढाँचे से है जिसके माध्यम से किसी निगम का संचालन और नियंत्रण किया जाता है।
- इसमें पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्षता, नैतिक आचरण और हितधारकों के प्रति ज़िम्मेदारी शामिल है।
- कॉर्पोरेट घोटालों, जलवायु जोखिमों और हितधारकों की बढ़ती अपेक्षाओं से चिह्नित इस युग में, मज़बूत कॉर्पोरेट प्रशासन नैतिक व्यावसायिक आचरण और दीर्घकालिक संगठनात्मक संवहनीयता सुनिश्चित करने के लिये केंद्रीय बन गया है।
मुख्य भाग:
बेहतर व्यावसायिक प्रशासन नैतिक व्यावसायिक आचरणों को कैसे सुनिश्चित करता है:
- निर्णय लेने में पारदर्शिता: यह वित्तीय विवरणों, बोर्ड के निर्णयों और जोखिमों के पारदर्शी प्रकटीकरण को सुनिश्चित करता है, निवेशकों एवं हितधारकों को सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है और संगठन में दीर्घकालिक विश्वास का निर्माण करता है।
- प्रबंधन की जवाबदेही: भूमिकाओं और ज़िम्मेदारियों का स्पष्ट आवंटन यह सुनिश्चित करता है कि प्रबंधन अपने कार्यों एवं प्रदर्शन के लिये जवाबदेह हो।
- प्रदर्शन मूल्यांकन, लेखापरीक्षा और बोर्ड की निगरानी जैसी व्यवस्थाएँ सत्ता के केंद्रीकरण को रोकती हैं तथा कुप्रबंधन के जोखिम को कम करती हैं ।
- शेयरधारकों और हितधारकों के हितों की सुरक्षा: सुशासन शेयरधारकों के हितों को कर्मचारियों, ग्राहकों, लेनदारों और समग्र रूप से समाज के हितों के साथ संतुलित करता है।
- यह अल्पसंख्यक शेयरधारकों की सुरक्षा, निष्पक्ष व्यवहार और न्यायसंगत निर्णय लेने को सुनिश्चित करता है, जिससे नियंत्रणकारी हितों के प्रभुत्व को रोका जा सके।
- संचालन में नैतिक नेतृत्व और सत्यनिष्ठा: नैतिक आचरण कॉर्पोरेट प्रशासन की नैतिक नींव का निर्माण करता है।
- आचार संहिता, व्हिसलब्लोअर तंत्र और हितों के टकराव से संबंधित नीतियाँ प्रबंधन के सभी स्तरों पर ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और नैतिक निर्णय लेने को बढ़ावा देती हैं।
- प्रभावी बोर्ड संरचना और स्वतंत्रता: स्वतंत्र निदेशकों से युक्त एक सुव्यवस्थित बोर्ड निष्पक्षता, रणनीतिक निरीक्षण और जोखिम निगरानी को बढ़ाता है।
- स्वतंत्र निदेशक हितधारकों के हितों की रक्षा करने और निष्पक्ष शासन सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- नियामक अनुपालन और दीर्घकालिक मूल्य सृजन: SEBI जैसी संस्थाओं द्वारा निर्धारित विधिक और नियामक ढाँचों और OECD के कॉर्पोरेट प्रशासन सिद्धांतों जैसे वैश्विक मानकों का पालन करने से अल्पकालिक लाभ को अधिकतम करने के बजाय संवहनीयता, निवेशक विश्वास और सतत दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित होता है।
यह संगठनों की दीर्घकालिक संवहनीयता कैसे सुनिश्चित करता है:
- दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और जोखिम प्रबंधन सुनिश्चित करता है: सुदृढ़ कॉर्पोरेट प्रशासन विवेकपूर्ण वित्तीय प्रथाओं, मज़बूत आंतरिक नियंत्रणों और जोखिम मूल्यांकन तंत्रों को बढ़ावा देता है, जिससे कंपनियों को आर्थिक आघातों का सामना करने में मदद मिलती है।
- उदाहरण: HDFC बैंक जैसी कंपनियों ने मज़बूत कॉर्पोरेट प्रशासन, प्रभावी जोखिम प्रबंधन और संरक्षणात्मक ऋण प्रथाओं के कारण वित्तीय संकटों के दौरान स्थिरता बनाए रखी।
- निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है और पूंजी तक पहुँच सुनिश्चित करता है: पारदर्शी शासन और जवाबदेही सूचना विषमता और संभावित जोखिम को कम करके दीर्घकालिक निवेशकों को आकर्षित करते हैं।
- उदाहरण: मज़बूत शासन मानकों वाले निगम लगातार विदेशी संस्थागत निवेश को आकर्षित करते हैं, जैसा कि सुशासित भारतीय ब्लू-चिप कंपनियों में देखा गया है।
- नैतिक आचरण तथा प्रतिष्ठात्मक स्थिरता को प्रोत्साहित करता है: नैतिक शासन ढाँचे धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार तथा प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाने वाले कारकों को रोकते हैं, जो दीर्घकालिक मूल्य को क्षीण कर सकते हैं।
- उदाहरण: टाटा समूह की नैतिक आचार-संहिता ने एक शताब्दी से अधिक समय तक लोक-विश्वास को बनाए रखा है, जिससे संकटों के दौरान भी ब्रांड की विश्वसनीयता सुदृढ़ रही है।
- अनुकूलन क्षमता और दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टि को बढ़ाता है: सुदृढ़ रूप से शासित संगठन अल्पकालिक लाभ के स्थान पर दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे वे प्रौद्योगिकीय, नियामक तथा बाज़ारगत परिवर्तनों के अनुरूप स्वयं को अधिक प्रभावी ढंग से अनुकूलित कर पाते हैं।
- उदाहरण: ESG अनुपालन तथा नवीकरणीय प्रौद्योगिकियों में प्रारंभिक निवेश करने वाली कंपनियों ने वैश्विक संवहनीयता संक्रमण के परिप्रेक्ष्य में प्रतिस्पर्द्धात्मक बढ़त अर्जित की है।
- प्रणालीगत विफलताओं तथा कॉर्पोरेट घोटालों की रोकथाम करता है: प्रभावी बोर्ड पर्यवेक्षण, स्वतंत्र लेखा-परीक्षण तथा व्हिसल-ब्लोअर तंत्र उन शासन विफलताओं की संभावना को कम करते हैं, जो संगठन के अस्तित्व के लिये खतरा उत्पन्न कर सकती हैं।
- उदाहरण: सत्यम जैसे निगमों का पतन इस बात को उज़ागर करता है कि कमज़ोर शासन व्यवस्था दीर्घकालिक संवहनीयता को कैसे क्षीण कर सकती है।
- हितधारकों के विश्वास तथा सामाजिक वैधता को सुदृढ़ करता है: शेयरधारकों, कर्मचारियों, उपभोक्ताओं और समाज के हितों को संतुलित करके, कॉर्पोरेट प्रशासन समावेशी विकास और सामाजिक स्वीकृति को बढ़ावा देता है।
निष्कर्ष:
सुदृढ़ कॉर्पोरेट प्रशासन सतत व्यवसाय की नैतिक और संस्थागत आधार के रूप में कार्य करता है। पारदर्शिता, उत्तरदायित्व तथा ज़िम्मेदार नेतृत्व को प्रोत्साहित करते हुए यह सुनिश्चित करता है कि संगठन केवल लाभप्रदता का अनुसरण ही न करें, बल्कि सामाजिक विश्वास और दीर्घकालिक प्रत्यास्थता को भी बनाए रखें। निरंतर अधिक जटिल और परस्पर संबद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था में, मज़बूत कॉर्पोरेट प्रशासन केवल वांछनीय नहीं, बल्कि सतत और नैतिक व्यवसायिक वृद्धि के लिये अनिवार्य है।