प्रश्न. “बदलती वैश्विक भू-राजनीति के बीच भारत और रूस के संबंध निरंतर विकसित हो रहे हैं।” समकालीन भारत-रूस संबंधों के रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक आयामों का विश्लेषण कीजिये। (250 शब्द)
उत्तर :
हल करने का दृष्टिकोण:
- यूक्रेन संघर्ष के बाद हाल ही में लिये गए संतुलित रुख पर प्रकाश डालते हुए अपने उत्तर की शुरुआत कीजिये।
- भारत-रूस संबंधों के आयामों की व्याख्या करते हुए उनके महत्त्व का विश्लेषण कीजिये।
- उन समस्याओं का उल्लेख कीजिये, जो अभी भी बनी हुई हैं।
- ऐसे उपाय प्रस्तावित कीजिये जिनसे भारत-रूस संबंधों को और मज़बूत किया जा सके।
- तदनुसार उचित निष्कर्ष दीजिये।
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परिचय:
भारत-रूस संबंध दीर्घकालिक रणनीतिक विश्वास पर आधारित हैं, लेकिन यूक्रेन संघर्ष के बाद बदलती वैश्विक भू-राजनीति के मद्देनज़र इन्हें नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय परिवेश में बदलाव के बावजूद भारत और रूस रणनीतिक, आर्थिक एवं भू-राजनीतिक क्षेत्रों में व्यावहारिक रूप से सहयोग करना जारी रखे हुए हैं। यह संबंध भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की आकांक्षा को दर्शाता है, न कि गठबंधन की।
मुख्य भाग:
रणनीतिक आयाम:
- रक्षा साझेदारी: भारत के लगभग 60-70% पुराने सैन्य प्लेटफॉर्म रूसी मूल के हैं, जो पुर्ज़ों, रखरखाव और उन्नयन में निरंतर सहयोग सुनिश्चित करते हैं।
- उन्नत रक्षा प्रणालियाँ: बाह्य दबावों के बावजूद भारत द्वारा S-400 ट्रायंफ वायु रक्षा प्रणाली का अधिग्रहण पारस्परिक रणनीतिक विश्वास को रेखांकित करता है।
- संयुक्त उत्पादन: ब्रह्मोस मिसाइल जैसी परियोजनाएँ अमेरिकी सौदों के विपरीत क्रेता-विक्रेता संबंध के बजाय सह-विकास को दर्शाती हैं।
- परमाणु ऊर्जा सहयोग: रूस कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना में एक प्रमुख भागीदार है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान दे रहा है।
आर्थिक आयाम:
- द्विपक्षीय व्यापार: द्विपक्षीय व्यापार में तेज़ी से वृद्धि हुई है और वित्त वर्ष 2024-25 में यह रिकॉर्ड 68.7 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है।
- ऊर्जा व्यापार में वृद्धि: रूस भारत के शीर्ष कच्चे तेल आपूर्तिकर्त्ताओं में से एक बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2020 में कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी मात्र 1.7% थी, जो सत्र 2023-24 में बढ़कर 40% हो गई और अब यह भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्त्ता है।
- कनेक्टिविटी पहल: अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का उद्देश्य भारत और यूरेशिया के बीच माल ढुलाई के समय को कम करना है।
- चेन्नई और व्लादिवोस्तोक (रूस) के बीच पूर्वी समुद्री गलियारे के हालिया शुभारंभ ने शिपिंग टाइम और लागत को कम करके भारत-रूस व्यापार को बढ़ावा दिया है।
- मुद्रा निपटान के प्रयास: प्रतिबंधों से उत्पन्न बाधाओं से बचने के लिये रुपये–रूबल व्यापार तंत्र की संभावनाओं का अन्वेषण किया जा रहा है।
भू-राजनीतिक आयाम
- बहुध्रुवीय अभिसरण: दोनों देश बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और वैश्विक संस्थानों में सुधार का समर्थन करते हैं।
- बहुपक्षीय मंच: BRICS, SCO और RIC में सहयोग से भारत के राजनयिक क्षेत्र में विस्तार होता है।
बदलती वैश्विक भू-राजनीति के बीच मतभेद के प्रमुख क्षेत्र:
- आर्थिक असमानता: भारत का रूस से आयात सत्र 2024-25 में लगभग 64 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जबकि इसका निर्यात 5 अरब डॉलर से कम रहा, जिससे एक भारी, अस्थिर व्यापार घाटा उत्पन्न हो गया।
- लेन-देन में बाधाएँ: SWIFT प्रणाली पर पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रुपये–रूबल भुगतान व्यवस्था अनियमित हो गयी है, जिससे अरबों रुपये ‘फँसे’ हुए हैं और निपटान में विलंब हो रहा है।
- रूस-चीन रणनीतिक अभिसरण: चीन के साथ रूस की ‘असीमित’ सैन्य एवं तकनीकी साझेदारी भारत के लिये चिंता का विषय है, विशेषकर तब जब भारत–चीन सीमा तनाव बना हुआ है।
- समुद्री प्रभाव: उत्तरी समुद्री मार्ग में रूस की रुचि और चीन के साथ आर्कटिक सहयोग, भारत के हिंद-प्रशांत क्षेत्र एवं क्वाड पर केंद्रित दृष्टिकोण के विपरीत है।
भारत-रूस संबंधों को सुदृढ़ करने के प्रमुख उपाय
- रणनीतिक एवं रक्षा सहयोग का विस्तार: भारत और रूस को संयुक्त उत्पादन, प्रौद्योगिकी अंतरण एवं दीर्घकालिक रख-रखाव साझेदारी के माध्यम से रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करना जारी रखना चाहिये।
- ब्रह्मोस एयरोस्पेस जैसी मेक इन इंडिया से जुड़ी संयुक्त उद्यमों का विस्तार करने से रणनीतिक विश्वास को बनाए रखते हुए भारत की आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
- तेल से परे ऊर्जा साझेदारी का विस्तार: ऊर्जा सहयोग को कच्चे तेल के व्यापार से आगे बढ़कर प्राकृतिक गैस, परमाणु ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा को भी शामिल करना होगा।
- दीर्घकालिक LNG अनुबंध, आर्कटिक ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग और कुडनकुलम में परमाणु रिएक्टरों का विस्तार स्थिर एवं विविध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है।
- व्यापार और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करना: भारत को फार्मास्यूटिकल्स, IT सेवाओं, चाय, वस्त्र और कृषि उत्पादों के लिये अधिक बाजार अभिगम्यता सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिये। भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) मुक्त व्यापार समझौते का शीघ्र समापन व्यापार वृद्धि को संस्थागत रूप देने तथा असंतुलन को दूर करने में सहायक हो सकता है।
- कनेक्टिविटी और भुगतान तंत्र में सुधार: रुपये-रूबल व्यापार, वोस्त्रो एकाउंट्स और डिजिटल सेटलमेंट्स जैसे वैकल्पिक भुगतान तंत्र को सुदृढ़ करने से प्रतिबंधों से संबंधित व्यवधानों को कम किया जा सकता है तथा द्विपक्षीय व्यापार में वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है।
निष्कर्ष:
आज भारत-रूस संबंध व्यावहारिकता, निरंतरता और रणनीतिक स्वायत्तता से निर्देशित हो रहे हैं। वैश्विक भू-राजनीति नई चुनौतियाँ पेश करती है, लेकिन रक्षा, ऊर्जा और बहुपक्षीय मंचों पर निरंतर जुड़ाव यह सुनिश्चित करता है कि साझेदारी प्रासंगिक एवं सुदृढ़ बनी रहे।