• प्रश्न :

    प्रश्न. CRISPR आधारित जीन थेरेपी केवल एक दशक में ही प्रयोगशाला अनुसंधान से नैदानिक ​​अनुप्रयोग तक पहुँच गई है। इस थेरेपी के पीछे के वैज्ञानिक तंत्र पर चर्चा कीजिये तथा हाल के वैश्विक नैदानिक परिणामों के आधार पर इसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिये। (250 शब्द)

    10 Dec, 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 3 विज्ञान-प्रौद्योगिकी

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • CRISPR-Cas9 तकनीक का संक्षिप्त परिचय दें और उपचारों में इसके महत्त्व को बताइये।
    • मुख्य भाग में वैज्ञानिक तंत्र पर चर्चा कीजिये और इसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिये।
    • सीमाओं और चुनौतियों को स्पष्ट रूप से पहचानिये एवं भविष्य में सुधार व विकास के लिये संभावित मार्ग सुझाइये।
    • तद्नुसार निष्कर्ष लिखिये।

    परिचय:

    खोज के केवल एक दशक में CRISPR-Cas9 तकनीक प्रयोगशाला के जीनोम-संपादन उपकरण से विकसित होकर सिकल सेल रोग जैसी आनुवंशिक बीमारियों के लिये क्लिनिकली अनुमोदित उपचार बन गई है।

    कैसगेवी (Casgevy) जैसे उपचारों की स्वीकृति आधुनिक चिकित्सा में एक परिवर्तनकारी क्षण है, जो यह दर्शाता है कि सटीक जीन संपादन रोग पैदा करने वाले म्यूटेशन को उनके जैविक स्रोत पर सुधार या रोक सकता है।

    मुख्य भाग:

    CRISPR-आधारित थेरेपी का वैज्ञानिक तंत्र

    • CRISPR-Cas9 एक सटीक "आणविक कैंची" की तरह कार्य करता है, जो वैज्ञानिकों को जीवित कोशिका के भीतर विशिष्ट DNA स्ट्रैंड को खोजने और संपादित करने की सुविधा देता है।
      • टारगेट की पहचान (गाइड): वैज्ञानिक एक सिंथेटिक गाइड RNA (gRNA) डिज़ाइन करते हैं जो उस खराब/दोषपूर्ण जीन के DNA अनुक्रम से विशेष रूप से सुमेलित है जिसे वे ठीक करना चाहते हैं।
      • सटीक कटाई (The Scissors): gRNA Cas9 एंज़ाइम (अणुकीय कैंची) को DNA स्ट्रैंड पर सही स्थान पर निर्देशित करता है, जहाँ Cas9 दोनों DNA स्ट्रैंड को काटने का कार्य करता है।
      • कोशिकीय मरम्मत सक्रियण (Cellular Repair Activation): जब DNA में कट आता है, तो कोशिका इसे तुरंत पहचानती है और अपने प्राकृतिक मरम्मत तंत्र (जैसे- नॉन-होमोलॉगस एंड जॉइनिंग या होमोलॉजी-डायरेक्टेड रिपेयर) को सक्रिय करके DNA को सही कर देती है।
      • जीन सुधार (Gene Correction): इस मरम्मत प्रक्रिया के दौरान, कोशिका या तो दोषपूर्ण जीन को निष्क्रिय कर देती है या वैज्ञानिकों द्वारा दिया गया स्वस्थ DNA टेम्पलेट जोड़ देती है, जिससे आनुवंशिक त्रुटि स्थायी रूप से सुधर जाती है।

    वैश्विक क्लिनिकल परिणामों के आधार पर प्रभावकारिता का मूल्यांकन

    • रक्तविज्ञान (रुधिर) – "सक्रिय उपचार" प्राप्त: CRISPR-आधारित चिकित्सा, विशेष रूप से कैसगेवी (Casgevy), ने सिकल सेल डिज़ीज़ (SCD) और रक्तांतरण-निर्भर β-थैलेसीमिया (TDT) दोनों में उल्लेखनीय चिकित्सीय सफलता दिखाई है।
      • SCD (सिकल सेल रोग) परीक्षणों में, 90% से अधिक उपचारित मरीज़ों में वासो-ऑक्लूसिव संकट (VOCs) पूरी तरह समाप्त हो गए।
    • हृदय और रक्त वाहिनी रोग: आशाजनक लेकिन सुरक्षा पर निगरानी आवश्यक
      • कोलेस्ट्रॉल (VERVE-101): यह LDL-C (खराब कोलेस्ट्रॉल) को कम करने की क्षमता दिखा चुका है।
      • परिणाम: कोलेस्ट्रॉल कम करने में प्रभावी होने के बावजूद, परीक्षणों की सुरक्षा (सुरक्षा संकेत, जैसे उच्च जोखिम वाले हृदय रोगी में प्रतिकूल घटनाएँ) को लेकर समीक्षा की गई है।

    सीमाएँ और चिंताएँ

    • ऑफ-टारगेट प्रभाव: अनचाहे बदलाव लंबे समय तक सुरक्षा के लिये चिंता का विषय बने हुए हैं।
    • वितरण बाधाएँ: मस्तिष्क और हृदय जैसे अंगों तक प्रभावी वितरण अभी भी सीमित है।
    • प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएँ: Cas प्रोटीन प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर सकती है।
    • नैतिक चिंताएँ: गर्मलाइन संपादन और “डिज़ाइनर बेबी” जैसी संभावनाओं को लेकर भय मौजूद है।

    CRISPR-Cas9 तकनीक हेतु भविष्य का मार्ग

    • सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करना: लंबे समय तक निगरानी, वैश्विक नैतिक दिशा-निर्देश और ऑफ-टारगेट प्रभावों के कड़े मूल्यांकन के माध्यम से सुरक्षा सुनिश्चित करना।
    • वितरण तकनीकों में सुधार: उन्नत वायरल वेक्टर और लिपिड नैनोपार्टिकल जैसी तकनीकों का उपयोग करके अंग-विशिष्ट एवं प्रभावी जीन एडिटिंग सुनिश्चित करना।
    • सुलभता और वहनीय बनाने पर ध्यान: सार्वजनिक–निजी भागीदारी, स्तरित मूल्य निर्धारण तथा घरेलू निर्माण क्षमता को बढ़ावा देकर CRISPR थैरेपी को अधिक लोगों तक पहुँचाना।
    • जटिल रोगों पर अनुसंधान निवेश: CRISPR के उपयोग को एकल-जन्य रोगों से बढ़ाकर कैंसर, तंत्रिका-विकृति तथा मेटाबोलिक जैसे जटिल रोगों तक विस्तारित करना।

    निष्कर्ष:

    CRISPR उपचारों ने “एक ही बार में इलाज” की संभावना उत्पन्न की है, लेकिन इनके पूरे सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिये सुरक्षित तैयारी के तरीके, लागत कम करना और वैश्विक स्तर पर समान रूप से वितरण सुनिश्चित करना आवश्यक है।