• प्रश्न :

    प्रश्न.“करुणा से रहित नवोन्मेष शोषण को जन्म देता है।” कृत्रिम बुद्धिमत्ता, निगरानी तकनीकों तथा डिजिटल एकाधिकारों के युग में तकनीकी रूप से विकसित राष्ट्रों को डिजिटल उपनिवेशीकरण की प्रवृत्ति रोकने तथा विश्व-स्तर पर न्यायसंगत तकनीकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये कौन-से नैतिक सिद्धांतों का पालन करना चाहिये? (150 शब्द)

    27 Nov, 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • करुणा से रहित नवोन्मेष के विचार की व्याख्या कीजिये तथा डिजिटल उपनिवेशवाद से इसकी प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिये।
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता, निगरानी और डिजिटल एकाधिकार में प्रमुख नैतिक चिंताओं का अभिनिर्धारण कीजिये। 
    • तकनीकी रूप से उन्नत देशों को जिन नैतिक सिद्धांतों (समता, पारदर्शिता, डेटा सॉवरेनिटी तथा उत्तरदायित्व) का पालन करना चाहिये, उनकी रूपरेखा प्रस्तुत कीजिये।  
    • एक न्यायपूर्ण डिजिटल भविष्य के लिये करुणापूर्ण, मानव-केंद्रित और समावेशी तकनीकी विकास का महत्त्व बताते हुए उचित निष्कर्ष दीजिये। 

    परिचय:  

    कथन— “करुणा से रहित नवोन्मेष शोषण को जन्म देता है।” आज के डिजिटल युग में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), निगरानी उपकरण तथा प्लेटफॉर्म एकाधिकार वैश्विक शक्ति-संरचनाओं को आकार दे रहे हैं। यद्यपि प्रौद्योगिकी अवसरों का लोकतंत्रीकरण कर सकती है, परंतु इसका अनियमित और लाभ-प्रेरित प्रयोग ‘डिजिटल उपनिवेशवाद’ के नये रूप उत्पन्न कर सकता है, जिसमें तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्र कम विकसित देशों में निर्णय-निर्माण, डेटा फ्लो तथा डिजिटल अवसंरचना पर प्रभुत्व स्थापित कर लेते हैं।

    मुख्य भाग: 

    डिजिटल उपनिवेशीकरण: उभरती नैतिक चिंताएँ

    • AI पक्षपात और एल्गोरिदम असमानता: पश्चिमी या प्राइवेट डेटासेट पर प्रशिक्षित AI मॉडल प्रायः नस्लीय, लैंगिक तथा सांस्कृतिक पूर्वाग्रहों को प्रतिबिंबित करते हैं।
      • उदाहरण: चेहरे की पहचान प्रणालियाँ अफ्रीकी तथा एशियाई चेहरों की पहचान में अधिक त्रुटियाँ करती हैं, जिससे भेदभावपूर्ण पुलिसिंग तथा निगरानी को बढ़ावा मिलता है।
    • निगरानी पूंजीवाद और स्वायत्तता का क्षरण: तकनीकी दिग्गज व्यवहार और उपभोक्ता विकल्पों को प्रभावित करने के लिये डेटा एक्सट्रैक्शन का उपयोग करते हैं। 
      • उदाहरण: कैम्ब्रिज एनालिटिका प्रकरण ने यह उजागर किया कि लक्षित प्रोफाइलिंग के माध्यम से विभिन्न देशों में राजनीतिक मतों को किस प्रकार प्रभावित किया जा सकता है।
    • डिजिटल एकाधिकार और अवसंरचनात्मक निर्भरता: कुछ ही कंपनियां क्लाउड सेवाओं, ऐप स्टोर, भुगतान और सोशल मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र को नियंत्रित करती हैं।  कुछ गिनी-चुनी कंपनियाँ क्लाउड सेवाओं, ऐप स्टोर्स, भुगतान प्रणालियों तथा सोशल मीडिया इको-सिस्टम्स पर नियंत्रण रखती हैं।
      • उदाहरण: विदेशी क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर पर पर अत्यधिक निर्भर अफ्रीकी देशों को डेटा स्थानीयकरण की चुनौतियों तथा रणनीतिक स्वायत्तता के नुकसान के जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
    • अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों तक असमान अभिगम्यता: क्वांटम कंप्यूटिंग, 5G/6G तथा AI चिप्स जैसी उच्च-लागत तकनीकें कुछ उन्नत देशों तक सीमित हैं, जिससे विकासात्मक असमानताएँ और भी बढ़ती जा रही हैं।

    तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्रों द्वारा अपनाये जाने योग्य नैतिक सिद्धांत

    • मानव-केंद्रित और करुणामय नवोन्मेष: प्रौद्योगिकियों को लाभ या भू-राजनीतिक शक्ति से ऊपर मानव गरिमा, कल्याण और अधिकारों को प्राथमिकता देनी चाहिये। 
      • उदाहरण: यूरोपीय संघ का AI अधिनियम मानवीय पर्यवेक्षण पर बल देता है और सोशल स्कोरिंग जैसे हानिकारक AI प्रयोगों पर प्रतिबंध लगाता है।
    • डिजिटल जस्टिस और समानता: राष्ट्रों को ऐसी नीतियाँ अपनानी चाहिये जो प्रौद्योगिकी तक निष्पक्ष अभिगम्यता सुनिश्चित करें तथा डिजिटल विभाजन को बढ़ाने के बजाय उसे न्यूनतम करने का कार्य करें।
      • किफायती वैश्विक इंटरनेट पहलों को प्रोत्साहन
      • विकासशील देशों के साथ ओपन-सोर्स AI सॉल्यूशन्स का साझा करना।
    • पारदर्शिता और व्याख्यात्मकता: ऋण, पुलिसिंग, स्वास्थ्य सेवा जैसे सार्वजनिक जीवन को प्रभावित करने वाले एल्गोरिदम पारदर्शी एवं ऑडिट योग्य होने चाहिये।
      • उदाहरण: ओपन एल्गोरिदम ऑडिट विकासशील लोकतंत्रों में भेदभावपूर्ण AI तैनाती को रोक सकते हैं।
    • जवाबदेही और दायित्व: देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि हानिकारक प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने वाली कंपनियाँ दुरुपयोग, डेटा उल्लंघन अथवा AI-जनित क्षति के लिये जिम्मेदार हों।
      • प्रौद्योगिकी निर्यात के लिये अनिवार्य मानवाधिकार प्रभाव आकलन।
    • डेटा सॉवरेनिटी का सम्मान: विकासशील देशों को अपने नागरिकों द्वारा उत्पन्न डेटा का स्वामित्व और विनियमन करने का अधिकार होना चाहिये।
      • स्थानीय डेटा केंद्रों, संप्रभु क्लाउड अवसंरचना तथा वैश्विक मानकों (GDPR-सदृश) के अनुरूप निजता कानूनों को प्रोत्साहन किया जाना चाहिये।
    • नैतिक प्रौद्योगिकी अंतरण और निष्पक्ष सहयोग: उन्नत देशों को तकनीकी-साम्राज्यवादी प्रथाओं से बचना चाहिये और इसके बजाय क्षमता निर्माण का समर्थन करना चाहिये। 
      • उदाहरण: भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) साझेदारियाँ (UPI, CoWIN) एक सहयोगात्मक, समानता-समर्थक मॉडल का प्रदर्शन करती हैं।
    • निगरानी उपकरणों के निर्यात से बचना: स्पाइवेयर अथवा दमनकारी निगरानी उपकरणों का निर्यात वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों को क्षति पहुँचाता है।
      • Pegasus जैसे स्पाइवेयर प्रकरण सख्त निर्यात नियंत्रणों की आवश्यकता को उजागर करते हैं।

    निष्कर्ष

    न्यायसंगत डिजिटल भविष्य सुनिश्चित करने के लिये प्रौद्योगिकी को एक भू-राजनीतिक हथियार नहीं, बल्कि एक वैश्विक जनहित साधन के रूप में देखा जाना चाहिये। ध्यान केंद्रित अर्थव्यवस्था (Attention Economy) से आगे बढ़कर समानुभूति केंद्रित अर्थव्यवस्था (Empathy Economy) की ओर संक्रमण आवश्यक है, ताकि डिजिटल क्रांति अंतिम छोर के उपयोगकर्त्ता (अंत्योदय) को सशक्त कर सके।