“सत्यनिष्ठा कोई क्षणिक आचरण नहीं बल्कि जीवन के सूक्ष्म निर्णयों से विकसित होने वाली परिष्कृत प्रवृत्ति है।”
अरस्तू की सद्गुण-नैतिकता के दृष्टिकोण से यह विवेचना कीजिये कि सूक्ष्म निर्णय किस प्रकार व्यक्ति के नैतिक चरित्र का निर्माण करते हैं। (150 शब्द)
प्रश्न का उत्तर जल्द ही प्रकाशित होगा।