प्रश्न . “नैतिकता के बिना ज्ञान निरर्थक है और ज्ञान के बिना नैतिकता भयावह होती है।” विश्लेषण कीजिये कि लोक सेवा में नैतिक सच्चरित्रता और व्यावसायिक दक्षता के बीच संतुलन क्यों आवश्यक है। (150 शब्द)
उत्तर :
हल करने का दृष्टिकोण:
- लोक सेवा के संदर्भ में नैतिक सत्यनिष्ठा और व्यावसायिक क्षमता को परिभाषित कीजिये।
- लोक सेवा में इन मूल्यों के महत्त्व पर चर्चा कीजिये।
- योग्यता के बिना सत्यनिष्ठा के खतरों पर चर्चा कीजिये।
- नैतिक सत्यनिष्ठा और व्यावसायिक क्षमता के बीच संतुलन की आवश्यकता पर प्रकाश डालिये।
- आगे की राह बताते हुए उचित निष्कर्ष दीजिये।
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परिचय:
लोक सेवा में केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि नैतिक सत्यनिष्ठा/सच्चरित्रता भी आवश्यक होती है। नैतिक सत्यनिष्ठा यह सुनिश्चित करती है कि कार्य जनता के हित और मूल्यों के अनुरूप हों, जबकि व्यावसायिक दक्षता यह सुनिश्चित करती है कि दायित्वों का निर्वहन कुशलता, प्रभावशीलता और विधिसम्मत तरीक़े से हो। इन दोनों में असंतुलन या तो अक्षमता या फिर कौशल के दुरुपयोग का कारण बन सकता है।
मुख्य भाग:
नैतिक सच्चरित्रता:
- लोक सेवा में नैतिक सत्यनिष्ठा का अर्थ है कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी, निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही का पालन।
- उदाहरण: रेल मंत्री के रूप में कार्यरत लाल बहादुर शास्त्री ने एक रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दे दिया था, जो कानूनी दायित्व से परे नैतिक जवाबदेही का एक उदाहरण है।
व्यावसायिक क्षमता:
- क्षमता वह ज्ञान, कौशल और अनुभव है जो कर्त्तव्यों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिये आवश्यक है।
- उदाहरण: ‘भारत के मेट्रो मैन’ ई. श्रीधरन ने परियोजना प्रबंधन विशेषज्ञता को नैतिक नेतृत्व के साथ जोड़ते हुए परियोजनाओं को न्यूनतम लागत वृद्धि के साथ समय पर पूरा किया।
लोक सेवा में संतुलन की आवश्यकता
- योग्यता के बिना सत्यनिष्ठा: योग्यता के बिना केवल सत्यनिष्ठा ही विलंब, अकुशल नीति क्रियान्वयन और जनता के विश्वास की हानि का कारण बन सकती है।
- निष्ठा के बिना योग्यता: सत्यनिष्ठा के बिना, योग्यता का प्रयोग भ्रष्टाचार, पक्षपात और सत्ता के दुरुपयोग के लिये किये जाने का खतरा होता है।
- इस प्रकार, सत्यनिष्ठा 'क्या किया जाना चाहिये' का मार्गदर्शन करती है और योग्यता यह सुनिश्चित करती है कि 'यह कैसे किया जाना चाहिये'।
शासन में अनुप्रयोग
- नीति कार्यान्वयन: MGNREGA जैसी कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिये परिचालन दिशानिर्देशों और धन के नैतिक उपयोग का ज्ञान आवश्यक है।
- संकट प्रबंधन: आपदा राहत में, सत्यनिष्ठा सहायता के निष्पक्ष वितरण का मार्गदर्शन करती है, जबकि योग्यता त्वरित रसद व्यवस्था सुनिश्चित करने का मार्गदर्शन करती है।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: एक डिजिटल रूप से सक्षम अधिकारी सार्वजनिक वितरण प्रणालियों में भ्रष्टाचार को रोक सकता है, लेकिन सत्यनिष्ठा के बिना, डेटा हेरफेर के लिये तकनीक का दुरुपयोग किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
लोक सेवा नैतिक शक्ति और तकनीकी दक्षता का संयोजन है। अरस्तू के 'सद्गुण नैतिकता' सिद्धांत के अनुसार, उत्कृष्टता का स्थान नैतिक गुण और व्यावहारिक बुद्धिमत्ता के संतुलन में है। इस प्रकार, आदर्श लोक सेवक वह है जो सही कार्य करता है और यह भी जानता है कि सही कार्य कैसे किया जाये, जिससे शासन व्यवस्था न्यायपूर्ण तथा प्रभावी बनती है।