महासागरीय धाराओं के महत्त्व को बताइये। वैश्विक तापन की समस्या किस प्रकार समुद्री धाराओं को प्रभावित कर सकती है? (200 शब्द)
उत्तर :
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प्रश्न विच्छेद
• महासागरीय धाराओं का महत्त्व एवं इस पर वैश्विक तापन के प्रभाव की चर्चा करनी है।
हल करने का दृष्टिकोण
• महासागरीय धाराओं का सामान्य परिचय दीजिये।
• धाराओं के महत्त्व का उल्लेख कीजिये।
• धाराओं पर वैश्विक तापन के प्रभाव की चर्चा कीजिये।
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समुद्री जल के एक निश्चित सीमा और एक निश्चित दिशा में तीव्र प्रवाह को ही महासागरीय धारा कहा जाता है। इसकी उत्पत्ति मुख्यत: पवनों के तीव्र प्रवाह के कारण होती है। धाराओं की प्रकृति गर्म और ठंडी होती है। पृथ्वी पर जीवन को क्रियाशील बनाए रखने में इसका प्रमुख योगदान है।
धाराओं का महत्त्व
- पृथ्वी पर क्षैतिज ऊष्मा संतुलन स्थापित करती है। गर्म धाराएँ उष्ण कटिबंधीय उच्च तापमान को उच्च अक्षांशों तक ले जाती है।
- ठंडी धाराएँ अपने प्रवाह मार्ग-क्षेत्र के तापमान को कम कर देती हैं, जबकि गर्म धाराएँ अपने साथ आर्द्रता लाती हैं जिससे वर्षा प्राप्त होती है।
- ठंडी व गर्म धाराओं के मिलने से प्लवकों का विकास होता है। इससे कई मत्स्यन बैंकों का विकास हुआ है। ग्रांड बैंक व जॉर्जेज़ बैंक इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
- समुद्री धाराएँ जलयानों के लिये जलमार्गों को निश्चित करती हैं।
- भारतीय मानसून को निर्धारित करने में भी समुद्री जलधाराओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
वैश्विक तापन का समुद्री धाराओं पर प्रभाव
- महासागर ग्रीनहाउस प्रभाव को कम करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। महासागर में वायुमंडलीय CO2 की वृद्धि धाराओं को धीमा कर सकती है इससे थर्मोहेलाइन परिसंचरण प्रभावित होगा। इसके परिणामस्वरूप ऊष्मा के क्षैतिज संतुलन में बाधा उत्पन्न होगी जो ग्लोबल वार्मिंग को और अधिक त्वरित करेगा।
- महासागर का तापमान बढ़ने से आर्कटिक की बर्फ पिघलती है, इससे जल का घनत्व कम हो जाएगा जो थर्मोहेलाइन परिसंचरण को धीमा कर देगा।
- इससे महासागर की कार्बन सिंक क्षमता कम हो जाएगी।
उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि वैश्विक तापन से समुद्री धाराएँ कमज़ोर हो जाएंगी। सागरीय धाराओं का परिसंचरण पृथ्वी पर मानव सभ्यता के विकास का आधार है। अत: अतिशीघ्र वैश्विक तापन से निपटने की आवश्यकता है।