संसद टीवी संवाद

देश–देशांतर : भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा और कानूनी प्रावधान | 21 Jul 2018 | शासन व्यवस्था

परिचर्चा में शामिल प्रमुख बिंदु

संदर्भ एवं पृष्ठभूमि

मानव एक सामाजिक प्राणी है और समूह में रहना हमेशा से मानव की एक प्रमुख विशेषता रही है जो उसे सुरक्षा का एहसास कराती है। लेकिन आज जिस तरह से समूह एक उन्मादी भीड़ में तब्दील होते जा रहे हैं उससे हमारे भीतर सुरक्षा कम बल्कि डर की भावना बैठती जा रही है। भीड़ अपने लिये एक अलग किस्म के तंत्र का निर्माण कर रही है, जिसे आसान भाषा में हम भीड़तंत्र भी कह सकते हैं। भीड़ के हाथों लगातार हो रही हत्याएँ देश में चिंता का विषय बनता जा रहा है। आए दिन कोई-ना-कोई व्यक्ति हिंसक भीड़ का शिकार हो रहा है। 

क्या है भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा (Mob Lynching)?

जब अनियंत्रित भीड़ द्वारा किसी दोषी को उसके किये अपराध के लिये या कभी-कभी अफवाहों के आधार पर बिना अपराध किये भी उसी समय सज़ा दी जाए अथवा उसे पीट-पीट कर मार डाला जाए तो इसे भीड़ द्वारा की गई हिंसा (Mob Lynching) कहते हैं। इस तरह भीड़ द्वारा की गई हिंसा में हमेशा एक संदेश निहित होता है जो भीड़ द्वारा समाज में प्रेषित किया जाता है। इस तरह की हिंसा में किसी कानूनी प्रक्रिया या सिद्धांत का पालन नहीं किया जाता।

क्यों होती हैं ये घटनाएँ?

नॉट इन माय नेम (#NotInMyName)

(टीम दृष्टि इनपुट)

सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश

संबंधित कानूनी प्रावधान

क्यों है नए कानून की आवश्यकता?

सोशल मीडिया द्वारा अफवाहों को रोकने हेतु उठाए गए कदम

(टीम दृष्टि इनपुट)

भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा को रोकने के उपाय

आगे की राह 

निष्कर्ष: हाल-फिलहाल के दिनों में उन्मादी भीड़ द्वारा एक के बाद एक कई इंसानों की जान ले ली गई। यह एक ऐसा तंत्र है जिसकी न तो कोई विचारधारा है और न ही कोई सरोकार। वो कहीं भी किसी भी बात पर आक्रामक हो जाती है और जिस किसी से भी इसको नफरत या घृणा होती है उसे उसी वक्त सज़ा देने का फैसला कर देती है। इन घटनाओं में बढ़ोतरी होने की वज़ह लोगों के मन में बसा गुस्सा है। वह गुस्सा किस बात पर है यह मायने नहीं रखता। लोग गुस्से में हैं, नाराज़ हैं और हताश हैं लेकिन उन्हें खुद पता नहीं है कि ऐसा क्यों है। इसे कानून व्यवस्था की समस्या के तौर पर ही नहीं बल्कि समाज में बनी विसंगतियों के समाधान द्वारा ही सुलझाया जा सकता है।

इस बारे में और अधिक जानकारी के लिये इस लिंक्स पर क्लिक करें:

भीड़ द्वारा की जा रही हत्याएँ: मूल अधिकारों का चीरहरण