संसद टीवी संवाद

द बिग पिक्चर/विशेष – राफेल पर फैसला | 18 Dec 2018 | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 36 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे में कोई गड़बड़ी नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने सीबीआई में मामला दर्ज कराने और कोर्ट की निगरानी में जाँच की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। खरीद प्रक्रिया, कीमत और ऑफसेट साझेदार के मामले में सरकारी हस्तक्षेप किये जाने का कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

राफेल की कीमत

ऑफसेट साझेदार से जुड़े पहलू

क्या है लड़ाकू विमानों का सौदा और क्यों इसकी ज़रूरत पड़ी?

राफेल का चुनाव क्यों किया गया?

राफेल विमान की विशेषता

निष्कर्ष


दरअसल, पाकिस्तान और चीन से देश की सीमाओं की सुरक्षा का मामला हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। वायुसेना में पहले से ही लड़ाकू विमानों की कमी है, ऐसे में राफेल विमान भारत के लिये बहुत ही ज़रूरी है। इस विमान का उपयोग अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, लीबिया और मालदीव में हुई जंगी कार्यवाही में हो चुका है और यह काफी सफल रहा है। अगर राफेल को वायुसेना के जंगी जहाज़ों के बेड़े में शामिल किया जाता है तो इससे सेना को एक नई ताकत मिलेगी। राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सरकार और विपक्ष दोनों के लिये एक संदेश है कि रक्षा जैसे संवेदनशील मसले को बिना किसी ठोस आधार के अदालत में खींचना और राजनीतिक मुद्दा बनाना ठीक नहीं है।