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विशेष: हीट वेव और मानसून का विज्ञान | 01 Jun 2018 | जैव विविधता और पर्यावरण

संदर्भ एवं पृष्ठभूमि

देशभर में इन दिनों भीषण गर्मी कहर बरपा रही है और पहाड़ भी इससे अछूते नहीं हैं। यूँ तो ऐसी गर्मी (तापमान 42 से 48 डि.से. तक होता है) मई के मध्य से लेकर जून मध्य तक हर साल पड़ती है, जब तक कि मानसून-पूर्व की फुहारें धरती की तपिश को कम नहीं कर देतीं। लेकिन हर साल उत्तरोत्तर बढती जा रही इस गर्मी को जानकार जलवायु परिवर्तन से भी जोड़कर देखने लगे हैं। 

दूसरी ओर, इस बार मानसून ने समय से 3 दिन पहले ही केरल में दस्तक दे दी है। हर साल आने वाला यह मानसून क्यों हमारे लिये ज़रूरी है? कैसे मानसून भारत पर असर डालता है? कहाँ से और क्यों आता है यह मानसून?

मौसम और जलवायु में अंतर

(टीम दृष्टि इनपुट)

ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत और प्रभाव?

हीट वेव क्या है?

 हीट वेव एक्शन प्लान

धीरे-धीरे बढ़ रहा है पृथ्वी का औसत तापमान 
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी से आम जनजीवन बेहाल हो गया। अधिकांश स्थानों में तापमान 45 डिग्री को पार कर गया। बढ़ती गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने कई बार हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रेड अलर्ट जारी किया।

58 सालों में औसत तापमान केवल 0.5 डि.से. बढ़ा
एक अध्ययन से पता चलता है कि 1960 से अब तक भारत के औसत तापमान में केवल 0.5 डि.से. की वृद्धि हुई है, लेकिन इसका प्रभाव कहीं अधिक हुआ है। अध्ययन के अनुसार मात्र इतनी वृद्धि से ही गर्म हवाओं के प्रभाव में ढाई गुनी बढ़ोतरी हो गई अर्थात गर्मी अधिक महसूस होती है।

गर्मी के बाद मानसून; क्या है मानसून? कहाँ से और कैसे  आता है मानसून?
मानसून के आने के पूर्व भारतीय मानसूनी क्षेत्र गर्मी के प्रकोप में जकड़ा होता है। यह क्षेत्र मध्य पाकिस्तान और उससे सटे हुए भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों तक फैला रहता है। भारत के दक्षिणी छोर  (केरल का तटवर्ती क्षेत्र) में मई के अंत में अथवा जून के प्रारंभ में मानसून की वर्षा से मानसून के मौसम की शुरुआत होती है तथा देश के अधिकांश भागों में जून से सितंबर के बीच ही अधिकांश वर्षा होती है।

विदित हो कि बंगाल की खाड़ी शाखा से होने वाली वर्षा की मात्रा में पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर क्रमशः कमी आती है। साथ ही प्रायद्वीपीय भारत में अरब सागर की शाखा के द्वारा होने वाली वर्षा की मात्रा में पश्चिम से पूर्व की ओर जाने पर कमी आती हैl

मानसूनी हवाएँ 

लौटते मानसून की वर्षा 

(टीम दृष्टि इनपुट)

भारत की जीवन रेखा है मानसून

मानसून मिशन मॉडल 
पहली बार भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 2017 में मानसूनी वर्षा के संचालन संबंधी मौसमी पूर्वानुमान के लिये मानसून मिशन मॉडल का उपयोग किया।

मानसून मिशन मॉडल क्या है?

मानसून मिशन मॉडल का उद्देश्य
मानसून मिशन का उद्देश्य हर समय और हर स्तर पर  देश के विभिन्न स्थानों पर माह से लेकर ऋतुओं तक मानसून, वर्षा और उसके पूर्वानुमान के लिये सर्वाधिक आदर्श और अत्याधुनिक गतिकीय मॉडल ढांचे का विकास करना है। 

इस मिशन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं : 

(टीम दृष्टि इनपुट)

निष्कर्ष: अप्रैल और मई में गर्मी पड़ना मानसून के लिये जरूरी है और यह हर साल पड़ती भी है। लेकिन लगातार तापमान का सामान्य से अधिक बने रहना बेशक  जलवायु परिवर्तन की आहट न हो, लेकिन यह एक खतरे की दस्तक ज़रूर है, जो लोगों के स्वास्थ्य से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक को प्रभावित करता है। यह स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के जो खतरे पिछले दो दशक से चर्चाओं में रहे हैं, अब उनका असर दिखाई देने लगा है भारतीय मौसम विभाग ने इस वर्ष अप्रैल से जून के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में औसत तापमान सामान्य से अधिक रहने की चेतावनी दी है। लेकिन साथ ही मानसून सीज़न के दौरान कुल वर्षा दीर्घावधि औसत का 97 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान भी जताया है, जिसमें ± 5 प्रतिशत का अंतर हो सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था के लिये मानसून बेहद अहम कारक माना जाता है। बेहतर मानसून से देश में बेहतर फसल की उम्मीद की जा सकती है और भारत जैसे देश में जहाँ आधे से अधिक कृषि योग्य भूमि की सिंचाई मानसूनी वर्षा पर निर्भर रहती है, मानसून का साथ मिलना देश की सेहत के लिये निश्चित रूप से अच्छी खबर है।