संसद टीवी संवाद

भारत-अफ्रीका साझेदारी | 24 Sep 2019 | अंतर्राष्ट्रीय संबंध

दक्षिण-दक्षिण सहयोग

विश्व मामलों की भारतीय परिषद (ICWA), नई दिल्ली

सम्मेलन में तीन मुख्य थीमों पर विचार विचार किया गया:

  1. उन तरीकों पर विचार किया जिनके अनुसार तेजी से बदलते हुए वैश्विक साँचे में भारत और अफ्रीका उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंधों को पुनः आकार दे सकें।
  2. अफ्रीका महाद्वीप के विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंधों की गतिकी की विशिष्टताओं पर ध्यान केन्द्रित किया।

अफ्रीका के लिये छीना-झपटी: यह नव उपनिवेशवाद अवधि (1881-1914).के दौरान अफ्रीकी भूभाग हेतु यूरोपियंस के परस्पर विरोधी दावों, कब्जों, विभाजन और उपनिवेशिकरण की अधिकता के वज़ह से हुआ।

इन मुद्दों का समाधान कैसे करें?

कदम जो उठाए जा सकते हैं

एजेंडा 2063- अफ्रीका को भविष्य के वैश्विक पावर हाउस में रूपांतरित करने के लिये यह अफ्रीका का ब्लूप्रिंट और मास्टर प्लान है। यह महाद्वीप का रणनीतिक ढाँचा है जो समावेशी और संवहनीय विकास के लिये इसके लक्ष्यों को प्रदान करने हेतु लक्षित है और एकता, आत्मनिर्णय, स्वतन्त्रता, उन्नति और सामूहिक समृद्धि के लिये पैन-अफ्रीकन अभियान की ठोस अभिव्यक्ति है।

वे मुद्दे जिन पर और काम करने की आवश्यकता है

व्यापार

के दशक में यह लगभग नगण्य था लेकिन वर्तमान में यह 65 बिलियन डॉलरका स्तर पार कर चुका है।

भारत और अफ्रीकी देश दोनों मिलकर विश्व जनसंख्या का लगभग एक तिहाई हैं, अतः एक-दूसरे का ध्यान रखते हुए सहयोग करना और आगे बढ़ना लाभकारी है।

भारत का व्यवसाय और उद्यम इसकी स्थिति बदलते रहे हैं और वर्तमान में अफ्रीका में बड़ी संख्या में भारतीय कंपनियाँ मौजूद हैं। अतः वर्ष 1990 के दशक के आर्थिक सुधारों के बाद राष्ट्र निर्माण का भाव परिवर्तित हो चुका है और भारतीय उद्यम काफी आक्रामक और बहुराष्ट्रीय हो गए हैं।

अफ्रीका के बारे में एक विविधतापूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाए क्योंकि वहाँ अन्य के अलावा अंग्रेजीभाषी, फ्रेंचभाषी और पुर्तगालीभाषी (अफ्रीकी देशों का भाषाई वर्गीकरण) हैं। अंग्रेजीभाषी अफ्रीकियों के साथ व्यापार एवं व्यवसाय के हमारे पारंपरिक रिश्ते रहे हैं, लेकिन बाकी अन्य दो के साथ हमारे रिश्ते शुरू होने की प्रक्रिया में हैं और उन पर और बल दिये जाने की आवश्यकता है।

भारत को यूरेनियम, सोना, प्लूटोनियम, कॉपर आदि जैसे कच्चे माल की आवश्यकता है जिसे अफ्रीका से मंगाया जा सकता है और इसके बदले भारत उन्हें तैयार उत्पाद दे सकता है। हमारे हित विषम हैं जहां भारत कुछ बेहतर स्थिति में है जिसे हम और आगे ले जा सकते हैं।

सुरक्षा

एक-दूसरे से सीखना

ट्रुथ एंड रिकोन्सिलियेशन कमीशन (TRC)

यह न्यायालय के समान न्याय को सुदृढ़ करने वाला एक निकाय था जिसे वर्ष 1995 में दक्षिण अफ्रीका सरकार ने गठित किया था। इसका कार्य था देश के घावों को भरने में सहायता करना और रंगभेद काल में हुए मानव अधिकारों के उल्लंघनों के मामलों का पता लगाना और अपने लोगों में मेल-मिलाप करना।

रंगभेद

यह वह नीति थी जो दक्षिण अफ्रीका के अल्पसंख्यक गोरों और बहुसंख्यक काले लोगों के बीच संबंधों को निर्देशित करती थी। इसने काले लोगों का जातीय अलगाव, राजनीतिक और आर्थिक भेदभाव स्वीकृत किया था।

कृषि

विशेष प्रयोजन वाहन (SPV)

विशेष प्रयोजन वाहन को विशेष प्रयोजन इकाई भी कहा जाता है, यह वित्तीय जोखिमों को अलग रखने के लिये मूल कंपनी द्वारा निर्मित एक सहायक संस्था है। एक अलग कंपनी के रूप में इसकी कानूनी स्थिति इसके उत्तरदायित्वों को सुरक्षित करती है, चाहे मूल कंपनी दिवालिया क्यों न हो जाए।

सामान्य जुड़ाव

आगे की राह

भारत और अफ्रीका के बीच सहभागिता हेतु मजबूत पारंपरिक और ऐतिहासिक आधार हैं और दोनों के मध्य सामान्य आधार या संपर्क भी हैं। अतः यहाँ से आगे संबंध बनाने के लिये इनको आधार बनाने की आवश्यकता है, चाहे यह संस्कृति हो, सुरक्षा हो या व्यापार, प्रौद्योगिकी हो या कृषि।