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बाघ संरक्षण का महत्व | 18 Aug 2020 | जीव विज्ञान और पर्यावरण

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्री ने बाघ जनगणना पर ‘स्टेटस ऑफ टाइगर्स को-प्रीडेटर्स एंड प्रे इन इंडिया’ (Status of Tigers Co-predators and Prey in India) नामक एक रिपोर्ट जारी की है। गौरतलब है कि 20वीं शताब्दी की शुरुआत के बाद से ही दुनिया भर में बाघों की आबादी में तेज़ी से गिरावट देखी गई है, हालाँकि वर्तमान में बाघ संरक्षण के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब बाघों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।

 

प्रमुख बिंदु:

सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा (St. Petersburg Declaration) :

  • वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बाघ संरक्षण मंच (International Tiger Conservation Forum) की एक बैठक विश्व के 13 टाइगर रेंज देशों (Tiger Range Countries-TRCs) के राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सालिया।
  • इस बैठक में शामिल सभी देशों ने सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा के तहत जारी ‘ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम’ को लागू करने पर सहमति व्यक्त की।
  • इस कार्यक्रम के तहत 13TRC देशों ने वर्ष 2022 तक वैश्विक स्तर पर बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा था।
  • भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, रूस, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया,मलेशिया, लाओस, थाईलैंड और वियतनाम सहित कुल 13 देश 'टाइगर रेंज कंट्रीज़' (TRC) में शामिल है।

अन्य आँकड़े:

बाघ संरक्षण का की आवश्यकता :

बाघ संरक्षण:

लाभ:

प्रोज़ेक्ट टाइगर:

  • प्रोज़ेक्ट टाइगर की शुरुआत केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वर्ष 1973 में की गई थी।
  • देश के प्रसिद्ध जीव विज्ञानी कैलाश सांखला (Kailash Sankhala) को इस कार्यक्रम का पहला निदेशक नियुक्त किया गया था।
  • इस कार्यक्रम के तहत बाघ आबादी वाले राज्यों को बाघों के संरक्षण हेतु केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
  • गौरतलब है कि वर्ष 1973 में प्रोज़ेक्ट टाइगर की शुरुआत की समय देश में मात्र 9 टाइगर रिज़र्व थे, वर्तमान में देश में कुल टाइगर रिज़र्वों (Tiger Reserve) की संख्या बढ़कर 50 हो गई है।

चुनौतियाँ:

आगे की राह:

अभ्यास प्रश्न: पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में बाघों के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए सरकार द्वारा बाघ संरक्षण के प्रयासों और इसके प्रभावों की चर्चा कीजिये।