संसद टीवी संवाद

वित्तीय क्षेत्र- रेगुलेटर की भूमिका | 17 Mar 2020 | भारतीय अर्थव्यवस्था

संदर्भ

हाल के वर्षों में देश में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कई महत्त्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों की असफलता के मामले सामने आए हैं। इतनी बड़ी संख्या में वित्तीय संस्थानों की असफलता से निवेशकों और आम जनता में वित्तीय क्षेत्र के भविष्य को लेकर अनिश्चितता तथा भय की स्थिति बन गई है। ऐसी स्थिति में वित्तीय क्षेत्र के नियामकों की भूमिका और उनकी कार्यशैली को लेकर कई प्रश्न खड़े हुए हैं जैसे कि क्या नियामकों के पास वित्तीय अनियमितता की जाँच करने के लिये उपयुक्त संसाधन और शक्तियाँ हैं या नहीं? अथवा यदि नियामकों के पास अनियमितताओं पर कार्रवाई करने की शक्तियाँ हैं तो सही समय पर उनका उपयोग क्यों नहीं किया गया?

मुख्य बिंदु: 

यस बैंक:

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र का इतिहास:

वर्तमान बैंकिंग संकट के कारण:

विशेषज्ञों के अनुसार, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का बढ़ना, वित्तीय संस्थानों की अनियमितताएँ और वित्तीय क्षेत्र के नियामकों की अनदेखी आदि वर्तमान बैंकिंग संकट के प्रमुख कारण हैं।   

NPA: 

नियामक की भूमिका : 

विनियमन हेतु समायोजित योजना का अभाव (Regulatory Gap): 

वर्तमान में गैर-बैंकिंग कंपनियों के विनियमन हेतु कुछ प्रमुख संस्थान निम्नलिखित हैं:

  1. वेंचर कैपिटल फंड, मर्चेंट बैंक, स्टॉक ब्रोकिंग फर्म- रजिस्ट्रेशन और विनियमन सेबी द्वारा। 
  2. इंश्योरेंस कंपनी- रजिस्ट्रेशन और विनियमन  भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा। 
  3. हाउसिंग फाइनेंस कंपनी- नेशनल हाउसिंग बैंक द्वारा विनियमित। 
  4. निधि कंपनी- कंपनी एक्ट 1956 के तहत उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा विनियमित।
  5. चिट फंड कंपनी- चिट फंड एक्ट 1982 के तहत राज्यों द्वारा विनियमित।

इसी तरह देश भर में कोऑपरेटिव बैंकों के विनियमन की अलग-अलग प्रणालियाँ अपनाई गई हैं। कुछ कोऑपरेटिव बैंकों का विनियम राज्य सरकारों के सहयोग से रजिस्ट्रार सहकारी समिति द्वारा किया जाता है, वहीं कुछ बड़े बैंकों के मामले में RBI प्रत्यक्ष रूप से विनियमन की प्रक्रिया पूरी करती है। 

विनियमन क्षमता (Regulatory Capacity):

नियामक की चुनौतियाँ: 

बैंक रन (Bank Run): बैंकिंग क्षेत्र में बैंक रन उस स्थिति को कहा जाता है, जब किसी बैंक के बहुत से ग्राहक एक साथ अपनी जमा धनराशि का पूरा या एक बड़ा हिस्सा बैंक से निकाल लेते हैं। 

आगे की राह:

अभ्यास प्रश्न: भारतीय बैंकिग क्षेत्र के वर्तमान वित्तीय संकट तथा इसके कारणों की समीक्षा कीजिये।