संसद टीवी संवाद

विशेष : ड्रोन नीति (Drone Policy) | 05 Sep 2018 | राज्यसभा

संदर्भ एवं पृष्ठभूमि

देश में ड्रोन के इस्तेमाल का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है, ऐसे में इसे उड़ाने को लेकर तमाम नियमों का इंतज़ार काफी वक्त से हो रहा था। लेकिन अब सरकार ने इसके लिये नए नियमों की घोषणा कर दी है। यह नियमावली 1 दिसबंर से पूरे देश में लागू की जाएगी। केंद्र सरकार ने इसके लिये अनुमति लेने के नए नियमों के साथ ही डिजिटल प्‍लेटफार्म भी विकसित किया है| सरकार के मुताबिक ड्रोन के इस्तेमाल से रोज़गार बढ़ने के साथ ही आपदा राहत और कृषि के क्षेत्र में मदद मिलेगी। भारत में ड्रोन का चलन जिस तरह बढ़ा है उसे देखते हुए सरकार की यह नई नियमावली बेहद महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। हालाँकि ड्रोन को लेकर हमारे देश में कोई खास नियम नहीं हैं लेकिन दुनिया भर में इसके व्यापक इस्तेमाल को देखते हुए भारत में पहली बार ड्रोन को लेकर नए नियम लागू होने जा रहे हैं|

ड्रोंस को लेकर डीजीसीए ने जारी की नई नियमावली

भारत में ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ कुछ जगहों पर ही हो सकता है और यह तभी संभव होगा जब ड्रोन उपयोगकर्त्ता सभी नियमों का पालन करे| 250 ग्राम से ऊपर वज़न वाला ड्रोन उड़ाते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना होगा|

  1. रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति के ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता|
  2. एयरपोर्ट या हैलिपैड के 5 किलोमीटर के आस-पास ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता|
  3. सेंसिटिव जोन या हाईप्रोफाइल सिक्योरिटी वाले इलाके में ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता|
  4. सरकारी ऑफिस, मिलिट्री स्पॉट, हवाई अड्डों, अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं, तटरेखा, सचिवालय परिसर के पास ड्रोन उड़ाना वर्जित है|
  5. ड्रोन उड़ाने वाला कम-से-कम 18 साल या उससे ऊपर का होना चाहिये|
  6. सभी ड्रोन एक लाइसेंस प्लेट के साथ उड़ाए जाएंगे जिनमें ऑपरेटर का नाम और उन्हें कैसे कॉन्टैक्ट करना है ये लिखा हो|
  7. एक से अधिक अनमैन्ड ऑटोमैटिक वेहिकल (UAV) या ड्रोन एक बार में नहीं उड़ाए जा सकते|
  8. किसी भी इंटरनेशनल बॉर्डर से 50 किलोमीटर के अंदर ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता|
  9. समुद्र से 500 मीटर दूर ही ड्रोन उड़ाया जा सकता है|
  10. विजय चौक, दिल्ली से 5 किलोमीटर के अंदर ड्रोन नहीं उड़ाए जा सकते|
  11. नेशनल पार्क, पब्लिक स्पॉट, वाइल्डलाइफ सेंचुरी आदि में भी ड्रोन नहीं उड़ाए जा सकते|

ड्रोन की पाँच श्रेणियाँ होंगी

वजन

  1. नैनो     250 ग्राम से कम
  2. माइक्रो     250 ग्राम से 2 किलो तक
  3. स्माल      2 किलो से 25 किलो तक
  4. मीडियम      25 किलो से 150 किलो तक
  5. लार्ज     150 किलो से अधिक

एयरस्पेस के तीन ज़ोन होंगे

  1. रेड ज़ोन     उड़ान की अनुमति नहीं
  2. येलो ज़ोन     नियंत्रित हवाई क्षेत्र - उड़ान से पहले अनुमति लेना आवश्यक
  3. ग्रीन जोन      अनियंत्रित हवाई क्षेत्र - स्वचालित अनुमति
  4. नो ड्रोन ज़ोन     कुछ विशेष जगहों पर ड्रोन संचालन की अनुमति नहीं

ड्रोन लाइसेंस प्राप्ति के नियम

खाद्य सामग्री की आपूर्ति के लिये नहीं होगी अनुमति

नियमों के उल्लंघन पर सज़ा का प्रावधान

ड्रोन का इस्तेमाल कहाँ-कहाँ हो रहा है?

ड्रोन का इस्तेमाल बीते कुछ सालों में बहुत तेज़ी से बढ़ा है| इसका इस्तेमाल टोही विमान, नागरिक सुरक्षा से लेकर ई-कॉमर्स के बाज़ार तक अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है| ड्रोन का इस्तेमाल निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जा रहा है-

  1. राहत और बचाव अभियान की गतिविधियों की निगरानी
    ♦ अप्रैल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप से पूरी दुनिया हिल गई| इस भूकंप की भयावहता की तस्वीरें ड्रोन से ली गई थीं|
    ♦भारत में प्राकृतिक आपदाएँ हर साल लाखों लोगों की जान लेती हैं| भूकंप के नज़रिये से पहाड़ी इलाके तथा मैदानी इलाकों में कहर बरपाती बाढ़ या तूफानों के साए में रह रहे तटीय इलाकों में आपदा की स्थिति में राहत और बचाव के लिये ये ड्रोन बेहतर साबित हो सकते हैं|
    ♦कई मौकों पर ड्रोन के इस्तेमाल से राहत एजेंसियों को सहूलियतें मिली हैं|
    ♦हाल ही में केरल में आई विनाशकारी बाढ़ की भयावहता की स्थिति जानने के लिये भी ड्रोन का इस्तेमाल किया गया|
  2. कृषि में उपयोग
    ♦ड्रोन का सबसे अधिक और क्रांतिकारी इस्तेमाल खेती में हो रहा है| दुनिया के कई देशों में किसान ड्रोन के ज़रिये फसलों की निगरानी से लेकर दवा का छिडकाव तक कर रहे हैं|
    ♦भारत के कई इलाकों में ड्रोन के उपयोग किये जाने से खेती फायदेमंद साबित हो रही है|
  3. हिंसा के दौरान ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल
    ♦ड्रोन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिये भी हो रहा है| सहारनपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया था जिससे पुलिस को हालात पर नज़र रखने में काफी मदद मिली थी|
    ♦इसके अलावा हैदराबाद पुलिस भी शहर में महिलाओं की सुरक्षा के लिये ड्रोन के इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है|
    ♦वाहनों के बोझ तले कराह रही देश की राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक नियंत्रण करने में भी इसकी सहायता ली जा रही है।
  4. ड्रोन सर्विलांस के ज़रिये असामाजिक तत्त्वों पर नज़र
    ♦हैदराबाद पुलिस ने ड्रोन सर्विलांस के ज़रिये असामाजिक तत्त्वों पर नज़र रखने की कवायद शुरू कर दी है|
    ♦तेलंगाना के करीमनगर में नदियों और तालाबों के आस-पास खुले में शौच करने वालों पर नज़र रखने के लिये ड्रोन का प्रयोग शुरू हुआ है यानी स्वच्छ भारत अभियान में ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है|
    ♦आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिये देश के बड़े महानगरों में छतों की तलाशी और बड़े जुलूसों पर निगाह रखने के लिये ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  5. रेल क्षमता और सुरक्षा बढ़ाने में ड्रोन का इस्तेमाल
    ♦हाल ही में भारतीय रेल की सुरक्षा और क्षमता बढ़ाने के लिये रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है| इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग और ट्रैक मेंटेनेंस की निगरानी और चेकिंग के लिये रेलवे ने बड़े पैमाने पर ड्रोन कैमरों के इस्तेमाल करने का फैसला लिया है|
    ♦इसके साथ ही राहत और बचाव अभियान की गतिविधियों की निगरानी और महत्त्वपूर्ण कार्यों की प्रगति जानने के लिये रेलवे द्वारा ड्रोन तैनात किये जाएंगे|
    ♦रलवे जल्द ही अपने सभी डिवीज़न और जोन में ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल शुरू करने वाला है|
    ♦जबलपुर मुख्यालय में सबसे पहले ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल शुरू किया गया, जबकि जबलपुर के दूसरे इलाकों भोपाल और कोटा डिवीज़न में भी ड्रोन कैमरों का ट्रायल किया गया है|
  6. प्रोफेशनल फोटोग्राफी और हवाई मैपिंग में उपयोग
    ♦सर्वेक्षण, प्रोफेशनल फोटोग्राफी और हवाई मैपिंग में ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है|
    ♦DGCA की ओर से जारी नई ड्रोन पालिसी से ड्रोन के प्रोफेशनल इस्तेमाल में तेज़ी आएगी| कई ई-कॉमर्स कंपनियों ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है|
  7. सामानों की होम डिलीवरी
    ♦हाल ही में गूगल और अमेजन ने ड्रोन के माध्यम से सामानों की होम डिलीवरी करने की तैयारी की है| अमेजन ने पिछले साल ही भारत में ड्रोन विमानों की तैनाती के लिये पेटेंट भी फाइल किया है|
    ♦हालाँकि नई ड्रोन नीति के मुताबिक अभी इन कंपनियों को ड्रोन के ज़रिये होम डिलीवरी में थोड़ा और इंतज़ार करना होगा|
  8. डॉक्यूमेंटेशन में आसानी
    ♦इसके अलावा किसी भी चीज़ का डॉक्यूमेंटेशन करते समय पारंपरिक लेज़र स्कैनिंग में रिजोल्यूशन की सीमा की समस्या सामने आती है, जबकि ड्रोन इस कमी को पूरा करता है।
    ♦ड्रोन सर्वेक्षण और संरक्षण कार्य के लिये अन्य आँकड़ों का चित्र भी लेता है और इन कार्यों के लिये ड्रोन के उपयोग का दूसरा बड़ा लाभ लागत एवं समय की बचत है।
    ♦आमतौर पर एक हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण करने के लिये ड्रोन सेवा प्रदाताओं द्वारा 1500-2000 रुपए लिये जाते हैं, जबकि लेज़र तकनीक के उपयोग से उतने ही कार्य की लागत कम-से-कम तीन से चार गुना अधिक होती है।
    ♦इसके अलावा, जिस कार्य में पहले 6-8 महीने लगते थे, उसी कार्य को ड्रोन के माध्यम से एक सप्ताह से कम समय में पूरा किया जा सकता है।

ड्रोन का सैन्य इस्तेमाल

देश की सीमाओं की निगरानी के लिये रुस्तम-2

हाल ही में स्वदेश निर्मित ड्रोन रुस्तम-2 का सफल परीक्षण किया गया। इसके प्रथम संस्करण रुस्तम-1 का सफल परीक्षण नवंबर 2009 में हुआ था। भारतीय सेना के आग्रह पर इसका विकास DRDO की अनुषंगी इकाई वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (Aeronautical Development Establishment-ADE) ने किया है, जिसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स भी शामिल हैं।

(टीम दृष्टि इनपुट)

भारत को हाईटेक टोही विमानों की ज़रूरत

क्या होते हैं ड्रोन?

(टीम दृष्टि इनपुट)

ड्रोन या यूएवी के विकास की कहानी

निष्कर्ष: देश में ड्रोन के इस्तेमाल का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है ऐसे में इसे उड़ाने को लेकर तमाम नियमों का इंतज़ार काफी समय से हो रहा था लेकिन अब सरकार ने इसके लिये नए नियमों की घोषणा कर दी है| यह नियमावली 1 दिसंबर से पूरे देश में लागू हो जाएगी| केंद्र सरकार ने इसके लिये अनुमति लेने के नए नियमों के साथ ही डिजिटल प्लेटफार्म भी विकसित किया है| नागर विमानन मंत्रालय के मुताबिक ड्रोन एविएशन सेंटर एक नई क्रांति लेकर आया है और इसके बेहतर इस्तेमाल से कई समस्याओं से मुकाबला करने में आसानी होगी|

आज ड्रोन को उड्डयन उद्योग का नया अध्याय कहा जा रहा है, जहाँ रोज़गार और नागरिक उद्देश्यों के लिये इसके उपयोग की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। यानी अपनी Eye in the Sky वाली छवि से कहीं आगे निकल आया है ड्रोन। लेकिन ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी है, अन्यथा इसके दुरुपयोग की पर्याप्त संभावनाएँ हैं। अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन एसोसिएशन ने इन्हें वायु क्षेत्र के लिये खतरा बताते हुए इससे जुड़ी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये व्यापक विचार-विमर्श की सलाह दी है।