संसद टीवी संवाद

मज़दूरी संहिता (केंद्रीय) नियम -2020 | 25 Jul 2020 | शासन व्यवस्था

संदर्भ: 

हाल ही में ‘केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्रालय’ (Ministry of Labor and Employment) द्वारा आधिकारिक गजट के माध्यम से ‘मज़दूरी संहिता अधिनियम, 2019’ के कार्यान्वयन के लिये तैयार नियमों का मसौदा प्रस्तुत किया गया है। इस मसौदे के जारी होने (7 जुलाई) से अगले 45 दिनों के अंदर सभी पक्ष इससे जुड़े सुझाव और आपत्तियाँ मंत्रालय को भेज सकते हैं गजट में इसका नाम ‘मजदूरी संहिता (केंद्रीय) नियम -2020’ [Draft Code on Wages(central) Rules, 2020] रखा गया है इस मसौदे में मुख्य तौर पर चार श्रम कानून जिसमें न्यूनतम मज़दूरी कानून, मज़दूरी भुगतान कानून, बोनस भुगतान कानून और समान पारितोषिक कानून को समाहित किया गया है

प्रमुख बिंदु:  

मज़दूरी संहिता (केंद्रीय) नियम -2020:

लाभ:       

कार्य/कामकाजी घंटे (Working Hours):

न्यूनतम दैनिक मज़दूरी गणना का आधार: 

डिजिटल भुगतान:

मज़दूर संहिता की आवश्यकता क्यों?:

चुनौतियाँ:

 समाधान: 

आगे की राह: 

निष्कर्ष: 

एक अनुमान के अनुसार, वर्तमान में भारत में असंगठित क्षेत्र में सक्रिय श्रमिक देश की कुल कामकाजी आबादी का लगभग 80% हैं, साथ ही वे देश की जीडीपी में लगभग 60% से अधिक का योगदान देते हैं। अधिक-से-अधिक औद्योगिक इकाइयों/व्यवसायों को संगठित क्षेत्र में लाकर एक बड़ी श्रमिक आबादी को उनके हितों की रक्षा की जा सकती है। हालाँकि श्रमिक क्षेत्र की जटिलताओं और वर्तमान आधुनिक परिवेश में काम (Work) के बदलते स्वरूप (फ्रीलांस, वर्क फ्रॉम होम, स्टार्टअप आदि) को देखते हुए सरकार को असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों की रक्षा के लिये आवश्यक कानूनी बदलाव के प्रयास करने चाहिये।   

अभ्यास प्रश्न: मज़दूरी संहिता (केंद्रीय) नियम- 2020 की प्रासंगिकता पर सतर्क विश्लेषण कीजिए।