संसद टीवी संवाद

देश देशांतर : मुक्त व्यापार की राह | 11 Dec 2018 | भारतीय अर्थव्यवस्था

संदर्भ


विभिन्न देशों के बीच मुक्त व्यापार आज के वैश्विक दौर की आर्थिक ज़रूरत है और इसीलिये मुक्त व्यापार की राह में आने वाली बाधाओं को खत्म किया जाना चाहिये जिससे आर्थिक विकास का लाभ सभी देशों को मिल सके। वित्त मंत्री अरुण जेटली के मुताबिक, टैरिफ वार को लेकर बढ़ती चिंता और दुनिया भर में अपने उद्योगों के हितों की रक्षा के लिये दूसरे देशों के सामने खड़ी की जा रही बाधाओं से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान होने की आशंका है। सभी देशों के व्यापक हितों के लिये यह आवश्यक है कि व्यापार की राह में आने वाली बाधाओं को कम किया जाए। कोई भी देश सभी वस्तुएँ नहीं बना सकता या कम-से-कम कीमत पर बेहतरीन गुणवत्ता चाहने वाले उपभोक्ताओं के लिये सभी सेवाएँ मुहैया नहीं करा सकता। इसे देखते हुए मुक्त व्यापार (free trade) व्यवस्था की ज़रूरत है। मुक्त व्यापार बढ़ने से न केवल ग्लोबल इकॉनमी को बल्कि सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होगा।

पृष्ठभूमि

क्या है मुक्त व्यापार तथा मुक्त व्यापार समझौता?

FTA विश्व व्यापार संगठन से कैसे अलग है?

FTA की ज़रूरत क्यों?

FTA की राह में अवरोध

वैश्विक व्यापार में क्या बदलाव आया है?

क्या FTA की प्रासंगिकता घट रही है?

क्या है विकल्प?

निष्कर्ष


अमेरिका को मुक्त व्यापार के क्षेत्र में अब विश्व के तमाम देशों से टक्कर लेनी पड़ रही है जिसमें वह असफल हो रहा है। अपने मंतव्य को पूरा करने के लिये राष्ट्रपति ट्रंप ने WTO को ही खंडित करने की रणनीति अपना ली है। WTO के नियमों में व्यवस्था है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र कोई भी देश किसी विशेष माल पर आयात कर लगा सकता है। इस प्रावधान का उपयोग करते हुए अमेरिका ने भारत में उत्पादित इस्पात पर आयात कर बढ़ायाI अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह संरक्षणवादी नीतियों और व्यापार शुल्क को हथियार के तौर पर उपयोग करना आरंभ किया है उससे विश्व अर्थव्यवस्था में मुक्त व्यापार के अंत की आशंका ही अधिक दिखती हैI