आर्थिक सर्वेक्षण

अध्याय: 7 | 19 Nov 2019 | भारतीय अर्थव्यवस्था

वर्ष 2040 में भारत की जनसंख्याः 21वीं शताब्दी के लिये सरकारी प्रावधान की आयोजना

अवलोकन

इस अध्याय में भारत की जनसांख्यिकी का एक व्यावहारिक दृष्टिकोण दिया गया है और उन परिवर्तनों को प्रस्तुत किया गया है जो अगले दो दशकों में अपेक्षित हैं। इसने जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की चुनौतियों से निपटने के लिये भविष्य की रणनीति भी तैयार की है।

प्रमुख बिंदु

Annual Population Growth Rate

हाल के जनांकिकीय रुझान

TFR State in 2016

कुल प्रजनन दर: यह एक महिला के संपूर्ण जीवनकाल में प्रसव करने वाली उम्र की महिला से पैदा या पैदा होने वाले कुल बच्चों की संख्या को संदर्भित करता है। यह बिहार के बाद सबसे ज़्यादा यूपी में है और दिल्ली के लिये सबसे कम है।

प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन: प्रति महिला 2.1 बच्चों के टीएफआर को प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन कहा जाता है, प्रतिस्थापन स्तर (प्रजनन क्षमता, प्रजनन क्षमता का वह स्तर) जिस पर एक आबादी खुद को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में बदल देती है।

प्रभावी प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन क्षमता: प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन क्षमता विषम लिंगानुपात के लिये समायोजित की जाती है।

राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर जनसंख्या अनुमान

कुल गर्भधारण दर में गिरावट

राष्ट्रीय स्तर पर: वर्ष 2021-41 तक कुल गर्भधारण दर में अनुमानतः राष्ट्रीय स्तर पर लगातार गिरावट जारी रहेगी और यह वर्ष 2021 से ही प्रतिस्थापन स्तर से नीचे गिरकर 1.8 तक पहुँचेगी तथा अन्य देशों के जन्म दर पैटर्न जैसी, कुछ समय पश्चात कुल जन्म दर लगभग 1.7 के पास पहुंच कर स्थिर हो

राज्य स्तर पर: सभी राज्यों की प्रजनन क्षमता वर्ष 2031 तक प्रतिस्थापन स्तर से नीचे रहने की उम्मीद है।

लिंग अनुपात:

प्रजनन क्षमता में गिरावट का कारण

वृद्धता संचार के नीतिगत निहितार्थ

महत्त्वपूर्ण तथ्य और रुझान

TFR in India

मेन्स के लिये महत्त्वपूर्ण प्रश्न

Q.1 देश के आर्थिक परिदृश्‍य पर जनसांख्यिकीय परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ेगा ?

Q.2 भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश एक वरदान या अभिशाप हो सकता है। जनसांख्यिकीय लाभांश के लाभ को बढ़ाने के लिये आवश्यक नीतिगत उपायों पर चर्चा कीजिये |