आर्थिक सर्वेक्षण

अध्याय: 4 | 21 Oct 2019 | भारतीय अर्थव्यवस्था

डेटा ‘‘लोगों का, लोगों द्वारा, लोगों के लिये’

संक्षिप्त विवरण

यह अध्याय वर्तमान डिजिटल अर्थव्यवस्था में डेटा के महत्त्व को रेखांकित करता है तथा यह भी बताता है कि जन कल्याण हेतु डेटा का लोकतांत्रिकरण किस प्रकार भारत को परिवर्तित कर सकता है। यह डेटा से संबंधित मुद्दों को संबोधित करता है तथा डेटा के लिये उचित परिवेश के निर्माण हेतु मार्ग भी सुझाता है।

आँकड़ों (डेटा) और सामाजिक कल्याण का अर्थशास्त्र

The Economics of Data and Social Welfare

falling Marginal Coast Marginal Coast

डेटा क्या है ?

डेटा किस प्रकार सृजित होता है?

डेटा का प्रकार

सरकार के लिये डेटा की उपयोगिता

डेटा को सार्वजनिक संपत्ति क्यों माना जाना चाहिये?

सिस्टम का निर्माण

Building the Data System

Data

मौजूदा डेटा सिस्टम से जुड़े मुद्दे

Data 1

डेटा को एकीकृत करने की पहल

स्थानीय सरकारी निर्देशिका

Local Government Directory

समग्र वेदिका पहल

Samagra Vedika Initiative

सभी गोपनीयता चिंताओं को दूर करना

‘डेटा एक्सेस फिड्यूशरी आर्किटेक्चर’

Data Access Fiduciary Architecture

भारत के डेटा अवसंरचना का रूपांतरण्

Data

अनुप्रयोग

आगे की राह

सामाजिक कल्याण हेतु डेटा का सृजन इष्टतम परिमाण में निजी क्षेत्र द्वारा नहीं किया जा सकता अतः सरकार को लोगों की भलाई के साधन के रूप में डेटा को देखना चाहिये और आवश्यक निवेश कार्य करना चाहिये। लोक कल्याण के रूप में डेटा के सृजन के लाभों की प्राप्ति डेटा की निजता की कानूनी रूपरेखा के भीतर की जा सकती है। डेटा और सूचना हाइवे को भौतिक राजमार्गों की भांति समान रूप से महत्वपूर्ण अवसंरचना के रूप में देखा जाए। ऐसे कदम से भारत को अपने लोगों के कल्याण हेतु प्रौद्योगिकीय प्रगति के लाभों का गुणात्मक उपयोग करने में सहायता मिल सकती है।

महत्वपूर्ण तथ्य और रुझान

डेटा के एकत्रीकरण और संचयन में प्रौद्योगिकीय प्रगति को देखते हुए समाज का इष्टतम डेटा उपयोग पहले से अधिक हुआ है।

मेन्स के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1- डेटा का उपयोग इष्टतम सामाजिक कल्याण के लिए सीढ़ी के रूप में किया जा सकता है। डेटा को 'सार्वजनिक वस्तु' मानने के निहितार्थ का विश्लेषण कीजिये।

प्रश्न 2- उदाहरण की मदद से बताएं कि भारत के डेटा के बुनियादी ढांचे को कैसे बदला जा सकता है।