व्हाइट फॉस्फोरस | 10 Mar 2026

स्रोत: द हिंदू 

ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट ने इज़रायल पर लेबनान के आवासीय क्षेत्रों में व्हाइट फॉस्फोरस वाले गोला-बारूद का उपयोग करने का आरोप लगाया है, जिससे इंटरनेशनल ह्यूमनिटेरियन लॉ के संभावित उल्लंघन पर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं।

  • इन कथित केमिकल वेपन का उपयोग बढ़ते इज़रायल-लेबनान संघर्ष के बीच हुआ है, लेबनानी अधिकारियों ने हाल के इज़रायली हमलों में नागरिकों के हताहत होने की सूचना दी है।
  • व्हाइट फॉस्फोरस: यह विषैला, मोम जैसा रासायनिक पदार्थ है, जो 800 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान पर जलता है, जो अकेला धातु को पिघलाने के लिये पर्याप्त है।
    • आमतौर पर लहसुन जैसी गंध के साथ सफेद, पीले या रंगहीन, सफेद फॉस्फोरस गोला-बारूद को बुझाना मुश्किल होता है और यह तब तक जलता रहता है, जब तक कि रसायन पूरी तरह से समाप्त न हो जाए या ऑक्सीजन से वंचित न हो जाए।
  • इंसेंडियरी म्यूनिशन: सेनाएँ प्रायः व्हाइट फॉस्फोरस का उपयोग इंसेंडियरी म्यूनिशन के रूप में युद्ध के मैदानों में धूम्र आवरण बनाने के लिये करती हैं, क्योंकि यह तेज़ी से प्रज्वलित होता है और सघन धूम्र उत्पन्न करता है, जो बड़े क्षेत्रों में फैल सकता है।
    • इंसेंडियरी म्यूनिशन एक ऐसा हथियार है, जिसे वस्तुओं में आग लगाने या लक्ष्य पर प्रहार करने पर उत्पन्न लौ, ऊष्मा या रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से आग उत्पन्न करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
  • गंभीर स्वास्थ्य खतरे: जब आबादी वाले क्षेत्रों में व्हाइट फॉस्फोरस का उपयोग किया जाता है, तो यह इमारतों में आग लगा सकता है।
    • व्हाइट फॉस्फोरस मनुष्यों के लिये अत्यंत हानिकारक है, क्योंकि यह शरीर में जलन उत्पन्न कर सकता है, जो हड्डी तक पहुँच जाती है और विषैले रसायन उत्सर्जित करता है, जो यकृत, गुर्दे एवं हृदय जैसे महत्त्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुँचाते हैं।
    • यह पदार्थ असामान्य पोटेशियम स्तर सहित चयापचय संबंधी विकार भी उत्पन्न कर सकता है, जिससे हृदय गति रुक सकती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत वैधता: हालाँकि  धूम्र आवरण का उपयोग किये जाने पर व्हाइट फॉस्फोरस को रासायनिक हथियार के रूप में पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
    • नागरिक-आबादी वाले क्षेत्रों में इंसेंडियरी म्यूनिशन के रूप में इसका उपयोग वर्ष 1980 के कुछ पारंपरिक हथियारों पर अभिसमय (CCW) के तहत सख्ती से अवैध है।
    • CCW उन हथियारों को प्रतिबंधित करता है, जो नागरिकों और लड़ाकों को अत्यधिक चोट या अंधाधुंध नुकसान पहुँचाते हैं। भारत CCW के सभी पाँच प्रोटोकॉल का पक्षकार है।
      • वर्ष 1980 के CCW का प्रोटोकॉल III नागरिकों के खिलाफ इंसेंडियरी म्यूनिशन को प्रतिबंधित करता है, हालाँकि व्हाइट फॉस्फोरस को अक्सर धुआँ या प्रकाश के लिये उपयोग किये जाने वाले बहुउद्देश्यीय म्यूनिशन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जिससे सेनाओं को यह तर्क देने का मौका मिलता है कि यह प्रोटोकॉल के अंतर्गत नहीं आता है।
      • इसके अतिरिक्त इज़रायल प्रोटोकॉल III का हस्ताक्षरकर्त्ता नहीं है, जिससे जवाबदेही और जटिल हो जाती है।

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