हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर के लिये विशाखापत्तनम का चयन | 12 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का समर्थन करने और एक्सेलेरेटर-ड्रिवेन सिस्टम (ADS) के माध्यम से अपने थोरियम भंडार का उपयोग करने हेतु हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर सिस्टम की मेज़बानी के लिये विशाखापत्तनम को चुना गया है।
- इस स्थान को इसके मज़बूत तकनीकी पारिस्थितिक तंत्र और समुद्र से निकटता के कारण चुना गया है, जो हाई-एनर्जी सिस्टम के लिये पर्याप्त शीतल जल को सुनिश्चित करता है।
- यह परियोजना मध्य प्रदेश के इंदौर में राजा रमन्ना उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्र (RRCAT) द्वारा विकसित की जा रही है।
हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर सिस्टम क्या है?
- हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर सिस्टम: एक हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर प्रोटॉन (आयनित हाइड्रोजन से) को अत्यधिक उच्च गति तक त्वरित करने के लिये विद्युत चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करता है, जिससे एक शक्तिशाली प्रोटॉन बीम का निर्माण होता है।
- इस बीम को सीसा या बिस्मथ जैसे भारी धातु लक्ष्य की ओर निर्देशित किया जाता है, जिससे एक स्पैलेशन अभिक्रिया शुरू होती है।
- इस अभिक्रिया में टकराव भारी नाभिक को विघटित कर देता है और बड़ी संख्या में न्यूट्रॉनों को मुक्त करता है।
- ये न्यूट्रॉन परमाणु विखंडन शुरू करते हैं, जिससे प्रणाली ऊर्जा उत्सर्जित करने में सक्षम होती है।
- एक्सेलेरेटर-ड्रिवेन सिस्टम (ADS): ADS में स्पैलेशन प्रक्रिया से उत्सर्जित न्यूट्रॉन को विशेष रूप से डिज़ाइन किये गए उप-क्रांतिक परमाणु रिएक्टर कोर की आपूर्ति की जाती है, जो अपने आप एक शृंखला अभिक्रिया को बनाए नहीं रख सकता है।
- रिएक्टर विखंडन प्रक्रिया को बनाए रखने के लिये प्रोटॉन एक्सेलेरेटर से बाह्य न्यूट्रॉन आपूर्ति पर निर्भर करता है।
- यह डिज़ाइन हाई इन्हेरेंट सेफ्टी प्रदान करती है क्योंकि यदि विद्युत की आपूर्ति रुकने या खराबी के कारण एक्सेलेरेटर बंद हो जाता है, तो न्यूट्रॉन की आपूर्ति शीघ्र समाप्त हो जाती है और परमाणु अभिक्रिया स्वतः रुक जाती है, जिससे रिएक्टर को संरक्षित रखा जा सकता है।
- भारत के लिये ADS की आवश्यकता:
- थोरियम का उपयोग: भारत के पास विश्व के थोरियम भंडार का लगभग 25% हिस्सा है। हालाँकि प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला थोरियम (Th-232) 'उर्वर' होता है, 'विखंडनशील' नहीं।
- इसका अर्थ है कि यह स्वयं विखंडित होकर परमाणु शृंखला अभिक्रिया को बनाए नहीं रख सकता। इसे पहले एक न्यूट्रॉन को अवशोषित करना होगा ताकि यह यूरेनियम-233 (U-233) में परिवर्तित हो सके, जो कि अत्यधिक विखंडनशील है।
- ADS द्वारा प्रदान किये जाने वाले प्रचुर और उच्च-ऊर्जा वाले न्यूट्रॉनों का उपयोग थोरियम पर बमबारी करने के लिये किया जाता है, जिससे यह यूरेनियम-233 में परिवर्तित हो जाता है। यूरेनियम-233 एक उत्कृष्ट विखंडनशील ईंधन है, जो भारी मात्रा में बिजली उत्पन्न कर सकता है।
- परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन (रूपांतरण): पारंपरिक परमाणु रिएक्टर अत्यधिक रेडियोधर्मी और लंबे समय तक जीवित रहने वाले परमाणु कचरे (जैसे– माइनर एक्टिनाइड्स) का उत्पादन करते हैं, जो हज़ारों वर्षों तक विषैले बने रहते हैं।
- ADS में मौजूद उच्च-ऊर्जा वाले न्यूट्रॉन इस विषैले परमाणु अपशिष्ट को “जलाकर” या ट्रांसम्यूट करके इसे कम समय तक रहने वाले या स्थिर आइसोटोप्स में बदल सकते हैं। इससे परमाणु अपशिष्ट के निपटान का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है।
- थोरियम का उपयोग: भारत के पास विश्व के थोरियम भंडार का लगभग 25% हिस्सा है। हालाँकि प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला थोरियम (Th-232) 'उर्वर' होता है, 'विखंडनशील' नहीं।
भारत का 3-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम क्या है?
पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: भारत का त्रि-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम
राजा रमन्ना उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्र (RRCAT)
- इंदौर स्थित RRCAT परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की एक इकाई है और यह लेज़र, कण त्वरक तथा संबंधित तकनीकों में अनुसंधान एवं विकास के लिये भारत का प्रमुख संस्थान है।
- वर्ष 1984 में स्थापित इस संस्थान ने भारत के 'सिंक्रोट्रॉन विकिरण स्रोतों'—इंडस-1 और इंडस-2 का विकास किया है, जो राष्ट्रीय अनुसंधान सुविधाओं के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- RRCAT त्वरक, लेज़र प्रणालियों और सिंक्रोट्रॉन विकिरण प्रौद्योगिकियों में उन्नत अनुसंधान करता है।
- RRCAT का अनुसंधान प्रत्यक्ष रूप से सामाजिक लाभों में परिलक्षित होता है, जैसे कि वैश्विक स्तर पर निर्यात किये जाने वाले चिकित्सा उपकरणों के 'इलेक्ट्रॉन-बीम स्टरलाइज़ेशन' (रोगाणुनाशन) के लिये रैखिक त्वरकों का उपयोग।
- AIC-RRCAT Pi-Hub (एक इन्क्यूबेशन सेंटर) वर्तमान में स्वदेशी तकनीक के विकास को गति दे रहा है। यह स्टार्टअप्स के साथ मिलकर अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र हेतु किफायती 'मेटल 3D प्रिंटिंग', 'फाइबर-आधारित ऑप्टिकल सेंसर' तथा 'मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (MRI) मशीनों' के लिये 'क्रायोजेनिक कूलिंग सिस्टम' तैयार करने पर काम कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर क्या है?
एक हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर विद्युत चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करके प्रोटॉनों को अत्यंत उच्च गति तक त्वरित करता है, जिससे एक प्रोटॉन बीम उत्पन्न होता है जिसका उपयोग स्पैलेशन प्रतिक्रियाओं के माध्यम से न्यूट्रॉन उत्पन्न करने के लिये किया जाता है।
2. एक्सेलेरेटर ड्रिवन सिस्टम (ADS) क्या है?
यह प्रणाली रिएक्टर की सुरक्षा और दक्षता में सुधार करती है, क्योंकि ADS एक परमाणु रिएक्टर प्रणाली है जो उप-क्रांतिक रिएक्टर कोर को न्यूट्रॉन प्रदान करने के लिये एक बाहरी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर का उपयोग करती है।
3. भारत के परमाणु कार्यक्रम के लिये थोरियम क्यों महत्त्वपूर्ण है?
भारत के पास विश्व के थोरियम भंडार का लगभग 25% हिस्सा है, जिसे यूरेनियम-233 में परिवर्तित किया जा सकता है, जो परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करने के लिये एक विखंडनीय ईंधन है।
4. ADS परमाणु सुरक्षा को किस प्रकार बेहतर बनाता है?
चूँकि रिएक्टर उप-क्रांतिक अवस्था में संचालित होता है, एक्सेलेरेटर के बंद होते ही विखंडन अभिक्रिया स्वतः ही रुक जाती है। यह अभिक्रिया रिएक्टर को संरक्षित रखती है।
5. भारत के परमाणु अनुसंधान में RRCAT की क्या भूमिका है?
राजा रामन्ना उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्र उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये कण त्वरक, लेज़र प्रणाली और इंडस-1 और इंडस-2 जैसी सिंक्रोट्रॉन विकिरण सुविधाएँ विकसित करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स:
प्रश्न. भारत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
1. मोनाज़ाइट दुर्लभ मृदाओं का स्रोत है।
2. मोनाज़ाइट में थोरियम होता है।
3. भारत की समस्त तटवर्ती बालुकाओं में मोनाज़ाइट प्राकृतिक रूप में होता है।
4. भारत में, केवल सरकारी निकाय ही मोनाज़ाइट संसाधित या निर्यात कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में कौन-से सही हैं ?
(a) केवल 1,2 और 3
(b) केवल 1,2 और 4
(c) केवल 3 और 4
(d) 1,2,3 और 4
उत्तर: b
प्रश्न. भारत में क्यों कुछ परमाणु रिएक्टर "आईएईए सुरक्षा उपायों" के अधीन रखे जाते हैं जबकि अन्य इस सुरक्षा के अधीन नहीं रखे जाते? (2020)
(a) कुछ यूरेनियम का प्रयोग करते हैं और अन्य थोरियम का
(b) कुछ आयातित यूरेनियम का प्रयोग करते हैं और अन्य घरेलू आपूर्ति का
(c) कुछ विदेशी उद्यमों द्वारा संचालित होते हैं और अन्य घरेलू उद्यमों द्वारा
(d) कुछ सरकारी स्वामित्व वाले होते हैं और अन्य निजी स्वामित्व वाले
उत्तर: (b)
