अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित चिंताएँ | 11 Jan 2024

स्रोत: द हिंदू 

संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश सचिव ने हाल ही में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के कारण "विशेष चिंता वाले देश (Countries of Particular Concern- CPC)", 'विशेष निगरानी सूची (Special Watch List- SWL) वाले देश' और 'विशेष चिंता वाली संस्थाएँ (Entities of Particular Concern- EPC)' के रूप में नामित देशों की एक सूची घोषित की जिसमें प्रमुख रूप से चीन, पाकिस्तान तथा उत्तर कोरिया शामिल हैं।

धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी चिंताएँ क्या हैं?

  • परिचय:
    • अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर संयुक्त राज्य आयोग (United States Commission on International Religious Freedom- USCIRF) देशों को CPC के रूप में पदनाम देने के लिये राज्य सचिव को अनुशंसा करता है।
      • अमेरिका उन देशों में चल रहे धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को स्वीकार करता है जिन्हें आधिकारिक तौर पर नामित नहीं किया गया है। सरकारों से धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले, सांप्रदायिक हिंसा, शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति के लिये लंबे समय तक कारावास, अंतर्राष्ट्रीय दमन एवं धार्मिक समुदायों के खिलाफ हिंसा के आह्वान जैसे दुर्व्यवहारों को रोकने का आग्रह किया जाता है।

नोट:

  • इससे पहले, USCIRF ने अपनी 2023 की रिपोर्ट में विभिन्न धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों, ईसाइयों और दलितों के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन का हवाला देते हुए भारत को CPC के रूप में नामित किया था।
  • रिपोर्ट में भारत सरकार के कुछ कानूनों और नीतियों की भी आलोचना की गई, जैसे कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), साथ ही धार्मिक असंतुष्टों तथा कार्यकर्त्ताओं का कथित उत्पीड़न, हिंसा एवं भेदभाव।
  • भारत सरकार ने रिपोर्ट को 'पक्षपाती और प्रेरित' बताकर खारिज़ कर दिया। सरकार ने अपने सभी नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करने तथा उन्हें बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता का भी बचाव किया, चाहे उनकी आस्था कुछ भी हो।
  • अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता हेतु मानदंड:
    • अमेरिका इस बात पर बल देता है कि वर्ष 1998 में अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (International Religious Freedom Act - IRFA) के लागू होने के बाद से धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना अमेरिकी विदेश नीति का एक मूल लक्ष्य रहा है।
    • विभिन्न श्रेणियों में देशों को नामित करने के मानदंड
      • CPCs: जब देशों की सरकारें IRFA 1998 के तहत धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता के अधिकार के "व्यवस्थित, चल रहे और गंभीर उल्लंघन" में संलग्न होती हैं या अनुमति देती हैं।
      • SWL: यह सरकारों द्वारा गंभीर धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को अंजाम देने या सहन करने पर आधारित है।
      • EPC: व्यवस्थित रूप से जारी और गंभीर धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिये।
  • वर्ष 2024 में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिये नामित देश:
    • चिंताजनक स्थिति वाले देश:
      • नामित देशों में चीन, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, क्यूबा, इरिट्रिया, ईरान, निकारागुआ, रूस, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और म्याँमार शामिल हैं।
    • विशेष निगरानी सूची वाले देश:
      • अल्जीरिया, अज़रबैजान, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कोमोरोस और वियतनाम को "विशेष निगरानी सूची वाले देश" के रूप में चिह्नित किया गया है।
    • विशेष चिंताजनक संस्थाएँ:
      • अल-शबाब, बोको हरम, हयात तहरीर अल-शाम, हौथिस, ISIS-साहेल, ISIS-पश्चिमी अफ्रीका, अल-कायदा से संबद्ध ज़मात नस्र अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमिन और तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों को "विशेष चिंताजनक संस्थाओं" के रूप में नामित किया गया है।" 

धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति:

  • भारत:
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25-28 मौलिक अधिकार के रूप में धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं। संविधान के अनुसार भारत एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य है तथा किसी भी धर्म को देश का आधिकारिक धर्म घोषित नहीं किया गया है।
      • अनुच्छेद 25 (अन्तःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म का स्वतंत्र आचरण, अभ्यास एवं प्रचार)।
      • अनुच्छेद 26 (धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता)।
      • अनुच्छेद 27 (किसी धर्म विशेष के प्रचार के लिये करों के भुगतान की स्वतंत्रता)।
      • अनुच्छेद 28 (कुछ शिक्षा संस्थानों में धार्मिक शिक्षा अथवा धार्मिक पूजा में उपस्थिति के संबंध में स्वतंत्रता)।
      • इसके अतिरिक्त संविधान के अनुच्छेद 29 तथा 30 अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा से संबंधित हैं।
  • वैश्विक:
    • मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (Universal Declaration of Human Rights) का अनुच्छेद 18 पुष्टि करता है कि, “प्रत्येक व्यक्ति को विचार, अन्तःकरण तथा धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार है, इस अधिकार में अपने धर्म अथवा विश्वास को परिवर्तित करने की स्वतंत्रता तथा एकल अथवा दूसरों के साथ समुदाय में एवं सार्वजनिक अथवा निजी तौर पर शिक्षण, अभ्यास, उपासना व अनुसरण में अपने धर्म अथवा आस्था को अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता शामिल है।