ट्विटर की घृणास्पद आचरण नीति और डेडनेमिंग | 21 Apr 2023

हाल ही में ट्विटर ने अपनी उस घृणास्पद आचरण नीति को बदल दिया है, जो एक समय अपने मंच पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के गलत लिंग और पहचान को प्रतिबंधित करता था।

  • इसने कई लोगों के बीच विवाद को जन्म दिया है जो मानते हैं कि एलोन मस्क के नेतृत्त्व में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के हाशिये के समूहों के लिये सुरक्षा मानकों से समझौता किया जा रहा है।

ट्विटर की नीति में किये गए बदलाव:

  • नीति को लेकर अध्ययन में कहा गया कि “हम दूसरों को बार-बार अपमान (Slurs), ट्रॉप (किसी शब्द या अभिव्यक्ति का आलंकारिक या लाक्षणिक उपयोग) या अन्य विषय-वस्तु के साथ लक्षित करने पर रोक लगाते हैं, जो एक संरक्षित श्रेणी के बारे में नकारात्मक या हानिकारक रूढ़िवादिता को अमानवीय, नीचा दिखाने या मज़बूत करने का इरादा रखता है। इसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लक्षित गलत लिंग या डेडनेमिंग शामिल हैं।
    • ट्विटर ने ट्रांसजेंडर्स के लिये इस सुरक्षा को हटा दिया है।
  • अपनी "घृणास्पद आचरण नीति" को बदलने के अतिरिक्त ट्विटर ने घोषणा की है कि वह केवल कुछ ट्वीट्स पर चेतावनी लेबल लगाएगा जो घृणित आचरण के खिलाफ नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं। पहले इन नियमों का उल्लंघन करने वाले ट्वीट्स को प्लेटफॉर्म से पूरी तरह से हटा दिया जाता था
    • इस परिवर्तन से प्लेटफॉर्म पर हानिकारक सामग्री में वृद्धि हो सकती है, जो हाशिये के  समूहों की सुरक्षा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
  • आलोचकों का तर्क:  
    • ट्विटर पर हाशिये के समूहों की सुरक्षा के बारे में चिंता कई बार जताई गई है, कई आलोचकों का तर्क है कि एलोन मस्क के नेतृत्त्व में मंच कम सुरक्षित बन गया है।
    • आलोचकों का मानना है कि मंच अब उपयोगकर्त्ताओं को "ट्रोलिंग, राज्य-समन्वित गलत सूचना एवं बाल यौन शोषण" से नहीं बचा सकता है। 

डेडनेमिंग: 

  • डेडनेमिंग ट्रांस, नॉन-बाइनरी/लिंग द्विभाजन और/या जेंडर-एक्सपेंसिव व्यक्ति (ऐसे व्यक्ति जो लैंगिक रूढ़ियों को नहीं मानते) को जन्म के नाम या चुने हुए नाम को अपनाने से पहले उनके द्वारा उपयोग किये जाने वाले नाम से बुलाने की क्रिया है।
    • क्योंकि यह किसी व्यक्ति की पहचान की मान्यता रद्द कर देता है और ऐसी व्यक्तिगत जानकारी प्रकट कर सकता है जिसे संबद्ध व्यक्ति सार्वजनिक नहीं करना चाहता, यह प्रथा हानिकारक है।
  • डेडनेमिंग काफी हानिकारक है क्योंकि किसी व्यक्ति के चुने हुए नाम अथवा उपनाम का उपयोग करने से इनकार करना ट्रांसफोबिया अथवा सिस-सेक्सिज़्म का एक रूप है, जिसके परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति को उत्पीड़न, भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है तथा यह अवसाद एवं आत्महत्या जैसी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों में भी योगदान देता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस