टेटनस एवं अडल्ट डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन | 23 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (CRI), कसौली में स्वदेशी रूप से निर्मित टेटनस एवं अडल्ट डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन का शुभारंभ किया।
- यह कदम वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करता है, आयात पर निर्भरता को कम करता है तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को सशक्त बनाता है।
टेटनस और अडल्ट डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
- द्वैध सुरक्षा: पारंपरिक टेटनस टॉक्सॉइड (TT) वैक्सीन, जो केवल टेटनस से सुरक्षा प्रदान करती है, के विपरीत Td वैक्सीन टेटनस (T) और डिफ्थीरिया (d) दोनों से संरक्षण देती है।
- कम एंटीजन मात्रा: Td में ‘d’ डिफ्थीरिया टॉक्सॉइड की कम मात्रा को दर्शाता है, जिसे विशेष रूप से वयस्कों और किशोरों के लिये इस प्रकार तैयार किया गया है कि दुष्प्रभाव कम हों और प्रतिरक्षा प्रभावी रूप से बढ़े।
- यद्यपि बचपन में दिया जाने वाला DPT (डिफ्थीरिया, काली खाँसी, टेटनस) टीका प्रारंभिक सुरक्षा प्रदान करता है, परंतु वयस्कावस्था में डिफ्थीरिया के प्रति प्रतिरक्षा प्रायः कम हो जाती है। Td बूस्टर दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करता है।
- TT का प्रतिस्थापन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने देशों को टेटनस टॉक्सॉइड (TT) टीके के स्थान पर Td टीका अपनाने की अनुशंसा की है।
- भारत में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह (NTAGI) ने भी सभी आयु-वर्गों, गर्भवती महिलाओं सहित, के लिये टीकाकरण कार्यक्रम में TT के स्थान पर Td टीका लागू करने की अनुशंसा की है, ताकि टेटनस उन्मूलन की उपलब्धियों को बनाए रखते हुए डिफ्थीरिया के विरुद्ध बेहतर सुरक्षा प्रदान की जा सके।
- इस परिवर्तन को समर्थन देते हुए केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, कसौली (CRI) ने Td टीके का विकास पूरा कर लिया है, नियामकीय स्वीकृतियाँ प्राप्त कर ली हैं तथा इसका वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ कर दिया है।
- यह टीका अब औपचारिक रूप से सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP), जो विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है, में शामिल कर लिया गया है। केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (CRI), कसौली अप्रैल 2026 तक इसकी 55 लाख खुराकें उपलब्ध कराएगा।
टेटनस और डिफ्थीरिया के बारे में मुख्य तथ्य क्या हैं?
टेटनस
- कारण और संचरण: टेटनस क्लोस्ट्रीडियम टेटानी नामक बैक्टीरिया के एनएरोबिक स्पोर्स के कारण होता है, ये स्पोर्स मिट्टी, धूल और पशुओं के मल में बहुतायत में पाए जाते हैं
- यह एक गैर-संचारी बीमारी है (अर्थात यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती) और शरीर में दूषित घावों, कटने या गर्भनाल के माध्यम से प्रवेश करती है।
- मातृ और नवजात टेटनस (MNT): यह अब भी कम-आय वाले क्षेत्रों में मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
- नवजात टेटनस आमतौर पर तब होता है जब गर्भनाल को काटने के लिये असंक्रमित या अस्वच्छ उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
- लक्षण: इसे आमतौर पर "लॉकजॉ" (lockjaw) के नाम से जाना जाता है। इसके मुख्य लक्षणों में जबड़े में जकड़न (Cramping), माँसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन (अक्सर शोर से शुरू होने वाली), निगलने में कठिनाई और दौरे पड़ना शामिल हैं।
- रोकथाम और टीकाकरण रणनीति: टेटनस को टेटनस टॉक्सॉइड युक्त टीकों (TTCV) के माध्यम से पूरी तरह रोका जा सकता है।
- हालाँकि इस बीमारी से ठीक होने के बाद शरीर में प्राकृतिक प्रतिरक्षा (Natural Immunity) विकसित नहीं होती, इसलिये स्वस्थ होने के बाद भी उत्तरजीवियों (Survivors) के लिये टीकाकरण अनिवार्य है।
- वैश्विक प्रगति: 1988 और 2018 के बीच टीकाकरण कार्यक्रमों के आक्रामक वैश्विक विस्तार के कारण नवजात टेटनस से होने वाली मौतों में 97% की कमी आई है।
- भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धियाँ: भारत ने वर्ष 2015 में प्रत्येक ज़िले में नवजात टेटनस की वार्षिक दर को 1,000 जीवित जन्मों पर 1 से कम मामले तक घटा दिया।
- डिजिटल ट्रैकिंग: भारत U-WIN प्लेटफॉर्म का उपयोग करके लगभग 5 करोड़ वार्षिक लाभार्थियों के प्रत्येक टीकाकरण कार्यक्रम को डिजिटल रूप से ट्रैक करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उन्हें 16 वर्ष की आयु तक निर्धारित सभी 27 टीके प्राप्त हों।
डिफ्थीरिया
- कारण: यह बीमारी मुख्य रूप से कोरिनेबैक्टेरियम डिफ्थीरिया (Corynebacterium Diphtheriae) नामक बैक्टीरिया के कारण होती है।
- संचरण: यह रोग मुख्य रूप से खाँसी और छींक या संक्रमित व्यक्ति के साथ निकट संपर्क के माध्यम से फैलता है।
- ‘स्यूडोमेंब्रेन’ डिफ्थीरिया का एक प्रमुख लक्षण संक्रमण के 2-3 दिनों के भीतर नाक और गले में मृत ऊतकों की एक मोटी, धूसर परत का बनना है, जो श्वसन मार्ग में बाधा उत्पन्न कर सकती है।
- घातक जटिलताएँ: यह टॉक्सिन रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकता है, जिससे मायोकार्डाइटिस (हृदय की माँसपेशियों की सूजन) और न्यूरोपैथी (तंत्रिका क्षति) हो सकती है। उपचार न होने पर मृत्यु दर 30% तक पहुँच सकती है, विशेषकर 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में।
- जोखिम कारक: शरणार्थी शिविरों में भीड़भाड़, संघर्ष के कारण क्षतिग्रस्त स्वास्थ्य अवसंरचना और अपर्याप्त टीकाकरण हालिया पुनरावृत्ति के प्रमुख कारण हैं।
- महामारी के कारण नियमित टीकाकरण और निगरानी प्रणालियों में गंभीर बाधाएँ आईं, जिससे लाखों बच्चे रोग प्रकोपों के प्रति संवेदनशील हो गए।
- उपचार: डिफ्थीरिया के उपचार में डिफ्थीरिया एंटीटॉक्सिन (DAT) की आवश्यकता होती है, जो टॉक्सिन को निष्क्रिय करता है तथा एंटीबायोटिक्स, जो बैक्टीरिया को नष्ट करती हैं। हालाँकि डिफ्थीरिया के जीवाणुओं में बढ़ता हुआ एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (AMR) एक गंभीर और उभरती हुई चिंता बनता जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. टीडी वैक्सीन क्या है और यह टीटी वैक्सीन से किस प्रकार भिन्न है?
टीडी वैक्सीन टेटनस और डिफ्थीरिया दोनों से सुरक्षा प्रदान करती है, जबकि टीटी केवल टेटनस से सुरक्षा प्रदान करती है।
2. भारत ने टीटी वैक्सीन को टीडी वैक्सीन से क्यों बदला?
भारत ने WHO और NTAGI की सिफारिशों के आधार पर TT वैक्सीन को TD वैक्सीन से बदल दिया है। इस बदलाव से डिफ्थीरिया के खिलाफ सुरक्षा बेहतर होती है और साथ ही टेटनस उन्मूलन में प्राप्त उपलब्धियाँ भी बनी रहती हैं।
3. CRI कसौली में स्वदेशी टीडी वैक्सीन उत्पादन का क्या महत्त्व है?
CRI कसौली में टीडी वैक्सीन (TD vaccine) का स्वदेशी उत्पादन 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को सशक्त करता है। यह महत्त्वपूर्ण कदम वैक्सीन आयात पर हमारी निर्भरता को कम करता है और देश के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के लिये वैक्सीन की विश्वसनीय और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
4. टेटनस और डिफ्थीरिया के संचरण में क्या अंतर है?
टेटनस एक संक्रामक रोग है और घावों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है, जबकि डिफ्थीरिया श्वसन और वाहकों के माध्यम से फैलता है।
5. टीकाकरण में यू-विन प्लेटफॉर्म की क्या भूमिका है?
यू-विन (U-Win) लाखों लाभार्थियों के टीकाकरण को डिजिटल रूप से ट्रैक करने में सक्षम बनाता है। यह सुनिश्चित करता है कि यूआईपी (UIP) के तहत टीकाकरण कवरेज समय पर हो और उसकी उचित निगरानी की जा सके।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)
प्रिलिम्स:
प्रश्न. 'रिकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन' के संबंध में हाल के घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- इन टीकों के विकास में जेनेटिक इंजीनियरिंग का प्रयोग किया जाता है।
- बैक्टीरिया और वायरस का उपयोग वेक्टर के रूप में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
2. निम्नलिखित रोगों पर विचार कीजिये:
1. डिफ्थीरिया
2. छोटी माता (चिकनपॉक्स)
3. चेचक (स्मॉलपॉक्स)
उपर्युक्त में से किस रोग/किन रोगों का भारत में उन्मूलन हो चुका है?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) 1, 2 और 3
(d) कोई नहीं
उत्तर: (b)