तमिलनाडु ने तीसरी भाषा पर UGC सर्कुलर का विरोध किया | 27 Jan 2026

स्रोत: द हिंदू

तमिलनाडु ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उस सर्कुलर का औपचारिक रूप से विरोध किया है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में तीसरी भाषा अनिवार्य करता है, इसे हिंदी लागू करने का अप्रत्यक्ष प्रयास करार दिया और राज्य की ऐतिहासिक द्विभाषा नीति के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।

  • त्रि-भाषा सूत्र की अस्वीकृति: तमिलनाडु ने केंद्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 में प्रस्तावित त्रि-भाषा सूत्र को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया और हालिया UGC सर्कुलर को राज्य नीति का उल्लंघन मानते हुए विरोध जताया।
    • NEP 2020 बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है और छात्रों को तीन भाषाएँ सीखने की आवश्यकता बताती है, जिनमें कम-से-कम दो भाषाएँ भारतीय मूल की (जिसमें एक क्षेत्रीय भाषा शामिल) होनी चाहिये। तीसरी भाषा अंग्रेज़ी या कोई अन्य आधुनिक भारतीय/विदेशी भाषा हो सकती है।
  • द्विभाषा नीति का पालन: तमिलनाडु की राज्य शिक्षा नीति अब भी द्विभाषा सूत्र (तमिल और अंग्रेज़ी) को बनाए रखती है, जो मूल रूप से पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई द्वारा 1968 में तैयार की गई थी।
    • राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में यह अपनी भाषा नीति में किसी भी परिवर्तन को स्वीकार नहीं करेगी।
    • यह मुद्दा शिक्षा पर केंद्र-राज्य तनाव को भी उजागर करता है, जो संविधान की समानवर्ती सूची (Concurrent List) में शामिल है।
    • वर्ष 2022 में, विधानसभा ने एकमत से संघ सरकार से अनुरोध किया कि वह संसदीय समिति ऑन ऑफिशियल लैंग्वेज की अनुशंसाएँ लागू न करे, जिनमें केंद्रीय संस्थानों में हिंदी को शिक्षण माध्यम बनाने का प्रस्ताव शामिल था।

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