सर्वोच्च न्यायालय द्वारा UGC 2026 के विनियमों पर रोक | 31 Jan 2026

स्रोत: द हिंदू 

सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने यह कहते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विनियमों [उच्च शिक्षा संस्थानों में समता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026] के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है क्योंकि इनसे समाज में विभाजन होने और परिसर की एकता कमज़ोर पड़ने की आशंका है।  

  • न्यायिक हस्तक्षेप: चूँकि वर्ष 2012 वाले विनियम पहले ही निरस्त किये जा चुके थे, इसलिये न्यायालय ने अपने अनुच्छेद 142 के तहत निहित विशेषाधिकारों का उपयोग करते हुए निर्देश दिया कि आगामी आदेश तक UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता को बढ़ावा देने संबंधी) विनियम, 2012 ही लागू रहेंगे।
  • पृष्ठभूमि एवं संदर्भ: वर्ष 2026 के विनियम अबेदा सलीम तडवी बनाम भारत संघ (2019) मामले की पृष्ठभूमि में बनाए गए थे, जिसका उद्देश्य परिसरों में जाति-आधारित भेदभाव समाप्त करने के लिये एक ठोस तंत्र स्थापित करना है।
  • वर्ष 2026 के विनियमों पर मुख्य विधिक एवं परिभाषात्मक चुनौतियाँ: याचिकाओं में विशेष रूप से धारा 3(1)(c) को चुनौती दी गई, क्योंकि यह भेदभाव को केवल SC, ST और OBC सदस्यों तक सीमित रूप से परिभाषित करती है, जिससे सामान्य वर्ग इससे पृथक् रह जाता है।
    • पीठ ने इस संकीर्ण उपबंध की आवश्यकता पर सवाल उठाया, क्योंकि धारा 3(1)(e) पहले ही धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्मस्थान या दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव की एक व्यापक और समावेशी परिभाषा प्रदान करती है।
    • सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी सवाल उठाए कि क्या UGC 2026 के विनियम क्षेत्रीय आधार पर होने वाले उत्पीड़न, आर्थिक रूप से सशक्त लोगों द्वारा की जाने वाली अंतःजाति (जाति के भीतर) हिंसा/उत्पीड़न और रैगिंग की घटनाओं को पर्याप्त रूप से कवर करते हैं या नहीं। इसके अतिरिक्त, इन विनियमों में झूठी शिकायतों के लिये दंडात्मक तंत्र का भी अभाव है।
  • मुख्य न्यायिक चिंताएँ: सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण और सामाजिक न्याय संबंधी कानूनों में विकसित "नो-रिग्रेशन सिद्धांत" का हवाला देते हुए प्रश्न किया कि वर्ष 2012 के नियमों की तुलना में वर्ष 2026 के नियम अधिक समावेशी होने के बजाय कम समावेशी क्यों हैं।
    • पीठ ने इन विनियमों की समीक्षा अनुच्छेद 15(4) के दृष्टिकोण से भी की, जो राज्य को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, विशेषकर SC और ST के उन्नयन के लिये विशेष उपबंध करने में सक्षम बनाता है।

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