सुभाष चंद्र बोस | 23 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
हाल ही में सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाने के लिये पराक्रम दिवस का आयोजन किया गया।
पराक्रम दिवस क्या है?
- परिचय: पराक्रम दिवस (वीरता दिवस) भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष 23 जनवरी को मनाया जाता है।
- पराक्रम दिवस 2026 सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर मनाया जा रहा है।
- पिछले समारोह:
- वर्ष 2021: पहला पराक्रम दिवस कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित किया गया था।
- वर्ष 2022: नई दिल्ली के इंडिया गेट पर नेताजी की एक होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया गया।
- वर्ष 2023: अंडमान और निकोबार के 21 द्वीपों का नाम परमवीर चक्र पुरस्कार के विजेताओं जैसे मेजर सोमनाथ शर्मा, नायक जदुनाथ सिंह आदि के नाम पर रखा गया।
- वर्ष 2024: यह आयोजन दिल्ली के लाल किले में शुरू किया गया, जो INA के मुकदमों का स्थल था।
- वर्ष 2025: कटक के बाराबती किले में एक देश स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो उनके जन्मस्थान को चिह्नित करता है।
- महत्त्व: यह दिवस नेताजी सुभाष चंद्र बोस की साहस, वीरता और देशभक्ति का प्रतीक है, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) का नेतृत्व किया तथा पूर्ण स्वतंत्रता का समर्थन किया।
- यह नेताजी के प्रसिद्ध नारे, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा" को भी स्मरण कराता है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में लाखों लोगों को प्रेरित किया।
सुभाष चंद्र बोस के संबंध में प्रमुख तथ्य क्या है?
- प्रारंभिक जीवन: सुभाष चंद्र बोस का जन्म 1897 में कटक (वर्तमान ओडिशा, उस समय बंगाल) में जनकीनाथ और प्रभावती बोस के परिवार में हुआ था। नेताजी का पालन‑पोषण ऐसे परिवार में हुआ जहाँ अंग्रेज़ी शिक्षा और हिंदू रीति‑रिवाज़ों को महत्त्व दिया जाता था।
- उन्होंने रैवेंशॉ कॉलेजिएट स्कूल में शिक्षा प्राप्त की और बाद में प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता में अध्ययन किया, जहाँ वे ब्रिटिश शासन-विरोधी गतिविधियों में शामिल हुए।
- वैचारिक आधार: उन्हें रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं से प्रेरणा मिली, साथ ही बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ के विचारों ने भी उनके दृष्टिकोण को प्रभावित किया।
- उन्होंने पश्चिमी और भारतीय संस्कृतियों का एक अनोखा मिश्रण विकसित किया, जो विशेष रूप से भारत की स्वतंत्रता तथा पुनरुत्थान पर केंद्रित था।
- प्रारंभिक राजनीतिक भागीदारी: सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1920 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (ICS) परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन वर्ष 1921 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिये त्याग-पत्र दे दिया।
- वर्ष 1921 में नेताजी ने बॉम्बे में महात्मा गांधी से मुलाकात की, लेकिन स्वतंत्रता प्राप्ति के उनके तरीके, विशेषकर धैर्य और अहिंसा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, से वे असहमत थे।
- कांग्रेस से असहमति: वर्ष 1938 में, नेताजी को हरिपुरा सत्र में कांग्रेस अध्यक्ष चुना गया, जहाँ उन्होंने स्वराज का समर्थन किया और भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत भारतीय संघीय ढाँचे का विरोध किया।
- वर्ष 1939 में नेताजी को त्रिपुरी सत्र में फिर से कांग्रेस अध्यक्ष चुना गया, जहाँ उन्होंने गांधी समर्थित डॉ. पत्ताभि सितारामय्या को हराया। इसे गांधी ने व्यक्तिगत पराजय के रूप में देखा, जिसके परिणामस्वरूप कार्यकारी समिति के 15 में से 12 सदस्य, जिनमें जे.एल. नेहरू, पटेल और राजेंद्र प्रसाद शामिल थे, ने त्याग-पत्र दे दिया।
- बोस ने नई कार्यकारी समिति बनाने का प्रयास किया, लेकिन वह असफल रहे, जिसके कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह राजेंद्र प्रसाद को नियुक्त किया गया।
- बोस ने 29 अप्रैल, 1939 को कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्याग-पत्र दे दिया और फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना का प्रस्ताव रखा, जिसका उद्देश्य क्रांतिकारी-वामपंथी कांग्रेस सदस्यों को एकजुट करना तथा स्वतंत्रता के बाद विरोधी-उपनिवेशवाद एवं समाजवाद पर आधारित वैकल्पिक नेतृत्व प्रदान करना था।
- वर्ष 1939 में नेताजी को त्रिपुरी सत्र में फिर से कांग्रेस अध्यक्ष चुना गया, जहाँ उन्होंने गांधी समर्थित डॉ. पत्ताभि सितारामय्या को हराया। इसे गांधी ने व्यक्तिगत पराजय के रूप में देखा, जिसके परिणामस्वरूप कार्यकारी समिति के 15 में से 12 सदस्य, जिनमें जे.एल. नेहरू, पटेल और राजेंद्र प्रसाद शामिल थे, ने त्याग-पत्र दे दिया।
- मृत्यु: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद जापान ने 16 अगस्त, 1945 को आत्मसमर्पण किया। इसके बाद बोस दक्षिण-पूर्व एशिया से जापानी विमान द्वारा चीन की ओर रवाना हुए। हालाँकि कुछ विवरणों के अनुसार विमान कथित तौर पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे सुभाष चंद्र बोस गंभीर रूप से जल गए, लेकिन अभी भी जीवित थे।
- विरासत: सुभाष चंद्र बोस का नेतृत्व, उनका वैचारिक दृष्टिकोण और स्वतंत्रता के लिये उनका संकल्प उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. पराक्रम दिवस क्यों मनाया जाता है?
पराक्रम दिवस 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके साहस, बलिदान तथा नेतृत्व को सम्मानित करता है।
2. नेताजी ने स्वतंत्रता आंदोलन को कैसे नया स्वरूप दिया?
जब पारंपरिक तरीके अपर्याप्त प्रतीत होने लगे, तब नेताजी ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) का नेतृत्व करके संघर्ष को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप दिया।
3. नेताजी को ‘देशनायक’ क्यों कहा जाता है?
राष्ट्रीय संकट के समय साहस, दूरदृष्टि और नैतिक बल के उनके दुर्लभ संयोजन के कारण रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें ‘देशनायक’ कहा था।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न: गदर क्या था: (2014)
(a) भारतीयों का क्रांतिकारी संघ जिसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को में था।
(b) एक राष्ट्रवादी संगठन जो सिंगापुर से संचालित होता था।
(c) उग्रवादी संगठन जिसका मुख्यालय बर्लिन में था।
(d) भारत की स्वतंत्रता के लिये कम्युनिस्ट आंदोलन जिसका मुख्यालय ताशकंद में था।
उत्तर: (a)
प्रश्न: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान निम्नलिखित में से किसने 'फ्री इंडियन लीजन' नामक सेना स्थापित की थी? (2008)
(a) लाला हरदयाल
(b) रासबिहारी बोस
(c) सुभाष चंद्र बोस
(d) वी.डी. सावरकर
उत्तर: c
