मिज़ोरम और अरुणाचल प्रदेश का राज्य दिवस | 21 Feb 2026
20 फरवरी को प्रधानमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम के लोगों को उनके राज्य स्थापना दिवस पर शुभकामनाएँ दीं। यह दिन 20 फरवरी, 1987 को दोनों राज्यों को पूर्ण राज्य का दर्जा दिये जाने की स्मृति में मनाया जाता है।
- राज्य का दर्जा प्रदान करना: 53वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1986 द्वारा मिज़ोरम को राज्य का दर्जा दिया गया, जबकि 55वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1986 के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा प्रदान किया गया।
मिज़ोरम
- परिचय: मिज़ोरम 20 फरवरी, 1987 को भारतीय संघ का 23वाँ राज्य बना। यह मिज़ोरम शांति समझौते (1986) के बाद संभव हुआ, जो भारत सरकार और मिज़ो नेशनल फ्रंट के बीच संपन्न हुआ था।
- इस समझौते से उग्रवाद के लंबे दौर का अंत हुआ और मिज़ोरम के 1972 में केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
- ऐतिहासिक विकास: मिज़ोरम को मूल रूप से असम का लुशाई हिल्स ज़िला कहा जाता था और वर्ष 1954 में इसका नाम बदलकर मिज़ो हिल्स रखा गया।
- संवैधानिक संरक्षण: मिज़ोरम को भारत के संविधान की छठी अनुसूची [अनुच्छेद 244(2)] के अंतर्गत एक “जनजातीय क्षेत्र” के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्वायत्तता सुनिश्चित होती है।
अरुणाचल प्रदेश
- परिचय: अरुणाचल प्रदेश 20 फरवरी, 1987 को भारतीय संघ का 24वाँ राज्य बना। इससे पहले यह नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (NEFA) के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1972 में इसका नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश रखा गया और इसे केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया।
- औपनिवेशिक उद्भव: अरुणाचल प्रदेश का आधुनिक इतिहास यंडाबू की संधि (1826) के बाद ब्रिटिश नियंत्रण के साथ प्रारंभ हुआ, जो प्रथम आंग्ल–बर्मी युद्ध (1824–1826) के पश्चात हुई थी। इसके बाद शिमला संधि (1914) के माध्यम से तिब्बत और NEFA के बीच सीमा का निर्धारण किया गया, जिसे मैकमोहन रेखा के रूप में जाना जाता है।
- ऐतिहासिक विकास: 1962 तक अरुणाचल प्रदेश असम के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत रहा। इसके बाद इसके रणनीतिक महत्त्व को देखते हुए इसे अलग से प्रशासित केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।
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